खुफिया एजेंसियों की सूचनाओं को कितना विश्वसनीय माना जाना चाहिए? देश में जब-तब हो रहे बार बार के आतंकी हमलों के संदर्भ में यह प्रश्न सामयिक है और देश इसका जबाव मांग रहा है। खुफिया एंजेसियों की सूचनाओं के आधार पर केन्द्र सरकार ने रविवार को देश में हाई अलर्ट जारी करने के साथ ही महत्वपूर्ण जगहों की सुरक्षा भी बढा दी। खुफिया एजेंसियों के अनुसार समुद्र के रास्ते पाकिस्तान से कुछ आतंकी गुजरात में घुसपैठ कर गए हैं और आतंकी हमले कर सकते हैं। आतंकियों के निशाने पर सोमनाथ मंदिर भी है। खुफिया सूचनाओं के बाद सोमनाथ मंदिर की सुरक्षा बढा दी गई है। एनएसजी की चार टुकडियां अहमदाबाद में तैनात की गईं है और सोमनाथ मंदिर की सुरक्षा को भी एनएसजी के सुपुर्द कर दिया गया है। पुलिस ने गुजरात के अलावा पंजाब में पठानकोट एयरबेस से करीब बारह किलोमीटर की दूरी पर स्थित कटारु चक में गहन तलाशी भी ली। मंगलवार को महा शिवरात्रि मनाई जा रही है। इस पावन अवसर पर मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड का उमडना स्वभाविक है। पठानकोट में शिवरात्रि मेले को रदद कर दिया है। पठानकोट के निकट एक गांव में शनिवार रात को पाकिस्तान फोन कॉल ट्रेस की गई। पंजाब में भारत-पाकिस्तान बार्डर पर लोगों ने पाक वायु सेना का हेलीकॉप्टर मंडराता देखा मगर सीमा सुरक्षा दल ने इस बात को नकार दिया। इन घटनाक्रमों के मद्देनजर देश में हाई अलर्ट जारी किया गया है । मगर सच यह है कि खुफिया एजेसिंयों की सूचनाओं को बहुत ज्यादा विश्वसनीय नहीं माना जा सकता। महाशिवरात्रि पर्व पर देश के धार्मिक स्थलों पर एतिहातन सुरक्षा चाक-चौबंद करना आम बात है और खुफिया एजेंसियों द्वारा अलर्ट जारी करना भी रुटीन है। मगर इस सच्चाई को नकारा भी नहीं जा सकता कि देश में आज तक जितने भी आतंकी हमले हुए हैं, खुफिया एजेंसियों को उनकी भनक तक नहीं लग पाई है। देश के दुश्मन इतने भी नौसिखिए नहीं हैं कि वे सूचना देकर अथवा भारतीय खुफिया एजेंसियों के कान खडे करवाकर अपने षडयंत्र को नेस्तानाबूद कर दें। दुनिया जानती है कि आतंकी हमले बताकर अथवा कडी सुरक्षा के वक्त नहीं किए जाते। महाशिवरात्रि या इस तरह के आयोजनों के दौरान कडी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आतंकी हमले करने की हिमाकत करेंगे, इस पर संदेह होता है। इस बात का ख्याल करते हुए क्या यह माना जाए कि देश की खुफिया एजेंसियों की सूचनाओं में ज्यादा दमखम नहीं होता है। अगर होता तो पठानकोट और दीनानगर जैसे आतंकी हमले टाले जा सकते थे। आतंकी आराम से सीमा पार कर भारत में घुस आते हैं। इधर-उधर मटरगश्ती करते हैं और बगैर किसी बेरोकटोक के किसी सुरक्षित जगह पनाह लेकर हमला कर देते हैं। पठानकोट, दीनानगर और मुंबई के 26/11 हमले समेत हर आतंकी हमले के दौरान अब तक यही होता रहा है। मुंबई हमले के आतंकी भी समुद्र के रास्ते मुंबई पहुंचे और आराम से महानगर में नरसंहार करते रहे। कई साल बाद यही दीनानगर में हुआ और पठानकोट में तो आतंकियों ने हाई सिक्योरिटी वाले एयरबेस में घुसकर सुरक्षा व्यवस्था की पोल ही खोल दी। पूरी दुनिया में इस सच्चाई को माना जाता है कि प्रशिक्षित -से-प्रशिक्षित खुफिया एजेंसी भी भरोसेमंद सूचना नही दे पाती हैं। अमेरिका की कुख्यात खुफिया एजेंसी सीआईए और तत्कालीन सोवियत यूनियन की केजीबी भी पुख्ता जानकारियां एकत्रित नही कर पाईं। अथाह संसाधनों के बावजूद सीआईए न तो जर्मन की बर्लिन वॉल की खुफिया जानकारी हासिल कर पाई थी और न ही उसे सोवियत संघ के आसन्न पतन की भनक तक लग पाई। इराक में पूरी तरह से सक्रिय रहने के बावजूद सीआईए को कुवैत पर हमले की भी भनक तक नहीं लग पाई। भारतीय खुफिया एजेंसियों सीआईए या अमेरिकी खुफिया तंत्र से ज्यादा साधन सपन्न नहीं हैं । तथापि भारत जिस तरह चौतरफा ”शत्रु " पडोसियों से घिरा हुआ है, उसका ख्याल करते हुए हमें अपने खुफिया तंत्र को अत्याधुनिक और भरोसेमंद बनाने की जरुरत है।
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