मंगलवार, 22 मार्च 2016

Pakistan Least Interested To Fight Terrorism ?

       
पाकिस्तान के नामचीन इस्लामिक सूफी विद्धान और धर्मगुरु डाक्टर मोहम्मद ताहिर-उल-कादरी के सुझाव पर पाकिस्तान को गंभीरता से विचार करने की जरुरत है। डाक्टर कादरी का सुझाव है कि भारत और पाकिस्तान को आतंक का मिलकर मुकाबला करना चाहिए। डाक्टर कादरी का यह सुझाव भी काबिलेगौर है कि आतंक को देशद्रोह करार दिया जाना चाहिए।  आतंक की भीषण आग में जल रहे पाकिस्तान के धर्मगुरु भी मानते हैं कि आतंक के रहते न तो पाकिस्तान तरक्की कर सकता है, और न ही भारत। आतंक दोनों देशों  में तेज विकास को रोक रहा है। यह स्थिति अगर लंबे समय तक रहती है, दोनों देश  आतंक की आग में बुरी तरह झुलस सकते हैं। डाक्टर कादरी ने ये बातें दिल्ली में विश्व  सूफी मंच के समापन पर कही। पाकिस्तान के धर्मगुरु हों या सियासी नेता, जब भी भारत आते हैं, दोस्ती और अमन-चैन की बातें करते हैं मगर स्वदेश  लौटते ही उन्हें सांप सुंघ जाता है। भारत तो जमाने से यही कह रहा है और इस पर अमल भी करता है पर पाकिस्तान और इसके नेता सिर्फ लफ्फाजी करते हैं। पाकिस्तान के धर्मगुरु और नेता  अगर वाकई ही ऐसा चाहते हैं, तो इस तरह की बातें उन्हें अपने मुल्क में करनी चाहिए और सियासी नेताओं  को समझाना चाहिए। आतंक से मिलकर मुकाबला करने के लिए किसी लिखा-पढी की जरुरत नही है। इसके लिए सिर्फ दृढ इच्छाशक्ति और नेकनीयत की दरकार है पर पाकिस्तान ऐसा करने से रहा। अब तक इस पर वार्ताओं के कई दौर हो चुके हैं पर नतीजा सिफर। सच्चाई यह है कि पाकिस्तान, भारत में अमन-चैन को पचा ही नहीं सकता और अपने सबसे बडे दुश्मन  “ भारत“ को अस्थिर रखना उसकी सामरिक जरुरत है। शक्तिशाली और प्रोन्नत भारत पाकिस्तान के अस्तित्व को सबसे बडा खतरा है। विभाजन के बाद लगभग सात दशकों में दोनों देशों  के अवाम की सोच काफी बदल चुकी है। विभाजन से पहले कंधे-से-कंधा  मिलाकर संयुक्त  भारत में रहने वाले लोग उतरोतर कम होते जा रहे हैं। पाकिस्तान की नई पीढी को भारत के प्रति सिर्फ और सिर्फ नफरत करना सिखाया गया है। दोस्ती और भाईचारे की बयार कबकी लुप्तप्राय हो चुकी है। पाकिस्तान के लोग भारत के प्रति कितनी कटुता रखते हैं, पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान शाहिद अफरीदी का “भारत प्रेम“ संबंधी बयान इस बात का ताजा उदाहरण है। अफरीदी ने भारत की मेहमानवाजी  और लोगों के स्नेह की तारीफ क्या की, उनके खिलाफ लाहौर की अदालत में मुकदमा तक दायर कर दिया गया। विश्व  कप में भाग लेने के लिए टीम के साथ भारत आए पाकिस्तान क्रिकेट कप्तान ने कहा था कि पाक खिलाडियों को स्वदेश (पाकिस्तान) की जगह भारत में कहीं ज्यादा “स्नेह“ मिलता है। अफरीदी के इस बयान से माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम के समधी पूर्व क्रिकेटर जावेद मियांदाद तो अफरीदी के पीछे लठ्ठ लेकर पड गए हैं। पाकिस्तान में इस्लामिक आतंकी दिन में कई बार भारत के खिलाफ जहर उगलते हैं और युद्ध लडने का ऐलान करते हैं। पाकिस्तान, भारत से आतंक से मिलकर लडने की बातें तो करता है मगर अमल में कुछ नहीं करता। चीन के साथ पाकिस्तान आतंक का मिलकर मुकाबला करने को तैयार है और इस आशय का कई बार ऐलान भी कर चुका है। पिछले साल चीन के राश्ट्रपति शी  जिनपिंग की पाकिस्तान की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने संसद में इस बात का जोर-शोर  से ऐलान भी किया था। पाकिस्तान की चीन से बढती दोस्ती भारत के लिए खतरा हो सकती है मगर हर संप्रभु मुल्क को इस बात का पूरा हक है कि वह किससे गहरी दोस्ती रखे, किससे नहीं। पर सच्चाई यह भी है कि पडोसियों के साथ अमन-चैन से रहना सफल कूटनीति का हिस्सा है। भारत को अस्थिर करते-करते पाकिस्तान अब खुद आतंक की आग में बुरी तरह से झुसल रहा है। और अगर अब भी पाकिस्तान आतंक फैलाने से बाज नहीं आया, तो भारत से कहीं ज्यादा उसकी का नुकसान हो सकता है। अब तक का इतिहास इस बात का गवाह है। आतंक ने इस समय पूरे विश्व को  अपनी चपेट में ले रखा है।  आतंक के विश्वव्यापी  खतरे का केवल मिलकर ही मुकाबला किया जा सकता है।