गुरुवार, 10 मार्च 2016

श्री श्री क्या पर्यावरण प्रेमी नहीं ?

दिल्ली में यमुना किनारे  शुक्रवार से  शुरु होने वाले श्री श्री रविशंकर के तीन-दिवसीय “वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल“ पर अनिश्चितता  के बादल वीरवार को छंट  गए । नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने  कुछ शर्तों  के साथ  श्री श्री रविशंकर की  आर्ट ऑफ लीविंग को  यमुना किनारे आयोजन को हरी झंडी दे दी।  पर्यावरण  नुकसान के लिए पांच करोड़ का जुर्माना किया गया है। श्री श्री रवि  शंकर पर आरोप है कि उनके ताजा आयोजन ने दिल्ली की यमुना नदी के नाजुक पर्यावरण को नष्ट  कर डाला है। लगभग 150 देशों  के 35 लाख से अधिक देसी-विदेशी  मेहमानों के लिए एक हजार एकड अथवा चार सौ हेक्टेयर क्षेत्र में विशाल पंडाल स्थापित किए गए हैं। सात एकड क्षेत्र में तो 35,000 नृतकों और संगीतकारों के लिए विशेष  स्टेज बनाया गया है। इसे विश्व  का सबसे बडा परर्फोमिंग स्टेज बताया जा रहा है। आयोजन के दौरान पूरे तीन दिन आठ से दस हजार कलाकर हर समय नृत्य और संगीत कार्यक्रम पेश  करते रहेंगें। 650  शौचालय बनाए गए हैं और धूल-मिटटी हटाने के लिए अलग से डर्ट  ट्रेक्स लगाए गए हैं। रवि  शंकर के  योगा के मुरीद प्रधानमंत्री  शुक्रवार को इस “सांस्कृतिक फेस्टिवल“ का उदघाटन करने वाले हैं मगर सुरक्षा एजेसियों ने अभी तक प्रधानमंत्री की उपस्थिति को हरी झंडी नहीं दिखाई है। राष्ट्र्पति  प्रणब मुखर्जी इस आयोजन का निमंत्रण पहले ही अस्वीकार कर चुके हैं । पर्यावरण प्रेमियों ने इतने  विशाल  आयोजन से यमुना के नाजुक पर्यावरण को होने वाले नुकसान के प्रति गहरी चिंता व्यक्त की है। इस आयोजन से यमुना के तटीय क्षत्रों की रही-सही वनस्पतियां भी नष्ट  हो गई हैं और पानी के सतत प्रवाह के अवरुद्ध होने का खतरा है। इन खतरों से चिंतित पर्यावरण प्रमियों ने इस आयोजन को रद्द कराने के लिए  नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर कर रखी है। ट्रिब्यूनल ने इतने विशाल  आयोजन को बगैर पुलिस और पर्यावरण कलीयरेंस के अनुमति दिए जाने पर हैरानी  व्यक्त की  है। ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा गठित विशेषज्ञों की समिति ने इस आयोजन से 100 से 120 करोड रु के नुकसान का आकलन किया है और इस नुकसान की भरपाई श्री श्री रवि  शं कर से करवाने की सिफारिष की है। भारत में ही नहीं, दुनिया भर में श्री श्री रवि  शंकर के ”आर्ट ऑफ लीविंग” को खासी लोकप्रियता हासिल है। 156 देशों  में सक्रिय “आर्ट  ऑफ लीविंग“ दुनिया की सबसे बडी एनजीओ है। संयुक्त राष्ट संघ  इकानॉमिक एंड सोशल काउंसिल ने “आर्ट ऑफ लीविंग फाउडेशन“ को विशेष  दूतावास (कांसुलेट ) का दर्जा दे रखा है। यूरोप में श्री श्री रवि  शंकर की “आर्ट ऑफ लीविंग“ “एसोसिएशन ऑफ इनर ग्रोथ“ के नाम से लोकप्रिय  है। इतनी विख्यात संस्था बगैर अधिकृत अनुमति के नाजुक पर्यावरण वाली यमुना के बाढ वाली जगह पर निर्माण करे, इस पर सहज में विश्वास  नहीं होता है। “आर्ट ऑफ लीविंग“ ने भी  स्पष्टीकरण  दिया है कि “वर्ल्ड  कल्चर फेस्टिवल“ के दिल्ली आयोजन स्थल के लिए हर तरह की अनुमति दिसंबर माह में ही ले ली गई थी। सवाल यह है कि नाजुक बाढ-प्रोन जगह पर इस विशाल आयोजन की अनुमति क्यों दी गई? अब पर्यावरण मंत्रालय को जबाव देते नहीं बन पा रहा है।  ट्रिब्यूनल ने पर्यावरण मंत्रालय को इस मामले में जबाव नहीं देने के लिए फटकार लगाई है। पर्यावरण प्रेमियों को इस आयोजन का पता चलते ही उन्होंने फौरन ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका डाल दी। भारत में अभी भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरुकता नहीं है। श्री श्री रविषंकर का ताजा आयोजन भी यही दर्षाता है। यह बात बच्चा भी जानता है कि जिस जगह 35 लाख लोग तीन दिन के लिए एकत्र होंगे, वहां की वनस्पतियां, जल स्त्रोत और सीवरेज का कबाडा तो होगा ही? आयोजन स्थल के निकट पक्षी विहार भी है और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि श्री श्री के आयोजन से इस विहार को भी गंभीर खतरा है। दिल्ली पुलिस ने चेताया है कि मौजूदा माहौल में इस आयोजन के दौरान भी अप्रिय घटना की आशंका है और इससे अफरा-तफरी फैल सकती है। हाल ही में लगभग एक दर्जन आतंकी देश  में खून-खराबा फैलाने के लिए भारत  में घुस आए हैं। इस  मामले से विपक्ष को मोदी सरकार को घेरने का एक और मौका मिल गया है। इसकी संसद में गूंज भी सुनाई दी। श्री श्री रवि  शं कर की आर्ट ऑफ लीविंग का जनमानस के जीवन को सुखद बनाने में खासा योगदान है मगर पर्यावरण नष्ट  करने की किसी को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए ।