रविवार, 10 अप्रैल 2016

सांप को दूध पिलाना......

कहावत है,“सांप को कितना भी दूध पिलाओ, वह डसना नहीं छोडेगा“। भारत के पडोसी देश  पाकिस्तान पर यह कहावत सौ फीसदी चरितार्थ होती है। भारत  पाकिस्तान को कितना भी सर चढा ले, उसे बार-बार गले लगा ले अथवा दूध पिला ले, वह डंक मारना , दगा देना  नहीं छोडेगा और पीठ में छूरा घोपने से बाज नहीं आएगा  । पठानकोट हमले को लेकर पाकिस्तान की जांच टीम को भारत आने की अनुमति देकर मोदी सरकार ने, निसंदेह, द्धिपक्षीय संबंधों को सुधारने की ओर सार्थक कदम बढाया था मगर पाकिस्तान ने अपना वचन नहीं निभाया। सच बात यह है कि पाकिस्तान से ऐसी उम्मीद भी नहीं थी। ऐन वक्त पर अपनी बात से पलट जाना और दगा देना पाकिस्तान की फितरत है। मोदी सरकार ने पाकिस्तान की पांच सदस्यीय जांच टीम को पठानकोट एयरबेस का दौरा करने की अनुमति इस बिला पर दी थी कि पाकिस्तान भी ऐसा ही करेगा। पाकिस्तान के साथ तय हुआ था कि जांच टीम के पठानकोट दौरे के बदले में वह भारत की जांच टीम को पाकिस्तान में जैश -ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना अजहर मसूद अजहर से पूछताछ की अनुमति देगा।  पाकिस्तानी की दगाबाजी फितरत के बावजूद मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बातों पर भरोसा किया और जांच टीम को पठानकोट में वर्जित क्षेत्र भारतीय वायु सेना के एयरबेस में प्रवेश  की अनुमति दी। यह बहुत बडी बात थी। इस टीम में पाकिस्तान की बदनाम मिल्ट्री इंटेलीजेंस एजेंसी आईएसआई का नुमाइंदा भी था। भारत में पाकिस्तान की इस ऐजेंसी के प्रति सिर्फ  नफरत भरी पडी है और अगर जनता का वश  चलता वे आईएसआई के नुमाइंदे को भारत की ओर झांकने तक नहीं देते। भारत में विध्वंसक कार्रवाइयां करने, आतंक फैलाने, बम फोडकर निर्दोष  लोगों की हत्या करने और देश  को अस्थिर करने में पाकिस्तान की आईएसआई की अहम भूमिका रहती है। खुफिया सूचनाओं के अनुसार  आईएसआई भारत में  विध्वंसक कार्रवाइयां कराने और आतंक फैलाने के लिए   अंतरराष्ट्रीय  सीमा के निकट पाकिस्तान आधिपत्य वाले क्षेत्रों में बाकायदा आतंकियों के लिए प्रशिक्षण शिविर लगती  है और उन्हें असलाह और हथियार मुहैया कराती  है। यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा है। दरअसल, ताकतवर भारत पाकिस्तान की सेना और आईएसआई को फूटी आंख भी नहीं सुहाता है। पाकिस्तान की सियासत में सेना का बहुत बडा दखल है और सेना कई बातों के लिए आईएसआई पर आश्रित है। पाकिस्तान के हुक्मरान सेना और आईएसआई की बात टाल ही नहीं सकते। पाकिस्तान में जैश -ए-मोहम्मद,लश्कर  जैसे संगठन मूलतः आईएसआई की ही देन है और इन संगठनों को भारत को अस्थिर करने के लिए ही इस्तेमाल किया जाता है। मुंबई हमला हो या पठानकोट अथवा दीनानगर हमला, इन सभी में आईएसआई का बडा हाथ रहा है। इस स्थिति के मद्देनजर  पाकिस्तान  भारत की जांच टीम को मौलाना मसूद अजहर और हाफिज सईद जैसे आतंकी सरगनाओं के निकट फटकने भी देगा,  इस बात पर विश्वाश  करना ही बेफिजूल की बात है। सेना और आईएसआई पाकिस्तान की सरकार को ऐसा कभी नहीं करने देते और न ही करने देंगे। हाफिज सईद के मामले में भारत पहले ही पाकिस्तान द्वारा छला जा चुका है। बहरहाल, मोदी सरकार और राष्ट्रीय  सुरक्षा सलाहकार जमीनी सच्चाई से बखूबी परिचित थे। अब सवाल है कि इसके बावजूद मोदी सरकार ने पाकिस्तान पर भरोसा क्यों किया? कूटनीति का तकाजा हे कि दुश्मन  की दगाबाजी फितरत को बेनकाब किया जाना चाहिए ताकि वह पूरी दुनिया के सामने एक्जपोज हो सके। अगर मोदी सरकार की जगह संप्रग या कोई और सरकार होती, वह भी यही करती। भारत की जांच टीम को  पाकिस्तान अगर अपने यहां आने की अनुमति देता भी है, तो भी इससे कोई ज्यादा फर्क  नहीं पडता। भारत लाख सबूत दे, पाकिस्तान कभी नहीं मानेगा, भारत पर आतंकी हमलों में पाकिस्तानी आकाओं का हाथ है। पाकिस्तान को एक्सपोज करना ज्यादा अहम है। पाकिस्तान को दुनिया की नजरों में जितना गिराया जाए, भारत के लिए उतना ही बेहतर होगा।