देश के असंख्य बेरोजगारों के लिए यह अच्छी खबर है कि केद्र सरकार दो साल के भीतर दो लाख बीस हजार नौकरियों की भर्ती कर रही है। लेकिन इससे भी अच्छी खबर यह है कि उभरता और मजबूत भारत निवेशकों की पहली पसंद है। भारत में सरकारी नौकरियों के प्रति आज भी खासा आकर्षण है और ग्रामीण इलाकों में तो सरकारी नौकरी प्रतिष्ठा का सवाल है। केन्द्र सरकार में छह लाख पद खाली रहने के बावजूद मौदी सरकार लगभग सवा दो लाख नौकरियां के लिए भर्ती करेगी। केन्द्र के अधिकांश महकमे गु्रप बी और सी कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं। सरकार उच्च पदों की भर्ती में तो कोई कसर नहीं छोडती है मगर निचली श्रेणी के पदों को भरने में कोताही की जाती है। ऐसा क्यों? प्रधान मंत्री की घोषणा के मुताबिक पहली जनवरी 2016 के बाद से निचली श्रेणी ग्रुप डी और सी के साथ-साथ ग्रुप बी के अराजपत्रित पदों के लिए भी कोई इंटरव्यू नहीं लिए जाएंगे और भर्ती विशुद्ध योग्यता के आधार पर की जाएगी। प्रधानमंत्री का कहना है कि दुनिया में ऐसा कोई भी एक्सपर्ट नहीं है जो दो-तीन मिनट के इंटरव्यू में प्रत्याशी की योग्यता परख ले। यह व्यवस्था भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद को ही जन्म देती है। बहरहाल, देश में बेरोजगारों की बढती संख्या के मद्देनजर दो लाख बीस हजार सरकारी नौकरियों की भर्ती से रोजगार के लिए मारे-मारे भटक रहे युवकों को काफी राहत मिल सकती है। देश में इस समय एक करोड से भी अधिक स्नातक, स्नाकोतर (पोस्ट ग्रेजुएट) और टेक्निक्ल ग्रेजुएट एवं पोस्ट ग्रेजुएट रोजगार की तलाश में है। भारत में 1983 से 2013 के दरम्यान बेरोजगार का औसत 7.32 फीसदी रहा है। 2009 में यह औसत सबसे ज्यादा 9.40 फीसदी था जबकि 2013 में बेरोजगारी की दर सबसे कम 4.90 फीसदी थी। आकंडों से यह जानकारी भी मिलती है कि जितनी अधिक शैक्षणिक योग्यता होगी, बेरोजगारी उतनी ही अधिक भीषण होगी। 2011की जनगणना के मुताबिक निरक्षरों में बेरोजगारी की दर 7.23 फीसदी थी तो उच्च योग्यता वालों में बेरोजगारी की दर 15.78 फीसदी थी। मैट्रिक से कम साक्षरों में बेरोजगारी की दर 8.88 फीसदी थी तो मैट्रिक और स्नातक से कम पड़े-लिखों में 14.55 फीसदी बेरोजगार थे। तथापि सुखद स्थिति यह है कि 2022 तक भारत के पास दुनिया में सबसे विशाल एक अरब वर्कफोर्स होगी और इस मेंसे पचास फीसदी 25 साल से कम उमर की होगी। और यही युवा फोर्स भारत को दुनिया की सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्था बनाएगी। जाहिर है, इतनी बडी वर्कफोर्स को रोजगार मुहैया कराने के लिए भी व्यापक स्तर पर प्रयास करने पडेंगे। आर्थिक सुधारों में शिथिलता आने की वजह से रोजगार सृजन में कुछ गिरावट आई है मगर इसके बावजूद भारत में 2015 के दौरान चीन और अमेरिका से कहीं ज्यादा विदेशी निवेश आया है और इससे रोजगार का सृजन हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने वाली दुनिया की सबसे बडी कंपनी फोक्सकन महाराष्ट्र में पांच अरब डॉलर का कारखाना स्थापित कर रही है। इस फैक्ट्री में पचास हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। कंपनी के चेयरमैन का कहना है कि अगले एक दश क में फॉक्सकन हरा राज्य में एक-एक फैक्ट्री लगाकर दस लाख रोजगार के अवसर मुहैया करा सकती है। भारत में अभी भी मैन्युफेक्चरिंग सेक्टर की क्षमता का पूरा-पूरा दोहन नहीं हो पाया है। भारत में मैन्युफेक्चरिंग सेक्टर का सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) में केवल 15 फीसदी का ही योगदान है और इस सेक्टर में महज 12 फीसदी वर्कफोर्स को रोजगार मिलता है। चीन में यह भारत से दोगुना 30 फीसदी है और 40 फीसदी को इस सेक्टर से रोजगार मिलता है। प्रधानमंत्री बार-बार मैन्युफेक्चरिंग सेक्टर की क्षमता बढाने पर जोर दे रहे हैं। प्रधानमंत्री की “मेक इन इंडिया“ योजना का मकसद भी मैन्युफेक्चरिंग उत्पादन को बढाना है। इसलिए वे देश -विदेश के निवेशकों से भारत में कारखाने लगाने किए लिए प्रेरित कर रहे हैं। मैन्युफेक्चरिंग में प्रत्येक परसेंटेज ग्रोथ से लगभग तीन करोड रोजगार के अवसर सृजित होते हैं। इस तरह के प्रयासों से ही भारत की युवा वर्कफोर्स को रोजगार मुहैया कराया जा सकता है। हर बेरोजगार को सरकारी नौकरी नहीं दी जा सकती।
बुधवार, 20 अप्रैल 2016
यहां है रोजगार
Posted on 6:46 pm by mnfaindia.blogspot.com/
देश के असंख्य बेरोजगारों के लिए यह अच्छी खबर है कि केद्र सरकार दो साल के भीतर दो लाख बीस हजार नौकरियों की भर्ती कर रही है। लेकिन इससे भी अच्छी खबर यह है कि उभरता और मजबूत भारत निवेशकों की पहली पसंद है। भारत में सरकारी नौकरियों के प्रति आज भी खासा आकर्षण है और ग्रामीण इलाकों में तो सरकारी नौकरी प्रतिष्ठा का सवाल है। केन्द्र सरकार में छह लाख पद खाली रहने के बावजूद मौदी सरकार लगभग सवा दो लाख नौकरियां के लिए भर्ती करेगी। केन्द्र के अधिकांश महकमे गु्रप बी और सी कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं। सरकार उच्च पदों की भर्ती में तो कोई कसर नहीं छोडती है मगर निचली श्रेणी के पदों को भरने में कोताही की जाती है। ऐसा क्यों? प्रधान मंत्री की घोषणा के मुताबिक पहली जनवरी 2016 के बाद से निचली श्रेणी ग्रुप डी और सी के साथ-साथ ग्रुप बी के अराजपत्रित पदों के लिए भी कोई इंटरव्यू नहीं लिए जाएंगे और भर्ती विशुद्ध योग्यता के आधार पर की जाएगी। प्रधानमंत्री का कहना है कि दुनिया में ऐसा कोई भी एक्सपर्ट नहीं है जो दो-तीन मिनट के इंटरव्यू में प्रत्याशी की योग्यता परख ले। यह व्यवस्था भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद को ही जन्म देती है। बहरहाल, देश में बेरोजगारों की बढती संख्या के मद्देनजर दो लाख बीस हजार सरकारी नौकरियों की भर्ती से रोजगार के लिए मारे-मारे भटक रहे युवकों को काफी राहत मिल सकती है। देश में इस समय एक करोड से भी अधिक स्नातक, स्नाकोतर (पोस्ट ग्रेजुएट) और टेक्निक्ल ग्रेजुएट एवं पोस्ट ग्रेजुएट रोजगार की तलाश में है। भारत में 1983 से 2013 के दरम्यान बेरोजगार का औसत 7.32 फीसदी रहा है। 2009 में यह औसत सबसे ज्यादा 9.40 फीसदी था जबकि 2013 में बेरोजगारी की दर सबसे कम 4.90 फीसदी थी। आकंडों से यह जानकारी भी मिलती है कि जितनी अधिक शैक्षणिक योग्यता होगी, बेरोजगारी उतनी ही अधिक भीषण होगी। 2011की जनगणना के मुताबिक निरक्षरों में बेरोजगारी की दर 7.23 फीसदी थी तो उच्च योग्यता वालों में बेरोजगारी की दर 15.78 फीसदी थी। मैट्रिक से कम साक्षरों में बेरोजगारी की दर 8.88 फीसदी थी तो मैट्रिक और स्नातक से कम पड़े-लिखों में 14.55 फीसदी बेरोजगार थे। तथापि सुखद स्थिति यह है कि 2022 तक भारत के पास दुनिया में सबसे विशाल एक अरब वर्कफोर्स होगी और इस मेंसे पचास फीसदी 25 साल से कम उमर की होगी। और यही युवा फोर्स भारत को दुनिया की सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्था बनाएगी। जाहिर है, इतनी बडी वर्कफोर्स को रोजगार मुहैया कराने के लिए भी व्यापक स्तर पर प्रयास करने पडेंगे। आर्थिक सुधारों में शिथिलता आने की वजह से रोजगार सृजन में कुछ गिरावट आई है मगर इसके बावजूद भारत में 2015 के दौरान चीन और अमेरिका से कहीं ज्यादा विदेशी निवेश आया है और इससे रोजगार का सृजन हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने वाली दुनिया की सबसे बडी कंपनी फोक्सकन महाराष्ट्र में पांच अरब डॉलर का कारखाना स्थापित कर रही है। इस फैक्ट्री में पचास हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। कंपनी के चेयरमैन का कहना है कि अगले एक दश क में फॉक्सकन हरा राज्य में एक-एक फैक्ट्री लगाकर दस लाख रोजगार के अवसर मुहैया करा सकती है। भारत में अभी भी मैन्युफेक्चरिंग सेक्टर की क्षमता का पूरा-पूरा दोहन नहीं हो पाया है। भारत में मैन्युफेक्चरिंग सेक्टर का सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) में केवल 15 फीसदी का ही योगदान है और इस सेक्टर में महज 12 फीसदी वर्कफोर्स को रोजगार मिलता है। चीन में यह भारत से दोगुना 30 फीसदी है और 40 फीसदी को इस सेक्टर से रोजगार मिलता है। प्रधानमंत्री बार-बार मैन्युफेक्चरिंग सेक्टर की क्षमता बढाने पर जोर दे रहे हैं। प्रधानमंत्री की “मेक इन इंडिया“ योजना का मकसद भी मैन्युफेक्चरिंग उत्पादन को बढाना है। इसलिए वे देश -विदेश के निवेशकों से भारत में कारखाने लगाने किए लिए प्रेरित कर रहे हैं। मैन्युफेक्चरिंग में प्रत्येक परसेंटेज ग्रोथ से लगभग तीन करोड रोजगार के अवसर सृजित होते हैं। इस तरह के प्रयासों से ही भारत की युवा वर्कफोर्स को रोजगार मुहैया कराया जा सकता है। हर बेरोजगार को सरकारी नौकरी नहीं दी जा सकती।






