बुधवार, 20 जनवरी 2016

Can India Fight Back Another Douse of Recession

दुनिया की दूसरी सबसे बडी अर्थव्यवस्था चीन का बराबर सुस्ताना मंदी के स्पष्ट  संकेत दे रहा है। 2015 में चीन की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ पच्चीस साल में सबसे कम 6.8 फीसदी रही है और चौथी तिमाही की ग्रोथ तो और भी कम 6.8 फीसदी रही है। बीता साल चीन के लिए किसी भी सूरत में अच्छा  नहीं रहा है।  शेयर बाजार के क्रेश  होने से भारी संख्या में निवेशकों के पलायन से कारण केपिटल का जबरदस्त आउटफ्लो दर्ज  हुआ और युवान के अवमूल्यन ने चीन की अर्थव्यवस्था को और कमजोर कर डाला। इन सब बातों ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है और  2016 में मंदी के प्रतिकूल  परिणामों  से सहमी हुई है। चीन के स्लोडाउन और कमोडिटी मार्केट में मंदी के  दृष्टिगत   मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय  मुद्राकोष  को 2016 के लिए  चीन की ग्रोथ का आकलन संशोधित करना पडा। अब आईएमएफ का अनुमान है कि 2016 में चीन की ग्रोथ 2015 से भी कम 6.3 फीसदी के आस-पास रहेगी। चीन द्वारा जारी आंकडों के अनुसार दिसंबर में औद्योगिक उत्पादन अपेक्षा से कहीं कम 5.9 फीसदी  की दर से बडा है जबकि पॉवर और इस्पात के उत्पादन में दशकों बाद पहली बार  गिरावट आई है। चीन इस समय दुनिया का अग्रणी इस्पात उत्पादक है और भारत को कडी टक्कर दे रहा है। कोयला उत्पादन लगातार दूसरे साल फिर गिरा है। इससे दो बातें साफ है। पहली यह कि चीन की अर्थव्यवस्था अब स्लोडाउन से बुरी तरह ग्रस्त है और दूसरी बात यह कि चीन भी उतरोत्तर कंज्यूमर उन्मुख ग्रोथ की ओर अग्रसर है। इन आंकडों से यही संकेत मिल रहे हैं कि स्थिति काफी खराब है। निवेशकों का विश्वास  डोल रहा  है और रिटेल  निवेशक  चीन  के शेयर बाजार से मुंह फेर  चुके  हैं ।  अर्थव्यवस्था के फंडामेंटल्स  शिथिल पड चुके है। इससे साफ लग रहा   है कि चीन के स्लोडाउन का असर पूरी  वैश्विक  अर्थव्यवस्था पर पड सकता है। तथापि, राहत की बात यह है कि चीन में ग्रोथ के आंकडे इतने भी निराशाजनक नहीं है और अगर ग्रोथ के लिए माकूल माहौल मिलता है तो स्थिति संभल भी सकती है। मंगलवार को चीन की स्टॉक मार्केट में कुछ सुधार देखा गया। मंगलवार को शंघाई कम्पोजिट में 3.22 फीसदी का उछाल आया। हांगकांग के हैंग सेंग सूचकांक में  2.07 फीसदी और जापान के निक्की-225 में 0.55 फीसदी का उछाल दर्ज हुआ। भारत के शेयर बाजार में भी तीन दिन की मंदी के बाद तेजी व्याप्त रही और सेंसेक्स में 1.21 फीसदी और निफ्टी में 1,14 फीसदी की तेजी आई। पिछले एक माह (दिसंबर, 2015) में यह सबसे बडा उछाल है। देश  के सबसे बडे औद्योगिक समूह रिलायंस इंडस्ट्रीज ने तीसरी तिमाही में 7290 करोड रु का नेट रिकार्ड लाभांश  अर्जित करके भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत फंडामेंटल्स के संकेत दिए हैं। यूरोप भले ही भीषण मंदी की चपेट में है मगर फिलहाल भारत पर मंदी का असर नजर नहीं आ रहा है। इसके उलट भारत  के लिए चीन की मंदी से अपने निर्यात को बढाने का सुअवसर है। 1980 के बाद से चीन लगातार भारत को ग्रोथ में पछाडता रहा है और इस समय चीन की अर्थव्यवस्था भारत से पांच गुना बडी 10 खरब डॉलर की हो चुकी है। 2015 में पहली बार ग्रोथ में भारत ने चीन को पीछे छोडा है और अंतरराष्ट्रीय  वित्तीय संस्थाओं का आकलन है कि भारत 2030 तक चीन की बराबरी करने में सक्षम हो जाएगा। इसी बात के मद्देनजर  नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पानगडिया का कहना है कि भारत निर्यात में भी चीन  को पीछे छोड सकता है। लागत बढने और एजिंग लेबर फोर्स सेे चीन का निर्यात उतरोतर महंगा होता जा रहा है और अब तक चीन को जो तुलानात्मक (कम्पेरेटिव ) एडवांटेज थी, वह खत्म होती जा रही है। भारत की यंग लेबर- फोर्स  और लेबर-सेंविग टकनॉलॉजी निर्यात में चीन को मात दे सकती है। इससे भारत की ग्रोथ दर और तेज हो सकती है। सिर्फ जलवायु परिवर्तन ही भारत की ग्रोथ को रोक सकता है। भारत की  अर्थव्यवस्था   इतनी मजबूत तो है कि वह 2008 की  तरह   मंदी के असर को झेल सकती है ।