क्रिकेट पर ”गंदी” राजनीति
सियासी लोग अपने निहित स्वार्थों के लिए किस हद तक जा सकते हैं, विश्व विख्यात धौलाधार पर्वत श्रृखंलाओं के मध्य स्थित धर्मशाला में भारत और पाकिस्तान के बीच प्रस्तावित वर्ल्ड कप ट्वेंटी-20 को लेकर जारी “गंदी राजनीति“ इस बात का उदाहरण है। धर्मशाला ही नहीं पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए यह गौरव की बात है कि भारत का पहला ट्वेंटी-20 पाकिस्तान के साथ हो रहा है और धर्मशाला स्टेडियम को इसके लिए चुना गया है। क्रिकेट हो या हॉकी, खेल प्रेमियों के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच मैच हमेशा “ बेहद रोमांचक“ रहा है। इस मैच को हिमाचल प्रदेश में लाने के लिए हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं बीसीसीआई सचिव अनुराग ठाकुर की अग्रणी भूमिका रही है। हिमाचल प्रदेश के लिए यह भी गौरव की बात है कि अनुराग ठाकुर बीसीसीआई के सचिव भी हैं। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्हें कडी मेहनत करनी पडी है। इसी वजह बीसीसीआई में हिमाचल प्रदेश की पूछ भी होने लग पडी है। पहली बार हिमाचल प्रदेश के खिलाडी ऋषि धवन को आस्ट्रेलिया के खिलाफ एक दिवसीय मैच के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया। धर्मशाला में अंतरराष्ट्रीय स्तर का क्रिकेट स्टेडियम बनवाना और यहां अंतरराष्ट्रीय मैच आयोजित करवाने में भी अनुराग ठाकुर का बडा हाथ है। हिमाचल में सत्तारूढ कांग्रेस के नेताओं को इन सब बातों से कोई सरोकार नहीं है। और दुर्भाग्यवश सरकार और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को यही बातें सबसे ज्यादा खटक रही हैं। अनुराग ठाकुर हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल के पुत्र और पूर्व मंत्री गुलाब सिंह के दामाद है। कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व इस सच्चाई को पचा नही पा रहा है। धर्मशाला स्टेडियम को भी धूमल सरकार के समय बनवाया गया था। क्रिकेट जगत में इस स्टेडियम को बेहतरीन स्तर का माना जाता है और इसकी हिमाच्छादित पृश्ठ्भूमि में चौके-छक्के मैच को और भी रोमांचक बना देते हैं। भारतीय खिलाडियों को सर्द जलवायु में अभ्यस्त करवाने के लिए इस स्टेडियम की अहम भूमिका है। अभी तक देश में सर्द जलवाय वाली जगह में अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम नहीं था। धर्मशाला ने इस कमी को भी पूरा कर दिया है । मगर हिमाचल में वीरभद्र सिंह सरकार इस स्टेडियम के पीछे भी हाथ धोकर पडी है। धूमल सरकार ने इस स्टेडियम को जमीन क्यों दी और कितने पेड काटे गए, इन सब बातों को लेकर अनुराग ठाकुुर और हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ के खिलाफ विजीलेंस जांच जारी है। अनुराग ठाकुर और अन्य पदाधिकारियों को गिरफतारी से बचने के लिए कोर्ट की शरण में जाना पडा है। सरकार की कार्रवाई से ऐसा लग रहा है जैसे अनुराग ने कई बहुत बड़ा गुनाह किया हो जबकि सच्चाई यहाँ है की जो काम कांग्रेसी सालों तक नहीं कर पाए , अनुराग ने वह चंद सालों में कर दिखाया । इतना ही नहीं, वीरभद्र सिंह सरकार कानून में बदलाव करके अनुराग ठाकुर को हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ से अपदस्थ करने पर आमादा है। इस आशय का बिल पारित हो चुका है और राज्यपाल की स्वीकृति के लिए लंबे समय से राजभवन की धूल चाट रहा है। निसंदेह, यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि क्रिकेट को “ सियासी“ रस्साकशी और “बदले की राजनीति“ का शिकार बनना पडे। पाकिस्तान भारत में न खेलने के पहले ही बहाने तलाश रहा है और खिलाडियों की कडी सुरक्षा की मांग कर रहा है। राज्य के सियासी नेताओं की “कैट फाइट“ में पाकिस्तान को अच्छा बहाना मिल गया है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने इस मैच के लिए पठानकोट आतंकी हमले का हवाला देकर सुरक्षा मुहैया कराने से मना कर दिया है। जाहिर है अगर सरकार सुरक्षा नहीं देगी, मैच होगा ही नहीं। कांग्रेस पार्टी भी यही चाहती है कि मैच धर्मशाला में न हो। और अब दल-बदल के लिए विख्यात मेजर विजय सिंह मनकोटिया भी मैदान में कूद पडे हैं। मनकोटिया हिमाचल एक्स सर्विसमैन लीग के अध्यक्ष हैं और उनका कथन है कि मैच हिमाचल के सैनिकों की प्रतिष्ठा से जुडा है। पठानकोट हमले में हिमाचल के दो सैनिक शहीद हो गए थे। मनकोटिया खुद पूर्व सैनिक हैं और वे जानते हैं कि शहादत माना सैनिकों के लिए गर्व की बात है। मनकोटिया और अन्य कांग्रेसी नेता यह भी जानते हैं कि क्रिकेट खिलाडियों का आतंक से दूर-दूर का भी वास्ता नहीं होता है। फिर भी क्रकेट मैच को लेकर जमकर राजनीति हो रही है। भारत इस बार वर्ल्ड कप टी-20 की मेजबानी कर रहा है। यह किसी व्यक्ति विशेष का नही, बल्कि पूरे देश का आयोजन है। फिर यह गंदी राजनीति क्यों?
सियासी लोग अपने निहित स्वार्थों के लिए किस हद तक जा सकते हैं, विश्व विख्यात धौलाधार पर्वत श्रृखंलाओं के मध्य स्थित धर्मशाला में भारत और पाकिस्तान के बीच प्रस्तावित वर्ल्ड कप ट्वेंटी-20 को लेकर जारी “गंदी राजनीति“ इस बात का उदाहरण है। धर्मशाला ही नहीं पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए यह गौरव की बात है कि भारत का पहला ट्वेंटी-20 पाकिस्तान के साथ हो रहा है और धर्मशाला स्टेडियम को इसके लिए चुना गया है। क्रिकेट हो या हॉकी, खेल प्रेमियों के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच मैच हमेशा “ बेहद रोमांचक“ रहा है। इस मैच को हिमाचल प्रदेश में लाने के लिए हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं बीसीसीआई सचिव अनुराग ठाकुर की अग्रणी भूमिका रही है। हिमाचल प्रदेश के लिए यह भी गौरव की बात है कि अनुराग ठाकुर बीसीसीआई के सचिव भी हैं। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्हें कडी मेहनत करनी पडी है। इसी वजह बीसीसीआई में हिमाचल प्रदेश की पूछ भी होने लग पडी है। पहली बार हिमाचल प्रदेश के खिलाडी ऋषि धवन को आस्ट्रेलिया के खिलाफ एक दिवसीय मैच के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया। धर्मशाला में अंतरराष्ट्रीय स्तर का क्रिकेट स्टेडियम बनवाना और यहां अंतरराष्ट्रीय मैच आयोजित करवाने में भी अनुराग ठाकुर का बडा हाथ है। हिमाचल में सत्तारूढ कांग्रेस के नेताओं को इन सब बातों से कोई सरोकार नहीं है। और दुर्भाग्यवश सरकार और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को यही बातें सबसे ज्यादा खटक रही हैं। अनुराग ठाकुर हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल के पुत्र और पूर्व मंत्री गुलाब सिंह के दामाद है। कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व इस सच्चाई को पचा नही पा रहा है। धर्मशाला स्टेडियम को भी धूमल सरकार के समय बनवाया गया था। क्रिकेट जगत में इस स्टेडियम को बेहतरीन स्तर का माना जाता है और इसकी हिमाच्छादित पृश्ठ्भूमि में चौके-छक्के मैच को और भी रोमांचक बना देते हैं। भारतीय खिलाडियों को सर्द जलवायु में अभ्यस्त करवाने के लिए इस स्टेडियम की अहम भूमिका है। अभी तक देश में सर्द जलवाय वाली जगह में अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम नहीं था। धर्मशाला ने इस कमी को भी पूरा कर दिया है । मगर हिमाचल में वीरभद्र सिंह सरकार इस स्टेडियम के पीछे भी हाथ धोकर पडी है। धूमल सरकार ने इस स्टेडियम को जमीन क्यों दी और कितने पेड काटे गए, इन सब बातों को लेकर अनुराग ठाकुुर और हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ के खिलाफ विजीलेंस जांच जारी है। अनुराग ठाकुर और अन्य पदाधिकारियों को गिरफतारी से बचने के लिए कोर्ट की शरण में जाना पडा है। सरकार की कार्रवाई से ऐसा लग रहा है जैसे अनुराग ने कई बहुत बड़ा गुनाह किया हो जबकि सच्चाई यहाँ है की जो काम कांग्रेसी सालों तक नहीं कर पाए , अनुराग ने वह चंद सालों में कर दिखाया । इतना ही नहीं, वीरभद्र सिंह सरकार कानून में बदलाव करके अनुराग ठाकुर को हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ से अपदस्थ करने पर आमादा है। इस आशय का बिल पारित हो चुका है और राज्यपाल की स्वीकृति के लिए लंबे समय से राजभवन की धूल चाट रहा है। निसंदेह, यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि क्रिकेट को “ सियासी“ रस्साकशी और “बदले की राजनीति“ का शिकार बनना पडे। पाकिस्तान भारत में न खेलने के पहले ही बहाने तलाश रहा है और खिलाडियों की कडी सुरक्षा की मांग कर रहा है। राज्य के सियासी नेताओं की “कैट फाइट“ में पाकिस्तान को अच्छा बहाना मिल गया है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने इस मैच के लिए पठानकोट आतंकी हमले का हवाला देकर सुरक्षा मुहैया कराने से मना कर दिया है। जाहिर है अगर सरकार सुरक्षा नहीं देगी, मैच होगा ही नहीं। कांग्रेस पार्टी भी यही चाहती है कि मैच धर्मशाला में न हो। और अब दल-बदल के लिए विख्यात मेजर विजय सिंह मनकोटिया भी मैदान में कूद पडे हैं। मनकोटिया हिमाचल एक्स सर्विसमैन लीग के अध्यक्ष हैं और उनका कथन है कि मैच हिमाचल के सैनिकों की प्रतिष्ठा से जुडा है। पठानकोट हमले में हिमाचल के दो सैनिक शहीद हो गए थे। मनकोटिया खुद पूर्व सैनिक हैं और वे जानते हैं कि शहादत माना सैनिकों के लिए गर्व की बात है। मनकोटिया और अन्य कांग्रेसी नेता यह भी जानते हैं कि क्रिकेट खिलाडियों का आतंक से दूर-दूर का भी वास्ता नहीं होता है। फिर भी क्रकेट मैच को लेकर जमकर राजनीति हो रही है। भारत इस बार वर्ल्ड कप टी-20 की मेजबानी कर रहा है। यह किसी व्यक्ति विशेष का नही, बल्कि पूरे देश का आयोजन है। फिर यह गंदी राजनीति क्यों?






