कीर्ति आजाद की बगावत ?
"पुराना जुमला है, “घर का भेदी, लंका ढहाए“। भाजपा के सांसद कीर्ति आजाद की खुली बगावत पर यह जुमला सौ फीसदी मौजू होता है। कहां तो भाजपा दिल्ली सरकार के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजेन्द्र कुमार को घूसखोरी के मामले में बचाने के लिए अरविंद केजरीवाल एंड कंपनी को कटघरे में खडा करने की स्थिति में थी, कहां अब कीर्ति आजाद की बगावत से भाजपा खुद कटघरे में खडी हो गई है। भाजपा का अपना ही सांसद अगर दिल्ली एंड डिस्ट्रिक क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) में कथित अनियमितताओं के संगीन आरोप लगाता है, तो इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। आजाद लंबे समय तक क्रिकेट से जुडे रहे हैं और टीम इंडिया के अहम सदस्य भी रह चुके हैं। केन्द्र में भारी बहुमत से सत्ता में आने के बाद पिछले डेढ साल में तीसरी बार पार्टी के सांसद ने खुली बगावत की है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की चेतावनी को नजरादांज और पार्टी व्हिप का उल्लघंन करते हुए सांसद कीर्ति आजाद ने रविवार को दिल्ली क्रिकेट बॉडी में अनियमितताओं को लेकर वीडियो जारी किया और वित्त मंत्री अरुण जेटली का नाम लिए बगैर उन पर संगीन आरोप लगाए। अरुण जेटली 13 साल तक डीडीसीए के अध्यक्ष पद पर काबिज रहे हैं। कीर्ति आजाद का आरोप है कि 2008 से 2013 के बीच डीडीसीए में भारी अनियमितताएं हुईं हैं। इतना ही नहीं सोमवार को कीर्ति आजाद ने यह मामला लोकसभा में भी उठाया और भाजपा के वरिष्ठ नेता मूक श्रोता बने रहे। भाजपा के इतिहास में यह पहला मौका था जब पार्टी के सांसद ने अपने ही वरिष्ठ मंत्री पर सदन में निशाना साधा हो। सोमवार को कीर्ति आजाद ने अरुण जेटली को चुनौती तक दे डाली कि अगर उनमें हिम्मत है तो वे उन पर मानहानि का मुकदमा करें। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को डीडीसीए में कथित अनियमितताओं में उन्हें लपेटने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर अदालत में मानहानि का मुकदमा दायर किया। आजाद ने इसी मुकदमे का हवाला देकर जेटली को चुनौती दी है। भाजपा के सांसद द्वारा वित्त मंत्री पर आरोप लगाने से आम आदमी पार्टी का पक्ष खासा मजबूत हुआ है। कीर्ति आजाद के आरोपों के बाद “आप“ सीना ठोंक कर कह सकती है कि दिल्ली में क्रिकेट को लेकर कीर्ति आजाद ने जो चिंता व्यक्त की है, पार्टी भी वही कर रही थी। आजाद के आरोपों के बाद दिल्ली सरकार ने डीडीसीए की जांच के लिए गोपाल सुब्रण्यम की अध्यक्षता में आयोग भी गठित किया हैं। पिछले सप्ताह मंगलवार (15 दिसंबर) को सीबीआई द्वारा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कार्यालय में छापे की कार्रवाई के बाद से “आप“ ने भाजपा और वित्त मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। आप नेताओं ने भी कीर्ति आजाद की तर्ज पर डीडीसीए में अरुण जेटली के कार्यकाल के दौरान भारी अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। बहरहाल, कीर्ति आजाद की खुली बगावत भाजपा को महंगी पड सकती है। आजाद बिहार से भाजपा के सांसद हैं और पार्टी में खुली बगावत करने वाले तीसरे नेता हैं। बिहार के ही वरिष्ठ भाजपा नेता शत्रुघ्न सिंहा पहले ही बागी हो चुके हैं ओर जब-तब पार्टी की किरकरी करवाते रहते हैं। पार्टी के एक और सांसद और पूर्व केन्द्रीय गृह सचिव आर के सिंह भी बिहार चुनाव के दौरान बागी सुर अपना चुके हैं। नौकरशाह से सांसद बने सिंह बिहार चुनाव में पार्टी टिकटों को बेचने तक के संगीन आरोप लगा चुके हैं। आजाद को भाजपा में अरुण जेटली विरोधी गुट से संबंधित एक वरिष्ठ नेता का समर्थक माना जाता है। इस बात के दृष्टिगत माना यह जा रहा है को कीर्ति आजाद ने एक तीर से कई निशान साधे हैं। उन्होंने अरुण जेटली को लपेटा तो है मगर नाम लिए बगैर। डीडीसीए में अनियमितताओं की जांच की मांग करने पर पार्टी आसानी से उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी नही कर सकती। भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना अनुशासनहीनता नहीं मानी जा सकती। आजाद की बगावत से भाजपा के अनुशासन की कलई खोल दी है।
"पुराना जुमला है, “घर का भेदी, लंका ढहाए“। भाजपा के सांसद कीर्ति आजाद की खुली बगावत पर यह जुमला सौ फीसदी मौजू होता है। कहां तो भाजपा दिल्ली सरकार के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजेन्द्र कुमार को घूसखोरी के मामले में बचाने के लिए अरविंद केजरीवाल एंड कंपनी को कटघरे में खडा करने की स्थिति में थी, कहां अब कीर्ति आजाद की बगावत से भाजपा खुद कटघरे में खडी हो गई है। भाजपा का अपना ही सांसद अगर दिल्ली एंड डिस्ट्रिक क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) में कथित अनियमितताओं के संगीन आरोप लगाता है, तो इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। आजाद लंबे समय तक क्रिकेट से जुडे रहे हैं और टीम इंडिया के अहम सदस्य भी रह चुके हैं। केन्द्र में भारी बहुमत से सत्ता में आने के बाद पिछले डेढ साल में तीसरी बार पार्टी के सांसद ने खुली बगावत की है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की चेतावनी को नजरादांज और पार्टी व्हिप का उल्लघंन करते हुए सांसद कीर्ति आजाद ने रविवार को दिल्ली क्रिकेट बॉडी में अनियमितताओं को लेकर वीडियो जारी किया और वित्त मंत्री अरुण जेटली का नाम लिए बगैर उन पर संगीन आरोप लगाए। अरुण जेटली 13 साल तक डीडीसीए के अध्यक्ष पद पर काबिज रहे हैं। कीर्ति आजाद का आरोप है कि 2008 से 2013 के बीच डीडीसीए में भारी अनियमितताएं हुईं हैं। इतना ही नहीं सोमवार को कीर्ति आजाद ने यह मामला लोकसभा में भी उठाया और भाजपा के वरिष्ठ नेता मूक श्रोता बने रहे। भाजपा के इतिहास में यह पहला मौका था जब पार्टी के सांसद ने अपने ही वरिष्ठ मंत्री पर सदन में निशाना साधा हो। सोमवार को कीर्ति आजाद ने अरुण जेटली को चुनौती तक दे डाली कि अगर उनमें हिम्मत है तो वे उन पर मानहानि का मुकदमा करें। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को डीडीसीए में कथित अनियमितताओं में उन्हें लपेटने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर अदालत में मानहानि का मुकदमा दायर किया। आजाद ने इसी मुकदमे का हवाला देकर जेटली को चुनौती दी है। भाजपा के सांसद द्वारा वित्त मंत्री पर आरोप लगाने से आम आदमी पार्टी का पक्ष खासा मजबूत हुआ है। कीर्ति आजाद के आरोपों के बाद “आप“ सीना ठोंक कर कह सकती है कि दिल्ली में क्रिकेट को लेकर कीर्ति आजाद ने जो चिंता व्यक्त की है, पार्टी भी वही कर रही थी। आजाद के आरोपों के बाद दिल्ली सरकार ने डीडीसीए की जांच के लिए गोपाल सुब्रण्यम की अध्यक्षता में आयोग भी गठित किया हैं। पिछले सप्ताह मंगलवार (15 दिसंबर) को सीबीआई द्वारा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कार्यालय में छापे की कार्रवाई के बाद से “आप“ ने भाजपा और वित्त मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। आप नेताओं ने भी कीर्ति आजाद की तर्ज पर डीडीसीए में अरुण जेटली के कार्यकाल के दौरान भारी अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। बहरहाल, कीर्ति आजाद की खुली बगावत भाजपा को महंगी पड सकती है। आजाद बिहार से भाजपा के सांसद हैं और पार्टी में खुली बगावत करने वाले तीसरे नेता हैं। बिहार के ही वरिष्ठ भाजपा नेता शत्रुघ्न सिंहा पहले ही बागी हो चुके हैं ओर जब-तब पार्टी की किरकरी करवाते रहते हैं। पार्टी के एक और सांसद और पूर्व केन्द्रीय गृह सचिव आर के सिंह भी बिहार चुनाव के दौरान बागी सुर अपना चुके हैं। नौकरशाह से सांसद बने सिंह बिहार चुनाव में पार्टी टिकटों को बेचने तक के संगीन आरोप लगा चुके हैं। आजाद को भाजपा में अरुण जेटली विरोधी गुट से संबंधित एक वरिष्ठ नेता का समर्थक माना जाता है। इस बात के दृष्टिगत माना यह जा रहा है को कीर्ति आजाद ने एक तीर से कई निशान साधे हैं। उन्होंने अरुण जेटली को लपेटा तो है मगर नाम लिए बगैर। डीडीसीए में अनियमितताओं की जांच की मांग करने पर पार्टी आसानी से उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी नही कर सकती। भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना अनुशासनहीनता नहीं मानी जा सकती। आजाद की बगावत से भाजपा के अनुशासन की कलई खोल दी है।






