बातचीत जारी रहे
पठानकोट स्थित भारतीय वायु सेना के एयरबेस पर 2 नए साल के दूसरे ही दिन आतंकी हमले से भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता के द्वार फिर बंद होने की कगार पर हैं। इसी सप्ताह के अंत में 15 जनवरी को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच वार्ता प्रस्तावित है। पठानकोट हमले से आठ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रुस से लौटते समय अचानक लाहौर में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात करके जो पहल की थी, आतंकियों ने उस पर पानी फेर दिया। भारत विरोधी तत्व का मकसद वार्ता को विफल करना ही था। जब कभी भी भारत और पाकिस्तान के बीच द्धिपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयास किए जाते हैं, पाकिस्तान में भारत विरोधी तत्व इसे विफल करने में कोई कसर नहीं छोडते। इस बार भी यही हुआ हालांकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पठानकोट हमले के लिए दोषी आतंकियों के पाकिस्तानी आकाओं को पकडने के लिए पहले की अपेक्षा अपेक्षाकृत अधिक संजीदा लग रहे हैं। नवाज शरीफ ने प्रधानमंत्री मोदी को कडी कार्रवाई का भरोसा दिया है। इसी क्रम में उन्होंने संयुक्त जांच टीम का गठन भी किया है जिसमें सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई को भी शामिल किया गया है। सोमवार को इस टीम ने पठानकोट हमले के साजिशकर्ताओं की धड-पकड के लिए बहावलपुर, गुजरांवाला, झेलम समेत कई जगह छापे भी मारे और कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया। ताजा घटनाक्रम के दृष्टिगत पाकिस्तान की नेकनीयति पर शक नहीं किया जा सकता। मंगलवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी पाकिस्तान के प्रति कुछ नरम दिखे जबकि सोमवार को रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने यह कहकर “जिम्होंने ने हमें दर्द दिया है, उन्हें भी दर्द महसूस कराएंगे“, पाकिस्तान को कडी चेतावनी दी थी। गृहमंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि पाकिस्तान ने भारत सरकार को पठानकोट हमले के पाकिस्तानी सूत्रधारों के खिलाफ कडी कार्रवाई का आश्वाशन दिया है। इसलिए उस पर अविश्वास करने का कोई कारण नहीं है। मगर सच्चाई यह भी है कि पाकिस्तान भारत में आतंकी हमलों के पाकिस्तानी सूत्रधारों के खिलाफ कार्रवाई करने के मामले में गिरगिट की तरह रंग बदलता रहा है। मुंबई के 26/11 हमले का मास्टरमाइंड हाफिज सईद आज भी सरेआम पाकिस्तान में भारत के खिलाफ आग उगल रहा है। भारत हाफिज के मुंबई आतंकी हमले का मास्टरमाइंड होने के पुख्ता सबूत भी दे चुका है। पाकिस्तान भारत द्वारा पेश सबूतों को मानता ही नहीं है। पाकिस्तान यही पैंतरा पठानकोट आतंकी हमले को लेकर भी चल सकता है। और पाकिस्तान के अग्रणी न्यूज चैनल पर विश्वास किया जाए तो चल भी चुका है। चैनल जियो न्यूज का दावा है कि पठानकोट हमले को लेकर भारत ने पाकिस्तान को जो सबूत दिए हैं, उन्हें सरकार ने नकार दिया गया है। भारत ने पाकिस्तान को आतंकियों के मोबाइल नंबर दिए थे। इन नंबरों से पठानकोट के हमलावरों ने पाकिस्तान स्थित सूत्रधारों और अपने परिजनों से बातचीत की थी। मगर पाकिस्तान का कहना है कि जो नंबर उसे दिए गए , वे पाकिस्तान में रजिस्टर्ड तक नहीं है। पाकिस्तान ने अपनी आरंभिक जांच रिपोर्ट भी भारत को सौंप दी है। भारत यह बात अच्छी तरह जानता है कि पाकिस्तान पुख्ता सबूत होने के बावजूद इन्हें नकार देगा। पाकिस्तान तो क्या कोई भी देश इस तरह के सबूत नहीं मानेगा। पाकिस्तान यह बात कैसे मान सकता है कि उसकी सरजमीं से भारत के खिलाफ “प्रॉक्सी वार “ लडा जा रहा है। इससे पूरे विश्व उस पर थू-थू कर सकता है। बहरहाल, 15 जनवरी को विदेश सचिव स्तर की वार्ता प्रस्तावित है। पाकिस्तान तो इस वार्ता के लिए तैयार है मगर भारत का स्टैंड है कि पाकिस्तान जब तक पठानकोट हमले के सूत्रधारों पर ठोस कार्रवाई नहीं करता है, तब तक बात आगे नहीं बढ सकती। मंगलवार को गृहमंत्री के वकतव्य से लगता है कि भारत वार्ता में शरीक हो सकता है मगर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। वार्ता का जरी रहना दोनों देशों के हित में है।
पठानकोट स्थित भारतीय वायु सेना के एयरबेस पर 2 नए साल के दूसरे ही दिन आतंकी हमले से भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता के द्वार फिर बंद होने की कगार पर हैं। इसी सप्ताह के अंत में 15 जनवरी को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच वार्ता प्रस्तावित है। पठानकोट हमले से आठ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रुस से लौटते समय अचानक लाहौर में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात करके जो पहल की थी, आतंकियों ने उस पर पानी फेर दिया। भारत विरोधी तत्व का मकसद वार्ता को विफल करना ही था। जब कभी भी भारत और पाकिस्तान के बीच द्धिपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयास किए जाते हैं, पाकिस्तान में भारत विरोधी तत्व इसे विफल करने में कोई कसर नहीं छोडते। इस बार भी यही हुआ हालांकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पठानकोट हमले के लिए दोषी आतंकियों के पाकिस्तानी आकाओं को पकडने के लिए पहले की अपेक्षा अपेक्षाकृत अधिक संजीदा लग रहे हैं। नवाज शरीफ ने प्रधानमंत्री मोदी को कडी कार्रवाई का भरोसा दिया है। इसी क्रम में उन्होंने संयुक्त जांच टीम का गठन भी किया है जिसमें सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई को भी शामिल किया गया है। सोमवार को इस टीम ने पठानकोट हमले के साजिशकर्ताओं की धड-पकड के लिए बहावलपुर, गुजरांवाला, झेलम समेत कई जगह छापे भी मारे और कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया। ताजा घटनाक्रम के दृष्टिगत पाकिस्तान की नेकनीयति पर शक नहीं किया जा सकता। मंगलवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी पाकिस्तान के प्रति कुछ नरम दिखे जबकि सोमवार को रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने यह कहकर “जिम्होंने ने हमें दर्द दिया है, उन्हें भी दर्द महसूस कराएंगे“, पाकिस्तान को कडी चेतावनी दी थी। गृहमंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि पाकिस्तान ने भारत सरकार को पठानकोट हमले के पाकिस्तानी सूत्रधारों के खिलाफ कडी कार्रवाई का आश्वाशन दिया है। इसलिए उस पर अविश्वास करने का कोई कारण नहीं है। मगर सच्चाई यह भी है कि पाकिस्तान भारत में आतंकी हमलों के पाकिस्तानी सूत्रधारों के खिलाफ कार्रवाई करने के मामले में गिरगिट की तरह रंग बदलता रहा है। मुंबई के 26/11 हमले का मास्टरमाइंड हाफिज सईद आज भी सरेआम पाकिस्तान में भारत के खिलाफ आग उगल रहा है। भारत हाफिज के मुंबई आतंकी हमले का मास्टरमाइंड होने के पुख्ता सबूत भी दे चुका है। पाकिस्तान भारत द्वारा पेश सबूतों को मानता ही नहीं है। पाकिस्तान यही पैंतरा पठानकोट आतंकी हमले को लेकर भी चल सकता है। और पाकिस्तान के अग्रणी न्यूज चैनल पर विश्वास किया जाए तो चल भी चुका है। चैनल जियो न्यूज का दावा है कि पठानकोट हमले को लेकर भारत ने पाकिस्तान को जो सबूत दिए हैं, उन्हें सरकार ने नकार दिया गया है। भारत ने पाकिस्तान को आतंकियों के मोबाइल नंबर दिए थे। इन नंबरों से पठानकोट के हमलावरों ने पाकिस्तान स्थित सूत्रधारों और अपने परिजनों से बातचीत की थी। मगर पाकिस्तान का कहना है कि जो नंबर उसे दिए गए , वे पाकिस्तान में रजिस्टर्ड तक नहीं है। पाकिस्तान ने अपनी आरंभिक जांच रिपोर्ट भी भारत को सौंप दी है। भारत यह बात अच्छी तरह जानता है कि पाकिस्तान पुख्ता सबूत होने के बावजूद इन्हें नकार देगा। पाकिस्तान तो क्या कोई भी देश इस तरह के सबूत नहीं मानेगा। पाकिस्तान यह बात कैसे मान सकता है कि उसकी सरजमीं से भारत के खिलाफ “प्रॉक्सी वार “ लडा जा रहा है। इससे पूरे विश्व उस पर थू-थू कर सकता है। बहरहाल, 15 जनवरी को विदेश सचिव स्तर की वार्ता प्रस्तावित है। पाकिस्तान तो इस वार्ता के लिए तैयार है मगर भारत का स्टैंड है कि पाकिस्तान जब तक पठानकोट हमले के सूत्रधारों पर ठोस कार्रवाई नहीं करता है, तब तक बात आगे नहीं बढ सकती। मंगलवार को गृहमंत्री के वकतव्य से लगता है कि भारत वार्ता में शरीक हो सकता है मगर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। वार्ता का जरी रहना दोनों देशों के हित में है।






