नए साल का तोहफा
केन्द्र सरकार में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी (सी और डी गु्रप) के पदों की भर्ती के लिए इंटरव्यू पद्धति को खत्म करके मोदी सरकार ने देश के लाखों बेरोजगारों को नव वर्ष का उम्दा तोहफा दिया है। सरकारी नौकरी के लिए मारे-मारे फिर रहे युवाओं के लिए नए साल में इससे बढिया तोहफा हो ही नहीं सकता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त को स्वत्रंतता दिवस के अपने संबोधन में केन्द्र सरकार के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों की भर्ती में इंटरव्यू को समाप्त करने और इसे पहली जनवरी 2016 से लागू करने का ऐलान किया था। आज (पहली जनवरी) से यह व्यवस्था लागू हो गई है। प्रधानमंत्री ने तब कहा था कि दुनिया में ऐसा कोई भी चयनकर्ता नहीं है जो दो मिनट के इंटरव्यू में आवेदक की योग्यता को परख ले। प्रधानमंत्री के इस कथन में खासा वजन है। योग्यता जांचने-परखने के लिए परीक्षा सबसे सटीक तरीका है और मेरिट पर भर्ती एकदम न्यायसंगत व्यवस्था। एक जमाना था जब नौकरी और मेडिकल तथा इंजीनियरिंग में दाखिले भी विशुद्ध मेरिट पर दिए जाते थे। बाहरवीं की परीक्षा मे जो अव्वल आते, वही मेधावी छात्र मेडिकल और अन्य व्यावसायिक कॉलेजिज में दाखिला पाते। यह पद्धति अपेक्षाकृत अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत थी। मगर प्रतिस्पर्धा बढने के साथ इस पद्धति को ज्यादा कारगर नहीं पाया गया। अब बाहरर्वीं की परीक्षा से कहीं ज्यादा आल इंडिया मेडिकल, इंजीनियरिंग एव विभिन्न राज्यों के मेडिकल, इंजीनियरिंग परीक्षाएं महत्वपूर्ण हो गई हैं। इन सब में भी मेरिट के आधार पर ही दाखिले दिए जाते हैं। वैसे सियासी नेताओं ने निजी मेडिकल और इंजीनिंयरिंग कॉलेजिज में मेनेजमेंट कोटा देकर बैकडोर दाखिले का जुगाड कर रखा है। इसी तरह सरकारी नौकरियों में इंटरव्यू के जरिए भर्ती की व्यवस्था भी सिफारिश और भाई-भतीजावाद फैलाने का जरिया है। यह बात जगजाहिर है कि सरकारी नौकरियों की भर्ती में सिफारिश का बोलबाला रहता है और सियासी नेताओं के परिजनों, करीबियों अथवा उनकी सिफारिश पर ही सरकारी नौकरी मिलती है। सरकारी नौकरियों में भर्ती का आलम यह है कि अगर सिफारिश है तो पद भी सृजित किया जाता है और रातोंरात भर्ती और चयन भी। प्रधानमंत्री मोदी ने बेरोजगार युवाओं के दुख- दर्द को समझा है। यह स्थिति वाकई ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि बेरोजगारों को दो-तीन मिनट के इंटरव्यू के लिए दूर-सदूर क्षेत्रों से दिल्ली अथवा राज्यों की राजधानी आना पडे और बाद में पता चले कि चयन किसी सिफारिशी का हुआ है। अब तक यही होता रहा है। हरियाणा के पूर्व म्ुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला और उनके पुत्र तो भर्ती में धांधलियों के लिए जेल की सजा काट रहे हैं। केन्द्र सरकार के 36 लाख पदों मेंसे 95 फीसदी पद तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के हैं। हर साल तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के लगभग 50,000 पदों पर भर्ती की जाती है। केद्र के अलावा विभिन्न राज्यों में भी यही स्थिति है। राज्यों में भी 90 फीसदी पद तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के हैं। प्रधानमंत्री ने राज्यों से भी तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों की भर्ती में इंटरव्यू को समाप्त करने का आहवान किया है। भाजपा शांसित राज्य ऐसा करने के लिए पूरी तरह से तैयार भी हैं मगर गैर-भाजपा शासित राज्यों को जैसे सांप सूंघ गया हो। तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों की भर्ती में इंटरव्यू पद्धति खत्म करने से राज्यों को बचत भी हो सकती है। अधिकतर राज्यों ने तृतीय श्रेणी के पदों की भर्ती के लिए अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड (एसएससबी) का गठन कर रखा है जबकि भर्ती का काम लोक सेवा आयोग भी कर सकता है। तृतीय श्रेणी के पदों की भर्ती में इंटरव्यू खत्म किए जाने से एसएससबी की कोई जरुरत नहीं रहेगी। इससे सरकार का पैसा भी बचेगा। देश में आज भी सरकारी नौकरी को प्राथमिकता दी जाती है। मध्यम एवं कमजोर तबको के लिए सरकारी नौकरी वरदान है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस बात के लिए बधाई के पात्र हैं कि उन्होंने सालों से जारी अन्यायपूर्ण भर्ती को समाप्त करके पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवस्था को लागू करवाया है।
केन्द्र सरकार में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी (सी और डी गु्रप) के पदों की भर्ती के लिए इंटरव्यू पद्धति को खत्म करके मोदी सरकार ने देश के लाखों बेरोजगारों को नव वर्ष का उम्दा तोहफा दिया है। सरकारी नौकरी के लिए मारे-मारे फिर रहे युवाओं के लिए नए साल में इससे बढिया तोहफा हो ही नहीं सकता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त को स्वत्रंतता दिवस के अपने संबोधन में केन्द्र सरकार के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों की भर्ती में इंटरव्यू को समाप्त करने और इसे पहली जनवरी 2016 से लागू करने का ऐलान किया था। आज (पहली जनवरी) से यह व्यवस्था लागू हो गई है। प्रधानमंत्री ने तब कहा था कि दुनिया में ऐसा कोई भी चयनकर्ता नहीं है जो दो मिनट के इंटरव्यू में आवेदक की योग्यता को परख ले। प्रधानमंत्री के इस कथन में खासा वजन है। योग्यता जांचने-परखने के लिए परीक्षा सबसे सटीक तरीका है और मेरिट पर भर्ती एकदम न्यायसंगत व्यवस्था। एक जमाना था जब नौकरी और मेडिकल तथा इंजीनियरिंग में दाखिले भी विशुद्ध मेरिट पर दिए जाते थे। बाहरवीं की परीक्षा मे जो अव्वल आते, वही मेधावी छात्र मेडिकल और अन्य व्यावसायिक कॉलेजिज में दाखिला पाते। यह पद्धति अपेक्षाकृत अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत थी। मगर प्रतिस्पर्धा बढने के साथ इस पद्धति को ज्यादा कारगर नहीं पाया गया। अब बाहरर्वीं की परीक्षा से कहीं ज्यादा आल इंडिया मेडिकल, इंजीनियरिंग एव विभिन्न राज्यों के मेडिकल, इंजीनियरिंग परीक्षाएं महत्वपूर्ण हो गई हैं। इन सब में भी मेरिट के आधार पर ही दाखिले दिए जाते हैं। वैसे सियासी नेताओं ने निजी मेडिकल और इंजीनिंयरिंग कॉलेजिज में मेनेजमेंट कोटा देकर बैकडोर दाखिले का जुगाड कर रखा है। इसी तरह सरकारी नौकरियों में इंटरव्यू के जरिए भर्ती की व्यवस्था भी सिफारिश और भाई-भतीजावाद फैलाने का जरिया है। यह बात जगजाहिर है कि सरकारी नौकरियों की भर्ती में सिफारिश का बोलबाला रहता है और सियासी नेताओं के परिजनों, करीबियों अथवा उनकी सिफारिश पर ही सरकारी नौकरी मिलती है। सरकारी नौकरियों में भर्ती का आलम यह है कि अगर सिफारिश है तो पद भी सृजित किया जाता है और रातोंरात भर्ती और चयन भी। प्रधानमंत्री मोदी ने बेरोजगार युवाओं के दुख- दर्द को समझा है। यह स्थिति वाकई ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि बेरोजगारों को दो-तीन मिनट के इंटरव्यू के लिए दूर-सदूर क्षेत्रों से दिल्ली अथवा राज्यों की राजधानी आना पडे और बाद में पता चले कि चयन किसी सिफारिशी का हुआ है। अब तक यही होता रहा है। हरियाणा के पूर्व म्ुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला और उनके पुत्र तो भर्ती में धांधलियों के लिए जेल की सजा काट रहे हैं। केन्द्र सरकार के 36 लाख पदों मेंसे 95 फीसदी पद तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के हैं। हर साल तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के लगभग 50,000 पदों पर भर्ती की जाती है। केद्र के अलावा विभिन्न राज्यों में भी यही स्थिति है। राज्यों में भी 90 फीसदी पद तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के हैं। प्रधानमंत्री ने राज्यों से भी तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों की भर्ती में इंटरव्यू को समाप्त करने का आहवान किया है। भाजपा शांसित राज्य ऐसा करने के लिए पूरी तरह से तैयार भी हैं मगर गैर-भाजपा शासित राज्यों को जैसे सांप सूंघ गया हो। तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों की भर्ती में इंटरव्यू पद्धति खत्म करने से राज्यों को बचत भी हो सकती है। अधिकतर राज्यों ने तृतीय श्रेणी के पदों की भर्ती के लिए अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड (एसएससबी) का गठन कर रखा है जबकि भर्ती का काम लोक सेवा आयोग भी कर सकता है। तृतीय श्रेणी के पदों की भर्ती में इंटरव्यू खत्म किए जाने से एसएससबी की कोई जरुरत नहीं रहेगी। इससे सरकार का पैसा भी बचेगा। देश में आज भी सरकारी नौकरी को प्राथमिकता दी जाती है। मध्यम एवं कमजोर तबको के लिए सरकारी नौकरी वरदान है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस बात के लिए बधाई के पात्र हैं कि उन्होंने सालों से जारी अन्यायपूर्ण भर्ती को समाप्त करके पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवस्था को लागू करवाया है।






