मंगलवार, 9 फ़रवरी 2016

नशे में डूबता पंजाब

पंजाब में नशीली  वस्तुओं की तस्करी रुके नहीं रुक रही है। सीमावर्ती फिरोजपुर जिले के खेमकरण सेक्टर में सीमा सुरक्षा बल के जवानों द्वारा रविवार अलसुबह चार तस्करो को घुसपैठ करते वक्त मार गिराने की घटना  यही साबित करती है। मारे गए तस्करों में दो पाकिस्तानी और दो भारतीय शामिल है। तस्करों से 10 किलो हेरोइन बरामद की गई है। तस्कर पाकिस्तान सीमा से  इस हेरोइन की डिलीवर करने के लिए भारत में घुसपैठ करने की कोशिश  कर रहे थे। दो दिन पहले ही सीमा सुरक्षा बल ने वाघा बार्डर पर दो भारतीय तस्करों से दो किलो हेरोइन जब्त करके दोनों को गिरफ्तार किया था।  सवाल उठता है कि सीमा पर कडी निगरानी और फ्लडलाइट्स के बावजूद नशीली वस्तुओं की तस्करी  क्योंकर  बदस्तूर जारी है? जाहिर है “ सुरक्षा बलों की संलिप्तता" के बगैर ऐसा मुमकिन नहीं है। पंजाब पुलिस के निलंबित डीएसपी जगदीश  सिंह भोला की गिरफ्तारी और उसकी ड्रग रेकेट में सक्रिय संलिप्तता ताजा मिसाल है। इतना ही नहीं इस  मामले में राज्य के रसूखदार मंत्री का नाम भी उछाला गया। यही वजह है कि लाख प्रयासों के बावजूद नशीली वस्तुओं की तस्करी रुक नहीं रही है। पंजाब में हर रोज हेरोइन के औसतन 355 पेकेट इधर से उधर किए जाते हैं। नशीली वस्तुओं का  सालाना कारोबार 2000 करोड को पहुंच गया है। राज्य के लगभग 74 फीसदी युवा  नशीली वस्तुओं का सेवन करते हैं। पंजाब में युवाओं को नशे  ने किस कद्र जकड रखा है,  आंकडे इस बात के गवाह हैं। 2014 में जून से दिंसबर के दौरान राज्य के नशा  मुक्ति केन्द्रों में तीन लाख तीस हजार नशेडिए पंजीकृत किए गए थे। पिछले कुछ सालों से पंजाब में अफीम और भूकी (पॉपी हस्क) की जगह हेरोइन की खपत में खासा इजाफा हुआ है। अफीम और भूकी को चोरी-छिपे राज्य में भी ही उगा लिया जाता था अथवा पडोसी राज्य राजस्थान से खरीदा जाता था। राजस्थान में भूकी के वेंड जगह-जगह मिलते हैं। राजस्थान उच्च न्यायालय ने जुलाई 2015 में राज्य में चलाए जा रहे भूकी बिक्रय केद्रों को बंद करवा दिया था। मगर बाद में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उच्च न्यायालय के फैसले पर स्थगन आदेश  जारी करने से भुकी बिक्रय केन्द्र फिर खुल गए। युवाओं में हेरोइन की लत पडने के बाद से इसकी तस्करी काफी ज्यादा बढी है। पंजाब की पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान के गोल्डन ट्राइएंगल से निकटता के कारण राज्य नशीली वस्तुओं की तस्करी का ट्रांजिट केन्द्र है। यह  ट्राइएंगल अफीम, गांजा और चरस के लिए भी कुख्यात रहा है और विदेशी  मार्केट में नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए भी भारतीय मार्ग  को अपनाया जाता रहा है। पिछले कुछ समय से इस  ट्राइएंगल में ईरान की जगह भारत का नाम आया है क्योंकि अफगानिस्तान और पाकिस्तान से विदेशों क़ो  नशीली वस्तुओं की तस्करी बरास्ता भारत से की जा रही है।  इसी वजह पंजाब में नशीली वस्तुओं की तस्करी बदस्तूर जारी रही है। शास्त्रों में कृष्ण  की द्धारका नगरी का शराब की लत से लुप्तप्राय हो जाने का वर्णन है। और जिस तरह पंजाब के युवा तेजी से नशे  की गर्त में जा रहे हैं, उसका ख्याल करते हुए वह दिन दूर नहीं जब पंजाब का भी द्धारका जैसा हश्र हो सकता है। पंजाब में नशे  को लेकर कुछ सनसनीखेज तथ्य भी सामने आए हैं। पहला और अहम तथ्य है कि ज्यादातर नशेडी ग्रामीण इलाकों से हैं और वे अपेक्षाकृत संभ्रात परिवार से संबंध रखते हैं। दूसरा यह कि नशा  अधिकतर इजेक्टेबल तरीकों से किया जा रहा है जो कि स्वास्थय के लिए और भी ज्यादा खतरनाक है। पंजाब को देश  का खुशाहल और प्रगतिशील राज्य  माना जाता है मगर नशे  की लत ने राज्य की जडें खोखली कर दी हैं। नशे  की समस्या आतंक से भी अधिक खतरनाक है। आतंकियों से लडा जा सकता है मगर नशे  में डूब रहे अपने युवाओं से नहीं लडा जा सकता। युवा शक्ति देश  की अमूल्य पूंजी होती है और इसे इस तरह जाया नहीं किया जा सकता। नशीली  वस्तुओं की तस्करी आतंकियों का प्रमुख फंडिंग स्त्रोत भी  है। बहरहाल, पंजाब में अगले साल  होने वाले विधानसभा चुनाव में नशे  की समस्या प्रमुख चुनाव मुददा होने जा रहा है।