बुधवार, 10 फ़रवरी 2016

हेडली की गवाही

                     
पाकिस्तानी-अमेरिकी नागरिक डेवडी कॉलमैन हैडली उर्फ सईद दाऊद गिलानी की गवाही ने पाकिस्तान की शैतानी फितरत को फिर बेनकाब किया है। सोमवार सुबह वीडियो  काँफ्रेसिंग के जरिए हेडली मुंबई कोर्ट  के समक्ष पेश  हुआ और उसने अपने कबूलनामे में कई खुलासे किए। मगर उसके खुलासे में कुछ भी नया नहीं है। यह सब वह अमेरिका  की अदालत में पहले भी बोल चुका है। हेडली ने मुंबई हमले के लिए  जकीउर रहमान लखवी सईद का नाम भी लिया। उसने यह भी कहा कि मुंबई में 26/11 हमले से पहले लश्कर  दो बार हमले के प्रयासकर चुका था मगर दोनों बार नाकाम रहा । हेडली के इस खुलासे से भारत की खुफिया एजेंसियों को  शर्मसार  होना चाहिए क्योंकि  इससे पता चलता है कि पाकिस्तानी आतंकी कितनी आसानी से भारत पर हमले के षडयंत्र रचते हैं मगर भारतीय खुफिया एजेंसिंयों को इसकी कानोकान भनक तक नहीं लगती । हेडली के अनुसार भारत के प्रति उसकी सख्त नफरत के कारण ही उसे 26/11मुंबई हमले में खास भूमिका दी गई थी और इसके लिए उसे लश्कर  के कमांडर जकीउर रहमान लखवी ने खुद एक साल तक प्रशिक्षण भी दिया था। भारत के प्रति नफरत के कारण हेडली 2009 में लश्कर  में  शामिल हुआ मगर अधेड उमर की वजह से उसे इस आतंकी संगठन में ज्यादा अहमियत नहीं दी गई। पर हेडली भारत से बदला लेना चाहता था और उसकी इस नफरत को देखते हुए उसे लश्कर  ने मुंबई हमले में सक्रिय भूमिका दी। हैडली  यह खुलासे मई 2011 में शिकागो की अदालत में कर चुका है। हेडली की गवाही भारत के लिए बडी कूटनीतिक कामयाबी है। अमेरिकी धरती से भारतीय कोर्ट  में 26/11 हमले के आरोपी का बयान भारत के लिए फायदेमंद हो सकता है। पाकिस्तान यह नहीं कह सकता की हेडली ने भारत के दवाब में बयान दिया है। अमेरिका के भारत के साथ बढते मैत्रीपूर्ण और पाकिस्तान के साथ बिगडते संबंधों के कारण यह  संभव हुआ है। पाकिस्तानी   तालिबान के अफगानिस्तान में बढते हमलों से अमेरिका पाकिस्तान से बेहद खफा है। अमेरिका अब यह बात अच्छी तरह जान गया है कि पाकिस्तान आतंक को पाल-पोस रहा है और अमेरिका के कहने के बावजूद वह रुक नहीं रहा है। हेडली के बयान से दुनिया की नजर में पाकिस्तान भी इस्लामिक श्टेट की तरह आतंकी राष्ट्र  साबित हो गया है। अगर पाकिस्तान के खूंखार आतंकी का निकटतम सहयोगी कह्ता है कि मुंबई हमले में सईद लखवी का हाथ है, तो पाकिस्तान इसे कैसे नकार सकता है। पाकिस्तान अब यह भी नहीं कह सकता कि वह भारतीय अदालत की कार्यवाही को नहीं मानता। इस बार की कार्यवाही में अमेरिका भी  शामिल है। लेकिन इतना सब होने के बावजूद पाकिस्तान मुंबई हमले के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार करेगा, ऐसा सोचना भी भारी भूल होगी । पठानकोट हमले को लेकर भारत पाकिस्तान को ठोस सबूत दे चुका है मगर पाकिस्तान है कि मानता ही नहीं। बहरहाल, भारत को हेडली की गवाही पर ज्यादा इतराने की जरुरत नहीं है। इस गवाही की मात्र कूटनीतिक अहमियत है इससे ज्यादा कुछ नहीं। भारत को अस्थिर करना पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का प्रमुख मकसद है और यह सब पाकिस्तान सेना के कहने पर किया जाता है। मजबूत और ताकतवर भारत पाकिस्तान के लिए सबसे बडा खतरा है। इन हालात में पाकिस्तान भारत को अस्थिर करने की हर मुमकिन कोशिश  करता रहेगा और इस काम में हेडली, लखवी जैसे भारत विरोधी तत्व उसकी सबसे बडी ढालें हैं। ताजा स्थिति में भारत और पाकिस्तान के बीच प्रस्तावित विदेश  सचिव स्तरीय वार्ता फिर टल सकती है। भारत पाकिस्तान से सईद को गिरफ्तार करने के लिए कहेगा, पाकिस्तान ऐसा नहीं करेगा।  सवाल यह है कि पाकिस्तान को रोकने  अथवा उसे सबक  के लिए भारत को क्या करना चाहिए? पाकिस्तान को नेस्तनाबूद करने के लिए उससे युद्ध करना कोई अच्छा विकल्प नहीं है। अगला युद्ध क्योंकि  परमाणु हथियारों से लडा जाएगा, यह सिर्फ तबाही ही लाएगा। भारत के पास एक ही विकल्प है कि कूटनीतिक स्तर पर पाकिस्तान को हाषिए पर लाए और आतंकी हमलों को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद करे।