प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “स्वच्छ भारत मिशन“ का असर दिखाई देने लग पडा हैे और इसके सकारात्मक नतीजे सामने आ रहे हैं। चंडीगढ समेत 34 शहर इस बात के साक्षी हैं। सोमवार को सरकार द्वारा जारी “स्वच्छ सर्वेक्षण-2016“ के अनुसार चंडीगढ देश का दूसरा सबसे स्वच्छतम शहर है। पिछली बार की तरह कर्नाटक राज्य का मैसूर इस बार भी पहले पायेदान पर है। 2014 में चंडीगढ दसवें पायदान पर था। यह प्रधानमंत्री के “स्वच्छ भारत मिशन“ का ही परिणाम है कि सिटी व्यूटीफुल दसवें स्थान से महानगर ग्रेटर मुंबई को बेदखल कर दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। इस उपलब्धि ने चंडीगढ को स्मार्ट सिटी की पहली सूची में शामिल नही किए जाने के जख्म पर मलहम-पट्टी की है। प्रधानमंत्री के सपनों का शहर और उनका संसदीय हलका वाराणसी दस सबसे गंदे शहरों मेंसे है। प्रधानमंत्री को इस बात का मलाल हो सकता है, मगर उन्हें इस बात का सुकून होना चाहिए कि लोगो में स्वच्छता के प्रति जागरुकता बढी है। इसी कारण उत्तर भारत के 17 शहरों समेत 34 शहरों की रैंकिंग में सुधार आया है। उतर प्रदेश की राजधानी लखनऊ 51 पायेदान से 25 पर, राजस्थान की राजधानी जयपुर 41 से 29 पर आ गया है। इलाहाबाद ने कमाल कर दिखाया है। गंगा-यमुना की संगम स्थली इलाहाबाद इस बार 22वें पायेदान पर है जबकि 2014 में यह शहर 67वें पायेदान पर था। हरियाणा का मिलेनियम शहर गुडगांव 65वें पायेदान से 36, फरीदाबाद 69 से 51, पंजाब में अमृतसर 66 से 49वें पायेदान पर आ गया है। यह बात कितनी दुखदायी है कि अमृतसर जैसी पावन नगरी अभी भी स्वच्छता से काफी दूर है और यही हाल मिलेनियन सिटी गुडगांव का है। अगर हम अपने धार्मिक नगरों को भी स्वच्छ नहीं रख पाते हैं तो ऐसी आस्था किस काम की। ताजा सर्वेक्षण में वाराणसी के अलावा अमृतसर, इलाहाबाद जैसे धार्मिक स्थल अभी भी निचले पायदान पर हैं हालांकि इलाहाबाद ने स्वच्छता में बेहतर काम किया है। 2014 की तुलना में इस बार के सर्वेक्षण में 22 राजधानियों समेत दस लाख से ज्यादा की आबादी वाले 73 शहर ही शामिल किए गए थे। इस कारण उत्तर भारत के शिमला, धर्मशाला और देहरादून जैसे लोकप्रिय शहर शामिल ही नहीं किए गए थे। 2014 में एक लाख और इससे ज्यादा आबादी वाले 476 शहरों को सर्वेक्षण में शामिल किया गया था। बहरहाल, मोदी सरकार के “स्वच्छ भारत मिशन“ और “स्मार्ट सिटी“ योजनाओं ने राज्यों और स्थानीय निकाओं (लोकल बॉडीज) को, कमत्तर ही सही, मगर स्मार्ट बना दिया है। कहते हैं प्रतिस्पर्धा प्रतिभा और स्कील को निखारती है। स्मार्ट सिटी बनना भी प्रतिस्पर्धक चुनौती है और किसी भी शहर को “स्मार्ट“ बनने के लिए पहले उसे साफ-सुथरा रखना और लोगों में स्वच्छता की आदत डालना अपरिहार्य है। स्वच्छता शहर, गली अथवा घर-परिवार को स्वच्छ रखने तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए। स्वच्छता से ही स्वच्छ रहन-सहन और स्वच्छ विचार उपजते हैं। वेदों और शास्त्रों में साफ-साफ अक्षरों में कहा गया है कि स्वच्छ और स्वस्थ मानसिकता ही देश और समाज को स्वस्थ और समृद्ध बना सकती है। असहिष्णुता के मौजूदा माहौल में स्वच्छ एवं स्वस्थ मानसिकता की सख्त दरकार है। मोदी सरकार को इस बात का श्रेय जाता है कि दो साल से भी कम समय में देश को स्वच्छ रखने और स्मार्ट बनाने की दिशा में सकारात्मक पहल हुई है। “स्मार्ट सिटी“ चयन के लिए निधारित मानदंड पर देष का स्वच्छतम शहर चंडीगढ पहली सूची में क्यों शामिल नहीं हो पाया, इस पर जरुर हैरानी होती है। चंडीगढ पहली सूची में शामिल कई शहरों से ज्यादा “स्मार्ट“ है और इस बात की ताकीद प्रधानमंत्री खुद कर चुहे है। इस बार गणतंत्र दिवस के विदेशी मेहनान फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांकोस निकोलस ओलांदे की हाल ही की चंडीगढ यात्रा के दौरान मोदी ने चंडीगढ को देश का स्मार्ट शहर बताया था। सिटी व्यूटीफुल का स्मार्ट सिटी की पहली सूची में शामिल नहीं किए जाने से चयन प्रकिया की निष्पक्षता पर संदेह उठता है। अगर ऐसा है तो यह योजना शुरु होने से पहले ही दम तोड देगी।
बुधवार, 17 फ़रवरी 2016
Why Cleanest Chandigarh Hasn't Been Included in Smart City First List
Posted on 9:40 am by mnfaindia.blogspot.com/






