उतेजित माहौल और बजट सत्र
देश में व्याप्त मौजूदा उतेजित माहौल ने 23 फरवरी से सत्र शुरु हो रहे संसद के बजट सत्र को ग्रहण लगा दिया है। विपक्ष के तीखे तेवरों से साफ लग रहा है कि संसद की कार्यवाही इस बार भी बाधित की जा सकती है। 29 फरवरी को आम बजट पेश किया जाएगा और उससे पहले 25 फरवरी को रेल बजट आएगा। जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में संसद पर हमले के अपराधी अफजल गुरु को शहीद बताए जाने और कथित देश -विरोधी नारे लगाए जाने से राजनीतिक माहौल खासा गर्माया हुआ है। देशद्रोह के आरोप में जेएनयू के छात्र नेता कन्हैया कुमार की गिरफ्तार से कांग्रेस और वामपंथी दल उबले हुए हैं। विपक्ष का आरोप है कि मोदी सरकार ”अभिव्यक्ति की स्वत्रंतता “ को देशद्रोह का मुद्दा बनाकर विपक्ष की आवाज दबाने पर आमादा है। देशद्रोह के इस मामले पर माहौल इस कद्र उतेजित है कि पिछले तीन दिन से दिल्ली में अदालत परिसर में भी हिंसक घटनाएं हो रही हैं। सोमवार को भाजपा के एक विधायक और उनके समर्थकों ने अदालत परिसर में वामपंथी समर्थक छात्र और पत्रकारों की पिटाई तक कर डाली। मंगलवार को भी ऐसा कुछ घटा और बुधवार को वकीलों ने दिल्ली की अदालत में कन्हैया लाल की पिटाई की कोशिश की । वे वही लोग थे जिन्होंने सोमवार को भाजपा विधायक के साथ पत्रकारों की पिटाई की थी। पटियाला हाउस कोर्ट परिसर में एक पत्रकार को भी पीटा गया। इससे पहले वकीलों ने जेएनयू मामले से संबंधित सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय में ”वंदे मातरम” के नारे लगाए और कार्यवाही बाधित की। पूरे देश में छात्र कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी के खिलाफ प्रर्दशन कर रहे हैं। हावर्ड, ऑक्सफोर्ड, कैम्बरिज, येल, लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स जैसी नामी विदेशी यूनिवर्सिटीज भी कन्हैयालाल की गिरफ्तारी के खिलाफ छात्रों के आंदोलन के समर्थन में खुलकर सामने आ गई हैं। अब यह मामला जेएनयू अथवा कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी तक ही सीमित नहीं रह गया है। भाजपा जेएनयू मामले पर “राष्ट्र की अखंडता“ के मुद्दे को लेकर देश -व्यापी आंदोलन चलाने की योजना बना रही है। इस मामले को लेकर जमकर सियासत हो रही है। भाजपा और उसके समर्थक जेएनयू में अफजल गुरु से संबंधित आयोजन को देशद्रोह बता रहे हैं तो विपक्ष छात्र नेता कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी को “ मोदी सरकार की तानशाही“ और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बता रहे हैं। मंगलवार को प्रधानमंत्री की संसद में विपक्ष के नेताओं से मुलाकात के दौरान भी जेएनयू का मामला छाया रहा हालांकि बैठक संसद के बजट सत्र पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी। इन सब बातों से साफ हो रहा है कि संसद के बजट सत्र में भी मोदी सरकार को शासकीय कामकाज (बिजनेस) निपटाने में बाधाएं खडी की जा सकती हैं। बजट सत्र में अहम विधयेक गुडस एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) को पारित कराना सरकार के समक्ष सबसे बडी चुनौती है। अप्रैल, 2016 से पूरे देश में एकीकृत जीएसटी को लागू होना है मगर अभी तक यह बिल संसद में पारित नहीं हो पाया है। लोकसभा इसे पारित कर चुकी मगर राज्यसभा में यह बिल अभी भी अटका हुआ है। राज्यसभा में सरकार के पास स्पष्ट बहुमत तक नहीं है जबकि इस संवैधानिक संशोधन बिल को पास करवाने के लिए सरकार को दो -तिहाई बहुमत की दरकार है। राज्यसभा में यह बिल विपक्ष के समर्थन के बगैर पारित नहीं हो सकता है। सरकार को उम्मीद है कि मौजूदा बजट सत्र में यह बिल विपक्ष के सहयोग से पारित हो जाएगा। सरकार ने इस बिल पर काग्रेस के कुछ संशोधन मान भी लिए हैं मगर ताजा हालात बता रहे हैं कि विपक्ष सरकार को आसानी से अपना समर्थन नहीं देगी। कांग्रेस पहले ही कह चुकी है कि जीएसटी से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण और भी कई बिल हैं जिनका पारित होना अपरिहार्य है। जेेएनयू मामले ने स्थिति और ज्यादा बिगाड दी है। जीएसटी के लागू होने पर पूरे देश में एक समान कर व्यवस्था लागू होगी। विशेषज्ञों का आकलन है कि जीएसटी के लागू होने से देश का सकल उत्पादन 2 फीसदी तक बढ सकता है। आर्थिक सुधारों को तेजी से लागू करने के लिए जीएसटी बिल का पारित होना निहायत जरुरी है।






