कांग्रेस के बुरे दिन
देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस बुरे दौर से गुजरी रही है। पहले लोकसभा चुनाव और फिर विधानसभा चुनावों में करारी पराजय से कांग्रेस अभी तक उभर नहीं पाई थी कि केरल के मुख्यमंत्री ओमान चांडी पर घूसखोरी के आरोपों से पार्टी की खासी किरकिरी हो रही है। पार्टी का जनाधार पहले ही सिकुड कर कुछ राज्यों तक सिमट कर रह गया है। उत्तर प्रदेश , पश्चिम बंगाल और तमिल नाडु जैसे बडे राज्यों में तो कांग्रेस का वर्चस्व तक नहीं है। मध्य प्रदेश और गुजरात में भाजपा काग्रेस को लंबे समय से सत्ता से बाहर रखे हुए है और ओडीशा में बीजू जनता दल का दबदबा है। बिहार में कांग्रेस नीतिश कुमार का पल्लू पकड़कर जैसे-तैसे अपना वजूद बचा पाई है। महाराष्ट्र देश का एकमात्र बडा राज्य था, जहां कांग्रेस शरद पवार की राश्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के साथ सता में थे मगर यह राज्य भी पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के हाथ से फिसल गया। हाल ही में अरुणाचल प्रदेश में पार्टी के बागियों ने भाजपा के साथ मिलकर कांग्रेस की लुटिया डूबो दी और कांग्रेस सता से बाहर हो गई। और अब केरल भी कांग्रेस के हाथ से फिसल रहा है। केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी सोलर घोटाले में उलझे हुए हैं और विपक्ष सडकों पर प्रदर्शन करके कांग्रेस नीत गठबंधन सरकार के नाको दम किए हुए हैं। चांडी से पहले हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह भी आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में फंसे हुए हैं। अप्रैल में केरल विधानसभा के लिए चुनाव कराए जाने हैं। सोलर स्कैम के आरोपी मुख्यमंत्री ओमन चांडी को शुक्रवार को उच्च न्यायालय से थोडी राहत तो मिली मगर इससे चांडी की छवि निखरने से रही। त्रिशुर स्थित अदालत ने वीरवार को मुख्यमंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किए थे। जाहिर है अदालत को मामले में प्रथम दृश्ट्या “दाल में कुछ काला“ नजर आया होगा, इसीलिए मामले का संज्ञान लिया गया । केरल उच्च न्यायालय ने फिलहाल दो माह के लिए अदालती आदेश पर रोक लगा दी है। सौर्य उर्जा घोटाले में मुख्यमंत्री ओमन चांडी पर 7 करोड की घूस मांगने का आरोप है। घोटाले की मुख्य आरोपी सरिता नायर ने वीरवार को फिर आरोप लगाया कि वे मुख्यमंत्री के विश्वास पात्र को 1 करोड 90 लाख दे भी चुकी है। सरिता नायर न्यायिक आयोग के समक्ष भी यही आरोप दोहरा चुकी है। चांडी भी न्यायिक आयोग के समक्ष पेष हो चुके हैं। चांडी बतौर मुख्यमंत्री न्यायिक आयोग के समक्ष पेश होने वाले पहले मुख्यमंत्री हैं। सोलर स्केम का पर्दाफाश 2013 में हुआ था। सोलर एनर्जी नाम की एक फर्जी कंपनी ने मुख्यमंत्री से निकटता का हवाला देकर निवेशकों और लोगों से सोलर पावर यूनिट्स लगाने और उन्हें बिजनेस पार्टनर बनाने का लालच देकर 70 करोड रु से ज्यादा इक्ठठे किए थे। सरिता नायर अपने सहयोगी के साथ इस फर्जी कंपनी की मुख्य कर्ताधर्ता थी। मीडिया में सुर्खियां बटोरने और विश्वश्नीयता हासिल करने के लिए कंपनी ने राज्य की प्रमुख हस्तियों को “वर्जिन अर्थ गोल्डन फीदर एनवारमेंटल अवार्ड“ भी बांटे मगर जल्द ही इस स्केम का पर्दाफाश हो गया। इस पर मुख्यमंत्री ओमान चांडी के निजी सहायक और सरिता नायर समेत पांच लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। सरकार ने घोटाले की जांच के लिए उच्च न्यायालय के सेवा निवृत जज की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग का गठन कर रखा है। चांडी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निचली अदालती आदेश पर भले ही उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है मगर विपक्ष इसे चुनाव में जोर-शोर से उछालेगा। केरल में हर पांच साल बाद सरकार के बदलने की रिवायत रही है। इस बार कांग्रेस नीत यूडीएफ की सरकार है तो अगली बार माकपा नीत वामपंथी द्लों की सरकार का सत्ता में आना तय माना जा रहा है। 2014 के लोकसभा चुनाव में हालांकि कांग्रेस नीत यूडीएफ ने 20 मेंसे 12 सीटें जीती थीं मगर तब से अब तक परिस्थतियां काफी बदल गईं है। चांडी पर सोलर स्केम में कथित घूस लेने के आरोपों सेे पार्टी को और ज्यादा नुकसान उठाना पड सकता है।
देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस बुरे दौर से गुजरी रही है। पहले लोकसभा चुनाव और फिर विधानसभा चुनावों में करारी पराजय से कांग्रेस अभी तक उभर नहीं पाई थी कि केरल के मुख्यमंत्री ओमान चांडी पर घूसखोरी के आरोपों से पार्टी की खासी किरकिरी हो रही है। पार्टी का जनाधार पहले ही सिकुड कर कुछ राज्यों तक सिमट कर रह गया है। उत्तर प्रदेश , पश्चिम बंगाल और तमिल नाडु जैसे बडे राज्यों में तो कांग्रेस का वर्चस्व तक नहीं है। मध्य प्रदेश और गुजरात में भाजपा काग्रेस को लंबे समय से सत्ता से बाहर रखे हुए है और ओडीशा में बीजू जनता दल का दबदबा है। बिहार में कांग्रेस नीतिश कुमार का पल्लू पकड़कर जैसे-तैसे अपना वजूद बचा पाई है। महाराष्ट्र देश का एकमात्र बडा राज्य था, जहां कांग्रेस शरद पवार की राश्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के साथ सता में थे मगर यह राज्य भी पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के हाथ से फिसल गया। हाल ही में अरुणाचल प्रदेश में पार्टी के बागियों ने भाजपा के साथ मिलकर कांग्रेस की लुटिया डूबो दी और कांग्रेस सता से बाहर हो गई। और अब केरल भी कांग्रेस के हाथ से फिसल रहा है। केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी सोलर घोटाले में उलझे हुए हैं और विपक्ष सडकों पर प्रदर्शन करके कांग्रेस नीत गठबंधन सरकार के नाको दम किए हुए हैं। चांडी से पहले हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह भी आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में फंसे हुए हैं। अप्रैल में केरल विधानसभा के लिए चुनाव कराए जाने हैं। सोलर स्कैम के आरोपी मुख्यमंत्री ओमन चांडी को शुक्रवार को उच्च न्यायालय से थोडी राहत तो मिली मगर इससे चांडी की छवि निखरने से रही। त्रिशुर स्थित अदालत ने वीरवार को मुख्यमंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किए थे। जाहिर है अदालत को मामले में प्रथम दृश्ट्या “दाल में कुछ काला“ नजर आया होगा, इसीलिए मामले का संज्ञान लिया गया । केरल उच्च न्यायालय ने फिलहाल दो माह के लिए अदालती आदेश पर रोक लगा दी है। सौर्य उर्जा घोटाले में मुख्यमंत्री ओमन चांडी पर 7 करोड की घूस मांगने का आरोप है। घोटाले की मुख्य आरोपी सरिता नायर ने वीरवार को फिर आरोप लगाया कि वे मुख्यमंत्री के विश्वास पात्र को 1 करोड 90 लाख दे भी चुकी है। सरिता नायर न्यायिक आयोग के समक्ष भी यही आरोप दोहरा चुकी है। चांडी भी न्यायिक आयोग के समक्ष पेष हो चुके हैं। चांडी बतौर मुख्यमंत्री न्यायिक आयोग के समक्ष पेश होने वाले पहले मुख्यमंत्री हैं। सोलर स्केम का पर्दाफाश 2013 में हुआ था। सोलर एनर्जी नाम की एक फर्जी कंपनी ने मुख्यमंत्री से निकटता का हवाला देकर निवेशकों और लोगों से सोलर पावर यूनिट्स लगाने और उन्हें बिजनेस पार्टनर बनाने का लालच देकर 70 करोड रु से ज्यादा इक्ठठे किए थे। सरिता नायर अपने सहयोगी के साथ इस फर्जी कंपनी की मुख्य कर्ताधर्ता थी। मीडिया में सुर्खियां बटोरने और विश्वश्नीयता हासिल करने के लिए कंपनी ने राज्य की प्रमुख हस्तियों को “वर्जिन अर्थ गोल्डन फीदर एनवारमेंटल अवार्ड“ भी बांटे मगर जल्द ही इस स्केम का पर्दाफाश हो गया। इस पर मुख्यमंत्री ओमान चांडी के निजी सहायक और सरिता नायर समेत पांच लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। सरकार ने घोटाले की जांच के लिए उच्च न्यायालय के सेवा निवृत जज की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग का गठन कर रखा है। चांडी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निचली अदालती आदेश पर भले ही उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है मगर विपक्ष इसे चुनाव में जोर-शोर से उछालेगा। केरल में हर पांच साल बाद सरकार के बदलने की रिवायत रही है। इस बार कांग्रेस नीत यूडीएफ की सरकार है तो अगली बार माकपा नीत वामपंथी द्लों की सरकार का सत्ता में आना तय माना जा रहा है। 2014 के लोकसभा चुनाव में हालांकि कांग्रेस नीत यूडीएफ ने 20 मेंसे 12 सीटें जीती थीं मगर तब से अब तक परिस्थतियां काफी बदल गईं है। चांडी पर सोलर स्केम में कथित घूस लेने के आरोपों सेे पार्टी को और ज्यादा नुकसान उठाना पड सकता है।






