जेटली को क्लीन चिट
दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) में कथित अनियमितताओं के लिए ”आम आदमी पार्टी“ सरकार की जांच समिति द्वारा केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को कलीन चिट दिए जाने से मुख्यंत्री अरविंद केजरीवाल एंड कंपनी की खासी फजीहत हुई है। मुख्यमंत्री की प्रतिकिया से ही साफ पता चलता है कि केजरीवाल इस रिपोर्ट से किस कद्र हतप्रत हैं। केजरीवाल ने रिपोर्ट पर कुछ कहने की बजाय मीडिया घरानों पर आरोप जड दिए कि वे जेटली को निर्दोष साबित करने के लिए जमीन-आसमान एक कर रहे हैं। मुददा यह है कि डीडीसीए में व्याप्त अनियमितताओं के लिए बतौर अध्यक्ष अरुण जेटली जिम्मेदार हैं या नहीं? जांच रिपोर्ट ने साफ-साफ तो नहीं कहा मगर वित्त मंत्री अरुण जेटली का नाम न लेकर इशारा किया है “नहीं है“। आम आदमी पार्टी का इस रिपोर्ट से खिसखिसयाना स्वभाविक है। दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने बडे जोश -ए-खरोश से सतर्कता विभाग के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में डीडीसीए में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए समिति का गठन किया था। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आप के वरिश्ठ नेता डीडीसीए के अध्यक्ष रहे अरुण जेटली के कार्यकाल के दौरान भारी अनियमिताओं के गंभीर आरोप लगा चुके हैं। अरुण जेटली 13 साल तक डीडीसीए के अध्यक्ष रह चुके हैं। केजरीवाल ने यह आरोप भी लगाया था कि सीबीआई ने हाल ही में उनके कार्यालय पर डीडीसीए से संबंधित रिकार्ड खंगालने की मंशा से ही छापा मारा था। इन्हीं आरोपों के चलते वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दिल्ली के मुख्यंत्री अरुण केजरीवाल और “आप“ के पांच वरिष्ठ नेताओं पर दिल्ली की अदालत में 10 करोड रु मानहानि का दावा भी दायर किया है। सांसद और क्रिकेटर कीर्ति आजाद भी डीडीसीए में भारी अनिमितताओं के आरोप लगा चुके हैं और इसके लिए उन्हें पार्टी से निलंबित भी कर दिया गया है। आजाद ने अनियमितताओं के सबूत भी पेश किए थे और वीडियो भी जारी किया था। दिल्ली सरकार की जांच समिति की रिपोर्ट ने वित्त मंत्री अरुण जेटली का मानहानि का दावा पुख्ता कर दिया है। इस रिपोर्ट के बाद केजरीवाल एंड कंपनी अब यह भी कह नहीं सकते कि जांच समिति पर दबाव डाला गया। हैरानी इस बात की है कि दिल्ली सरकार की जांच समिति ने बीसीसीआई से डीडीसीए को निलंबित करने की सिफारिष की है। समिति ने बीसीसीआई की इस बात के लिए भी तीखी आलोचना की है कि उसने समय रहते डीडीसीए कौ कार्यशैली को सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए। समिति ने दिल्ली सरकार को यह सलाह भी दी है कि डीडीसीए को सुधारने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त जस्टिस लोढा समिति की सिफारिषें लागू की जानी चाहिए। कुल मिलाकर समिति ने माना है कि डीडीसीए में सब कुछ ठीकठाक नहीं है मगर अरुण जेटली के कार्यकाल पर समिति ने एक शब्द भी नहीं लिखा है। पूरी दुनिया जानती है कि डीडीसीए में किस कद्र भ्रश्टाचार व्याप्त है। डीडीसीए को लेकर जब-तब घोटाला-दर-घोटाले का पर्दाफाश होता रहा है। इतना होने के बावजूद अरुण जेटली पर कभी भी अगुंली नहीं उठाई गई। दरअसल, जेटली के बतौर डीडीसीए अध्यक्ष कार्यकाल के दौरान कथित अनियमितताओं के आरोपों की पृश्ठभूमि में “बदले की भावना“ काम कर रही है। मुख्यमंत्री के कार्यालय पर सीबीआई छापे से तिलमिलाए केजरीवाल और आप नेताओं ने आनन-फानन में डीडीसीए को लेकर वित्त मंत्री अरुण जेटली पर हमला बोल दिया । अरुण जेटली पेशे से वकील हैं और ऐसे मामलों से कैसे निपटा जाता है, बखूबी जानते हैं। जेटली का राजनीतिक कैरियर भी एकदम साफ है। वे छात्र राजनीति से बढते-बढते राजनीति के शिखर पर पहुंचे हैं। दिल्ली के विवादास्पद आईएएस अधिकारी प्रधान सचिव राजेन्द्र कुमार प्रकरण में केजरीवाल पहले ही अपने हाथ जला चुके हैं। अब अरुण जेटली के मामले में भी उन्हें मुंह की खानी पड सकती है।
दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) में कथित अनियमितताओं के लिए ”आम आदमी पार्टी“ सरकार की जांच समिति द्वारा केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को कलीन चिट दिए जाने से मुख्यंत्री अरविंद केजरीवाल एंड कंपनी की खासी फजीहत हुई है। मुख्यमंत्री की प्रतिकिया से ही साफ पता चलता है कि केजरीवाल इस रिपोर्ट से किस कद्र हतप्रत हैं। केजरीवाल ने रिपोर्ट पर कुछ कहने की बजाय मीडिया घरानों पर आरोप जड दिए कि वे जेटली को निर्दोष साबित करने के लिए जमीन-आसमान एक कर रहे हैं। मुददा यह है कि डीडीसीए में व्याप्त अनियमितताओं के लिए बतौर अध्यक्ष अरुण जेटली जिम्मेदार हैं या नहीं? जांच रिपोर्ट ने साफ-साफ तो नहीं कहा मगर वित्त मंत्री अरुण जेटली का नाम न लेकर इशारा किया है “नहीं है“। आम आदमी पार्टी का इस रिपोर्ट से खिसखिसयाना स्वभाविक है। दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने बडे जोश -ए-खरोश से सतर्कता विभाग के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में डीडीसीए में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए समिति का गठन किया था। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आप के वरिश्ठ नेता डीडीसीए के अध्यक्ष रहे अरुण जेटली के कार्यकाल के दौरान भारी अनियमिताओं के गंभीर आरोप लगा चुके हैं। अरुण जेटली 13 साल तक डीडीसीए के अध्यक्ष रह चुके हैं। केजरीवाल ने यह आरोप भी लगाया था कि सीबीआई ने हाल ही में उनके कार्यालय पर डीडीसीए से संबंधित रिकार्ड खंगालने की मंशा से ही छापा मारा था। इन्हीं आरोपों के चलते वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दिल्ली के मुख्यंत्री अरुण केजरीवाल और “आप“ के पांच वरिष्ठ नेताओं पर दिल्ली की अदालत में 10 करोड रु मानहानि का दावा भी दायर किया है। सांसद और क्रिकेटर कीर्ति आजाद भी डीडीसीए में भारी अनिमितताओं के आरोप लगा चुके हैं और इसके लिए उन्हें पार्टी से निलंबित भी कर दिया गया है। आजाद ने अनियमितताओं के सबूत भी पेश किए थे और वीडियो भी जारी किया था। दिल्ली सरकार की जांच समिति की रिपोर्ट ने वित्त मंत्री अरुण जेटली का मानहानि का दावा पुख्ता कर दिया है। इस रिपोर्ट के बाद केजरीवाल एंड कंपनी अब यह भी कह नहीं सकते कि जांच समिति पर दबाव डाला गया। हैरानी इस बात की है कि दिल्ली सरकार की जांच समिति ने बीसीसीआई से डीडीसीए को निलंबित करने की सिफारिष की है। समिति ने बीसीसीआई की इस बात के लिए भी तीखी आलोचना की है कि उसने समय रहते डीडीसीए कौ कार्यशैली को सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए। समिति ने दिल्ली सरकार को यह सलाह भी दी है कि डीडीसीए को सुधारने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त जस्टिस लोढा समिति की सिफारिषें लागू की जानी चाहिए। कुल मिलाकर समिति ने माना है कि डीडीसीए में सब कुछ ठीकठाक नहीं है मगर अरुण जेटली के कार्यकाल पर समिति ने एक शब्द भी नहीं लिखा है। पूरी दुनिया जानती है कि डीडीसीए में किस कद्र भ्रश्टाचार व्याप्त है। डीडीसीए को लेकर जब-तब घोटाला-दर-घोटाले का पर्दाफाश होता रहा है। इतना होने के बावजूद अरुण जेटली पर कभी भी अगुंली नहीं उठाई गई। दरअसल, जेटली के बतौर डीडीसीए अध्यक्ष कार्यकाल के दौरान कथित अनियमितताओं के आरोपों की पृश्ठभूमि में “बदले की भावना“ काम कर रही है। मुख्यमंत्री के कार्यालय पर सीबीआई छापे से तिलमिलाए केजरीवाल और आप नेताओं ने आनन-फानन में डीडीसीए को लेकर वित्त मंत्री अरुण जेटली पर हमला बोल दिया । अरुण जेटली पेशे से वकील हैं और ऐसे मामलों से कैसे निपटा जाता है, बखूबी जानते हैं। जेटली का राजनीतिक कैरियर भी एकदम साफ है। वे छात्र राजनीति से बढते-बढते राजनीति के शिखर पर पहुंचे हैं। दिल्ली के विवादास्पद आईएएस अधिकारी प्रधान सचिव राजेन्द्र कुमार प्रकरण में केजरीवाल पहले ही अपने हाथ जला चुके हैं। अब अरुण जेटली के मामले में भी उन्हें मुंह की खानी पड सकती है।






