जीका संक्रमण का खतरा
एडस, एबोला, स्वाइन एवं बर्ड फ्लू जैसी घातक रोगों से जूझने के बाद अब जीका वायरस ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। बेहतरीन स्वास्थय सेवाओं और उपचार के लिए विख्यात अमेरिका के टेक्सास में मंगलवार को पहला जीका संक्रमण का मामला सामने आया। दल्लास काउंटी के एक अधिकारी के अनुसार महिला से यौन संबंध बनाने पर पीडित व्यक्ति जीका से संक्रमणित हुआ है। अभी तक यह माना जा रहा था कि जीका केवल मच्छर (डेंगू फैलाने वाला एडस एजिप्ती) के काटने से ही फैलता है। अमेरिका में यौन संबंध (सेक्सुअली ट्रांसमेटिड) से जीका संक्रमण का यह पहला मामला है। जीका मूलतः जन्म से मस्तिश्क संबंधी विकार ( न्यूरोलॉजिकल बर्थ डिसआर्डर) रोग है। जीका से संक्रमणित ( मिक्रोसिफेली) बच्चे का जन्म से ही सर का आकार सामान्य से छोटा होता है और उसके ब्रेन का विकास भी अपेक्षाकृत कम होता है। जीका जन्म से बच्चे की विकलांग बना देता है । यौन संबंधों के माध्यम से व्यस्कों मे जीका के फैलने से वैज्ञानियों एवं चिकित्सकों के समक्ष एक नया पहलू सामने आया है। जीका का मच्छरो के अलावा यौन संबंधों के माध्यम से फैलना चिंता का विषय है। एडस भी इसी तरह से फैला था। वैसे अब तक के मामलों से यह भी पता चलता है कि जीका वायरस मच्छर के काटने से संक्रमणित पुरुश अथवा महिला से यौन संबंध बनाने के बाद ही फैलता है। वेन्जुअला की रहने वाली एक महिला से यौन संबंध बनाने पर टेक्सास का व्यक्ति जीका से संक्रमणित हुआ। महिला जीका से पीडित थी। दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुअला पहले से ही जीका से पीडित है। 2015 में ब्राजील में जीका ने अपना कहर ढाया था। पहली बार ब्राजील में जीका वायरस से नवजात शिशुओं के संक्रमणित पाए जाने पर वहां दहशत फैल गई। सरकार ने जीका वायरस के प्रकोप से बचाने के लिए 2 लाख सुरक्षा कर्मियों को घर-घर भेजकर लोगों को सजग किया। चार लाख गर्भवती महिलाओं को जीका फैलाने वाले मच्छरों से बचाने के लिए मच्छर-मार दवाएं (मोस्किवटो रेपेलेंट) बांटी गई। तब ब्राजील से जीका का वायरस आस्ट्रेलिया पहुंच गया लेकिन सरकार द्वारा तुरंत एतिहातन उपाय किए जाने से यह उत्तरी कवींसलैंड तक ही सीमित रहा। पिछले साल जीका के इटली में चार, ब्रिटेन में तीन और स्पेन में दो मामले पाए गए। अब तक जीका लगभग तीस देशों को अपनी चपेट में ले चुका है। मंगलवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने जीका पर चेताया कि महाअमेरिकी को चपेट में लेने के बाद यह वायरस अफ्रीका और एशिया में भी फैल सकता है। डब्ल्यूएचओ को आशंका है कि महाअमेरिका (उत्तरी और दक्षिण) में जीका 40 लाख लोगों को सक्रमणित कर सकता है। गरीब और विकासशील देशों में जीका वायरस के प्रकोप का अधिक खतरा है। गरीब देशों में मच्छरों का प्रकोप कहीं ज्यादा रहता है और एबोला की तरह अफ्रीका इसकी चपेट में आ सकता है। मार्च 2014 से एबोला ने पश्चिम अफ्रीका को बुरी तरह से जकड रखा है। इस जनवरी की 12 तारीख को सिएरा लियोन में दो महिलाओं की एबोला से मौत हो गई थी। अफ्रीका में लोगों के एबोला से मारे जाने का सिलसिला रुके नहीं रुक रहा है जबकि (डब्ल्यूएचओ) स्थानीय सरकार के साथ हर संभव एतिहातन उपाय कर रहा है। बहरहाल, भारत अभी जीका के प्रकोप से बचा हुआ है और सुखद समाचार यह है कि हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक इंटरनेषनल के वैज्ञानियों ने जीका वायरस का तोड निकाल लिया है। इस संस्था के पास जीका वायरस का एक नहीं, बल्कि दो वेक्सिन है और कंपनी ने इनका पेंटेट भी कर लिया है। लेकिन अभी जीका के वेक्सिन का पूरी तरह से ट्रायल होना बाकी है और इसमें काफी समय लग सकता है। कंपनी का दावा है कि अगर सरकार अनुमति दे तो वह चार माह में इस वेक्सिन की दस लाख खुराक तैयार कर सकती है। कंपनी के इस प्रयास की सराहना की जानी चाहिए। अमूमन, निजी क्षेत्र ऐसे वेक्सिन तैयार करने में आगे नहीं आता जिनमें मोटे लाभ की ज्यादा गुजाइंश न हो। यह उम्मीद ही पर्याप्त है कि देश के पास जीका का तोड है।
एडस, एबोला, स्वाइन एवं बर्ड फ्लू जैसी घातक रोगों से जूझने के बाद अब जीका वायरस ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। बेहतरीन स्वास्थय सेवाओं और उपचार के लिए विख्यात अमेरिका के टेक्सास में मंगलवार को पहला जीका संक्रमण का मामला सामने आया। दल्लास काउंटी के एक अधिकारी के अनुसार महिला से यौन संबंध बनाने पर पीडित व्यक्ति जीका से संक्रमणित हुआ है। अभी तक यह माना जा रहा था कि जीका केवल मच्छर (डेंगू फैलाने वाला एडस एजिप्ती) के काटने से ही फैलता है। अमेरिका में यौन संबंध (सेक्सुअली ट्रांसमेटिड) से जीका संक्रमण का यह पहला मामला है। जीका मूलतः जन्म से मस्तिश्क संबंधी विकार ( न्यूरोलॉजिकल बर्थ डिसआर्डर) रोग है। जीका से संक्रमणित ( मिक्रोसिफेली) बच्चे का जन्म से ही सर का आकार सामान्य से छोटा होता है और उसके ब्रेन का विकास भी अपेक्षाकृत कम होता है। जीका जन्म से बच्चे की विकलांग बना देता है । यौन संबंधों के माध्यम से व्यस्कों मे जीका के फैलने से वैज्ञानियों एवं चिकित्सकों के समक्ष एक नया पहलू सामने आया है। जीका का मच्छरो के अलावा यौन संबंधों के माध्यम से फैलना चिंता का विषय है। एडस भी इसी तरह से फैला था। वैसे अब तक के मामलों से यह भी पता चलता है कि जीका वायरस मच्छर के काटने से संक्रमणित पुरुश अथवा महिला से यौन संबंध बनाने के बाद ही फैलता है। वेन्जुअला की रहने वाली एक महिला से यौन संबंध बनाने पर टेक्सास का व्यक्ति जीका से संक्रमणित हुआ। महिला जीका से पीडित थी। दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुअला पहले से ही जीका से पीडित है। 2015 में ब्राजील में जीका ने अपना कहर ढाया था। पहली बार ब्राजील में जीका वायरस से नवजात शिशुओं के संक्रमणित पाए जाने पर वहां दहशत फैल गई। सरकार ने जीका वायरस के प्रकोप से बचाने के लिए 2 लाख सुरक्षा कर्मियों को घर-घर भेजकर लोगों को सजग किया। चार लाख गर्भवती महिलाओं को जीका फैलाने वाले मच्छरों से बचाने के लिए मच्छर-मार दवाएं (मोस्किवटो रेपेलेंट) बांटी गई। तब ब्राजील से जीका का वायरस आस्ट्रेलिया पहुंच गया लेकिन सरकार द्वारा तुरंत एतिहातन उपाय किए जाने से यह उत्तरी कवींसलैंड तक ही सीमित रहा। पिछले साल जीका के इटली में चार, ब्रिटेन में तीन और स्पेन में दो मामले पाए गए। अब तक जीका लगभग तीस देशों को अपनी चपेट में ले चुका है। मंगलवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने जीका पर चेताया कि महाअमेरिकी को चपेट में लेने के बाद यह वायरस अफ्रीका और एशिया में भी फैल सकता है। डब्ल्यूएचओ को आशंका है कि महाअमेरिका (उत्तरी और दक्षिण) में जीका 40 लाख लोगों को सक्रमणित कर सकता है। गरीब और विकासशील देशों में जीका वायरस के प्रकोप का अधिक खतरा है। गरीब देशों में मच्छरों का प्रकोप कहीं ज्यादा रहता है और एबोला की तरह अफ्रीका इसकी चपेट में आ सकता है। मार्च 2014 से एबोला ने पश्चिम अफ्रीका को बुरी तरह से जकड रखा है। इस जनवरी की 12 तारीख को सिएरा लियोन में दो महिलाओं की एबोला से मौत हो गई थी। अफ्रीका में लोगों के एबोला से मारे जाने का सिलसिला रुके नहीं रुक रहा है जबकि (डब्ल्यूएचओ) स्थानीय सरकार के साथ हर संभव एतिहातन उपाय कर रहा है। बहरहाल, भारत अभी जीका के प्रकोप से बचा हुआ है और सुखद समाचार यह है कि हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक इंटरनेषनल के वैज्ञानियों ने जीका वायरस का तोड निकाल लिया है। इस संस्था के पास जीका वायरस का एक नहीं, बल्कि दो वेक्सिन है और कंपनी ने इनका पेंटेट भी कर लिया है। लेकिन अभी जीका के वेक्सिन का पूरी तरह से ट्रायल होना बाकी है और इसमें काफी समय लग सकता है। कंपनी का दावा है कि अगर सरकार अनुमति दे तो वह चार माह में इस वेक्सिन की दस लाख खुराक तैयार कर सकती है। कंपनी के इस प्रयास की सराहना की जानी चाहिए। अमूमन, निजी क्षेत्र ऐसे वेक्सिन तैयार करने में आगे नहीं आता जिनमें मोटे लाभ की ज्यादा गुजाइंश न हो। यह उम्मीद ही पर्याप्त है कि देश के पास जीका का तोड है।






