गुरुवार, 24 दिसंबर 2015

Sir, Why a Soldier's Family CriesEverytime? Mr. Rajnath Answer the Question

                                        सैनिक ही क्यों हों शहीद ?

“सर, हर बार  सैनिकों के परिजनों को ही क्यों रोना  पडता है? बुधवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह से जब सीमा सुरक्षा बल विमान हादसे में  शहीद हुए एसआई रवीन्द्र कुमार की बेटी ने यह सवाल किया, वे जबाव नहीं दे पाए। मगर जनमानस जबाव मांगता है।  देश  के लिए सैनिकों और सुरक्षा बलों को ही क्यों कुर्बानियां देनी पडती है?  यह प्रश्न  वाकई अहम है कि जिस तरह बडी-बडी और अति विशिष्ठ   हस्तियों के विमानों की  तकनीकी  सुरक्षा और रख-रखाव का  विशेष  ख्याल रखा जाता है, सुरक्षा बलों का क्यों नहीं? और यह सवाल भी जबाव मांगता है कि देश  में अति विशिष्ठ  व्यक्तियों की तरह सैनिकों को भी क्यों वैसा ही मान-सम्मान नहीं दिया जाता?  सच्चाई यह है कि देश  को सियासी नेताओं की अपेक्षा सैनिकों की कहीं ज्यादा जरुरत होती है। दिल्ली में मंगलवार को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ)  का विमान उडान भरते ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया और इसमें सवार सभी दस जवान मारे गए। 10 सदस्यीय  टीम विमान से रांची में खराब पडे हेलीकॉप्टर की मरम्मत करने जा रही थी। और यह बीएसएफ के सैनिकों की बहादुरी का जज्बा ही था कि शहीद होते-होते भी उन्होंने कई लोगों को बचाने के लिए अपनी जान की कुर्बानी दे दी। तकनीकी खराबी का पता चलते ही पायलट ने तीन बार दिशा  बदली और अततः इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट  की दीवार से टकराकर शहादत पा ली। विमान 22 साल पुराना था। पायलट ने विमान की हालात देखकर उडान भरने से मना कर दिया था। पर देश  में चूंकि इस तरह की बातों पर ध्यान न देकर जुगाड भिडाने की रिवायत है, लिहाजा पायलट को तकनीक तौर पर खराब विमान को उडाने को कहा गया। विमान को बीएसएफ के डिप्टी कमांडेट पायलट भगवती प्रसाद भट्ट सहायक पायलट राजेश  शयोरण  के साथ चला रहे थे। वैसे  बी 200 सुपर एयरक्राफ्ट  दुनिया में बेहतरीन विमान माना जाता है। विश्व  विख्यात अमेरिकिी स्पेस एजेंसी नासा भी इस विमान को छोटे-मोटे कार्यों के लिए उपयोग करती है। बी 200 सुपर एयरक्राफ्ट छोटा विमान है जिसमें पायलट और को-पायलट के अलावा 11 लोगों के बैठने की क्षमता होती है। विख्यात विमान निर्माता कंपनी बीचक्राफ्ट ने नब्बे के दशक में 200 एवं 300 सीरिज के “सुपर किंग“ विमान बनाए और बेचे। 1996 में कंपनी ने अपने मॉडल से “सुपर“ को ड्राप कर दिया। इसके बद विमान की तकनीक में काफी बदलाव भी आया। इस विमान की सुरक्षित उडान आयु 20 से 25 साल मानी जाती है और अगर रखरखाव उम्दा है तो यह 30 से 35 साल तक आराम से उडान भर सकता है। बीएसएफ का विमान इतना भी पुराना नहीं कि उडान ही न भर सके। बीएसएफ के महानिदेषक डीके पाठक के मुताबिक  बी 200 एयरक्राफ्ट कम-से-कम 40-45 साल तक आराम से उडानें भरता है। मगर रिकार्ड  इस बात की गवाही नहीं देता।  बीएसएफ के हाल ही में संपन्न सम्मेलन के दौरान  इसी विमान ने कई बार सुरक्षित उडानें भरीं थी। बहरहाल, विमान हादसे रोकना किसी के वश  में नहीं है मगर एहतियातन कदम उठाए जा  सकते हैं। भारतीय वायु सेना के मिग एयरक्राफट तो जैसे हादसों के लिए जाने जाते हैं जबकि एक जमाने में मिग बेहतरीन लडाकू जहाज माने जाते थे।  2013 और 2014 के दौरान ही पांच मिग विमान हादसे हुए और इनमें 25 लोग मारे गए। जून 2013 में उतराखंड की प्रलंयकारी बाढ के दौरान मिग-17 वी5 के दुघर्टना ग्रस्त होने पर 20 लोग मारे गए थे। कहते हैं “मशीनरी कभी भी धोखा दे सकती है"। बस, सजग रहने की जरुरत होती है। बीएसएफ के दुर्घटनाग्रस्त विमान के मामले में भी यही हुआ। तकनीकी खराबी के बावजूद पायलट को उडान भरने के लिए कहना भयंकर गलती थी। इस गलती के कारण दस जानें चलीं गईं और दस परिवार बेसहारा हो गए। जवानों को मौत के मुंह में धकेलने के लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।