पंजाब में खडूर साहिब विधानसभा सीट के उप-चुनाव की तारीख घोशित होने से राज्य में राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। तरनतारन जिले की यह सीट पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के रमनजीत सिंह सिक्की ने जीती थी। अक्टूबर, 2015 में कांग्रेस के विधायक रमनजीत सिंह ने खडूर साहिब हलके के बाथ गांव में गुरु ग्रंथ साहिब को अपवित्र करने की घटना के विरोध में विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा सिक्की का इस्तीफा स्वीकार होने पर 18 नवंबर को इस सीट को खाली घोषित किया गया और तभी से उप-चुनाव कराने की प्रकिया शुरु हो गई। खडूर साहिब सीट पर 13 फरवरी को वोट डाले जाएंगे और 16 फरवरी को मतगणना की जाएगी। एक साल बाद पंजाब विधानसभा के चुनाव कराए जाने है। इस बात के मद्देनजर , खडूर साहिब उप-चुनाव विधानसभा चुनाव के कर्टन रेजर माने जा रहे हैं। उप चुनाव में न केवल सतारूढ गठबंधन शिरोमणि अकाली दल-भारतीय जनता पार्टी की प्रतिष्ठा दांव पर है, बल्कि उप-चुनाव के नतीजे यह भी बताएंगे कि कांग्रेस और “आप“ कितने पानी में है। कांग्रेस के लिए खडूर साहिब उप-चुनाव दो कारणों से भी अहम है। पहला और प्रमुख कारण यह है कि यह सीट कांग्रेस के पास थी। इस स्थिति में इस सीट को बरकरार रखना कांग्रेस के लिए नाक बचाने का सवाल है। पटियाला उप-चुनाव को छोडकर शिरोमणि अकाली दल आज तक कोई विधानसभा उपचुनाव नहीं हारा है। पिछले साल (अप्रैल, 2015) विधानसभा उपचुनाव में अकाली दल ने धूरी विधानसभा सीट भी कांग्रेस से छीन ली थी। 2012 के विधानसभा चुनाव में धूरी हलके से कांग्रेस के अरविंद खन्ना जीते थे मगर जनवरी 2015 में खन्ना ने विधानसभा सदस्यता छोड दी थी। अरविंद खन्ना कैप्टन अमरेन्द्र सिंह के करीबी हैं। शिरोमणि अकाली दल मोगा और तलवंडी साबो सीटों के उप-चुनाव में भी कांग्रेस को धूल चटा चुका है । दूसरे, पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी और कांग्रेस विधायक दल नेता पद दोनों पर हाल ही में बेहतर चुनाव परिणामों के लिए बदलाव किया गया है। इस स्थिति में नव-नियुक्त प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरेन्द्र सिंह और कांग्रेस विधायक दल के नेता चरणजीत सिंह चन्नी के लिए खडूर साहिब कडी अग्नि परीक्षा है। सत्तारूढ शिरोमणि अकाली दल इस सीट को जीतने के लिए ऐडी-चोटी का जोर लगाएगा। लोकसभा चुनाव में खडूर साहिब सीट शिरोमणि अकाली दल के रणजीत सिंह ब्रहृपुरा ने एक लाख मतों के अंतर से जीतीे थी और खडूर साहिब में भी अकाली दल को लीड मिली थी। 2009 के लोकसभा चुनाव में भी यह सीट शिरोमणि अकाली दल ने ही जीती थी। 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने लगभग 3000 मतों के अंतर से शिरोमणि अकाली दल से यह सीट जीती थी। तब रणजीत सिंह ब्रहृपुरा ही अकाली दल के उम्मीदवार थे। इन हालात में कांग्रेस के लिए यह सीट निकालना आसान नहीं होगा। निसंदेह, कैप्टन अमरेन्द्र सिंह के पंजाब की कमान संभालने के कारण कांगेस इस बार बेहतर स्थिति में है। कैप्टन ने मोदी लहर के बावजूद अमृतसर लोकसभा सीट पर भाजपा के दिग्गज नेता अरुण जेटली को एक लाख से भी ज्यादा मतों के अंतर से हराया था। यही नहीं, पटियाला विधानसभा सीट के उप चुनाव में पुरजोर कोशिशों के बावजूद अकाली दल कांग्रेस को परास्त नहीं कर पाया था। इस सीट पर अमरेन्द्र सिंह की पत्नी एवं पूर्व विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर जीतीं थी। वस्तुतः, विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस उपचुनावों में केवल यही सीट जीत पाई थी और वह भी कैप्टन अमरेन्द्र सिंह की बदौलत। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरेन्द्र सिंह के नेतृत्व में यह पहला उपचुनाव है। इसलिए, कांग्रेस इस चुनाव को जीतने में कोई कसर नहीं छोडेगी। इस उपचुनाव में कांग्रेस की “एकता“ का भी पता चल जाएगा। कैप्टन इस बार सब को साथ लेकर पार्टी को मजबूत करने का संकल्प दोहरा चुके है़। जीत और हार इतने मायने नहीं रखती जितनी हार-जीत के मतों का अंतर। खडूर साहिब के नतीजे सियासी दलों के बीच प्रस्तावित गठबंधन भी तय करेंगे। इस उप-चुनाव से पहले मनप्रीत बादल की पार्टी का कांग्रेस में विलय हो सकता है। अमूमन, उपचुनाव में स्थानीय मुद्दे हॉवी रहते हैं और एंटी-इंकूबेंसी निष्क्रिय रहता है। कहते हैं “सफलता से बडा कुछ भी नहीं (नथिंग स्क्सीडस लाइक स्क्सेस)“। कांग्रेस के प्रांतीय नेताओं को इस उपचुनाव में यह साबित करना होगा।
गुरुवार, 14 जनवरी 2016
Khaddor Saheb By-polls: Curtian Raiser to Punjab Assembly Elections
Posted on 10:07 am by mnfaindia.blogspot.com/






