रविवार, 20 दिसंबर 2015

What If There Is Nuke War Between India, Pakistan

 अमेरिकी लॉमेकर फ्रेंक हॉफमेन ने भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध (न्यूक्लियर वॉर) की संभावनाओं की गुलाबी बगुले (पिंक फ्लेमिंगो) के साथ तुलना की है। जिस तरह बगला भक्त बनकर अपने शिकार से आंखमिचौली करता है, ठीक उसी तरह दुनिया में कई ऐसी घटनाएं होती हैं, जिनके घातक परिणाम जानते हुए भी इनकी बराबर उपेक्षा की जाती है। हॉफमेन का आकलन है कि भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध भी एक ऐसी अपरिहार्य संभावना है, जिसके घातक परिणाम जानते हुए भी दुनिया इससे अनजान बनी हुई है। दुनिया के अग्रणी एंटी न्यूक्लियर संगठन, इंटरनेशनल  फिजिशियंस फॉर दी प्रिवेनशन ऑफ न्यूक्लियर वार एंड फिजिशियंस फॉर सोशल रिस्पांसिबिलिटी  का आकलन है कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध होता है तो कम-से-कम दो अरब लोग बेमौत मारे जा सकते हैं। विकिरण (रेडिएशन) के प्रभाव के कारण दो करोड से ज्यादा लोग तत्काल मारे जाएंगें।  इससे भयंकर सूखा पड जाएगा।  सीमित परमाणु युद्ध की स्थिति में भी उपजाऊ धरती बंजर हो जाएगी, पर्यावरण बुरी तरह से प्रदूषित  हो जाएगा और पूरी दुनिया में खाद्यान्न का घोर संकट हो जाएगा। भारत-पाकिस्तान परमाणु युद्ध से चीन भी अछूता नहीं रहेगा और वहां भी  भुखमरी फैल जाएगी। इस संगठन का यह भी आकलन है कि भारत और पाकिस्तान के परमाणु युद्ध से अमेरिका भी प्रभावित होगा। वायुमंडल में ब्लैक कार्बन एरोसोल के कण फैलने से अमेरिका का कॉर्न और सोयाबीन उत्पादन 10 फीसदी घट जाएगा। चीन में धान का उत्पादन चार साल में ही 21 फीसदी घट जाएगा। परमाणु युद्ध के बाद पहले ही साल चीन में गेंहूं का उत्पादन 50 फीसदी तक गिर जाएगा। परमाणु युद्ध के और भी कई घातक परिणाम भुगतने पडेंगे और इस बार का न्यूक्लियर वार जापान के हीरोशिमा एटम बम के दुष्परिणामों  से भी कहीं अधिक तबाही लाएगा। हॉफ्मेन इस बात से चिंतित हैं कि सब कुछ जानते हुए भी दुनिया भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध को रोकने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं कर रही है।  अमेरिका के पाकिस्तान-अफगानिस्तान विशेष  प्रतिनिधि रिचर्ड ओल्सन ने भी इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि दक्षिण-पष्चिम एशिया का पारंपारिक संघर्ष  बढते-बढते परमाणु युद्ध में भी बदल सकता है।  सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि पाकिस्तान में कटटरपंथी नेता के सत्ता में आने की स्थिति में परमाणु युद्ध का खतरा और ज्यादा बढ जाता है। मध्य-पूर्व  एशिया  में इस्लामिक स्टेट के बढते प्रभाव से स्थिति और ज्यादा चिंताजनक है। अब सवाल यह है कि इस युद्ध को रोका कैसे जाए?  पाकिस्तान की तुलना में भारत काफी बडा मुल्क है और इसके पास सैन्य शक्ति भी कहीं ज्यादा है। इस स्थिति से पाकिस्तान अब तक हमेशा  खौफजदा रहा है. पर न्यूक्लियर वेपन्स के ईजाद होने के बाद से स्थिति बदल गई है  और पाकिस्तान  जानता है कि  अगला युद्ध कन्वेंशनल  क़ी बजाय  न्यूक्लियर होगा ।  इसीलिए, भारत का मुकाबला करने के लिए पाकिस्तान  दनादन परमाणु हथियार और मिसाइलें बना रहा है। सामरिक रणनीति भी यही कहती है कि भारत के बराबर परमाणु हथियारों से लैस होकर ही पाकिस्तान उसका मुकाबला कर सकता है। पिछले कई सालों से पाकिस्तान यही कर रहा है। रक्षा विशेषज्ञों  का आकलन है कि भारत और पाकिस्तान दोनों के पास 100-100 के आसपास परमाणु अस्त्र-शस्त्र (वारहैडस) हैं। यानी परमाणु हथियारों के मामले में भारत और पाकिस्तान के बीच बराबर की टक्कर है। भारत और पाकिस्तान का अब तक तीन बार युद्ध में सामना हो चुका है। 1971 की हार को पाकिस्तान आज तक नहीं भुला पाया है। इस युद्ध के फलस्वरुप बांग्लादेश  पाकिस्तान से अलग हो गया था और लगभग 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सेना के समक्ष आत्म-समर्पण कर दिया था। भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध रोकने के लिए परमाणु अप्रसार संधि उपयोगी हो सकती थी मगर भारत और पाकिस्तान दोनों ने इस संधि को नहीं माना। इससे दोनों देशों  के बीच परमाणु युद्ध की संभावनाएं कहीं ज्यादा बढ़  जाती है। फिलहाल  तो  द्धिपक्षीय वार्ता ही इस खतरे को टाल सकती है।