शनिवार, 26 दिसंबर 2015

Prime Minister Modi's "Master Stroke'

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का शुक्रवार को काबुल से लौटते समय अचानक पाकिस्तान के ऐतिहासिक शहर लाहौर रुकना और नवाज शरीफ से मिलना कूटनीति में उनका मास्टर स्ट्रोक है। माना यह परंपरा से हटकर है पर यह बात भी सच है कि दोस्ताना संबंध परंपरा से हटकर ही बनाए जाते हैं। भारतीय प्रधानमंत्री के बगैर औपचारिक कार्यक्रम के लाहौर पहुंचने पर पाकिस्तान भी हतप्रत रह गया। किसी को मोदी के इस तरह अचानक आने की कतई उम्मीद नहीं थी। अमूमन, राश्ट्राध्यक्ष इस तरह अचानक यात्रा नहीं करता। प्रधानमंत्री मोदी का पहले से कोई तय कार्यक्रम नहीं था। शुक्रवार को सुबह ही लाहौर जाने का कार्यक्रम बना। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ  का जन्मदिन था और मोदी बधाई  देने पंहुच गए। शुक्रवार को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में भारत के सहयोग से निर्मित अफगानिस्तानी संसद भवन का उदघाटन करने रुस से लौटते समय मोदी  कुछ देर के लिए वहां रुके थे। अफगानिस्तान के साथ भारत के अंतरंग संबंध रहे हैं और इस देश के पुनर्निर्माण में भारत की अहम भूमिका रही है। पाकिस्तान अफगानिस्तान में भारत के बढते दखल से खासा परेशान रहा है और इसे कम करने के लिए तालिबान की मदद भी करता रहा है। अफगानिस्तान को लेकर भी भारत और पाकिस्तान में टकराव की स्थिति रही है। पिछले कुछ समय से पाकिस्तान और भारत के बीच जिस तरह रिश्तों  में कडुवाहट आई  है, उसके दृष्टिगत  अचानक लाहौर रुकना तो क्या, अगले साल (2016) में पाकिस्तान में होने वाले सार्क सम्मेलन में भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अधिकृत यात्रा को लेकर अभी  एक असमंजस की  स्थिति  है।  मोदी सरकार पाकिस्तान को दो टूक शब्दों में साफ-साफ कह चुकी  है कि जब तक पाकिस्तान  कश्मीर  में आतंकी और अलगाववादियों को पालना-पोसना बंद नहीं  करता है, तब तक दोनों पडोसी देशों  के द्धिपक्षीय संबंध सामान्य हो ही नहीं सकते। तथापि, हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में व्याप्त  शिथिलता की बर्फ को पिघलाने के लिए कुछ पहल हुई है। इसी माह पेरिस में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात हुई थी और द्धिपक्षीय संबंधों को सुधारने के लिए जमीन तैयार की गई थी।  इसी माह के पहले सप्ताह 7 दिसंबर को भारत और पाकिस्तान के राष्ट्रीय  सुरक्षा सलाहकारों की बैॅकॉक में वार्ता  हुई। इसके तुरंत बाद विदेश  मंत्री सुषमा  स्वराज पाकिस्तान के दौरे पर गईं औरं प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात की। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगले साल सार्क सम्मेलन के लिए पाकिस्तान यात्रा का खाका तैयार किया गया। पाकिस्तान 2016 में सार्क सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। भारत सार्क का नेतृत्व कर रहा है और अगर प्रधानमंत्री मोदी इस सम्मेलन में नहीं जाते हैं तो पाकिस्तान की खासी किरकिरी हो सकती है। बहरहाल, शुक्रवार को अचानक अफगानिस्तान से लौटते समय लाहौर पहुंचकर भारतीय प्रधानमंत्री ने द्धिपक्षीय संबंधों को नई दिशा  देने का प्रयास किया है। मोदी की इस यात्रा ने पाकिस्तान को यह संदेश  भी दिया है कि “अगर पाकिस्तान दोस्ती का एक कदम आगे बढाता है, भारत दो कदम बढाएगा”। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ मोदी को  लाहौर के निकट अपने पैतृक गांव ले गए और वहां उनकी खूब खातिरदारी की। दोनों में कई अहम मुद्दों पर भी बातचीत हुई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अचानक लाहौर यात्रा पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कांग्रेस का कहना है कि यह भी कोई सलीका हुआ कि प्रधानमंत्री टहलते-टहलते लाहौर पहुंच जाएं और किसी को इसकी कानो-कान खबर तक न हो। कांग्रेस का तिलमिलाना स्वभाविक है। जो काम कांग्रेस सालों नहीं कर पाई, मोदी ने कुछ माह में कर दिखाया है। प्रधानमंत्री मोदी और उनकी पार्टी की “भगवा छवि“ को लेकर पाकिस्तान हमेशा  सशंकित रहा है। इसके बावजूद अगर प्रधानमंत्री पाकिस्तान के साथ द्धिपक्षीय संबंध बेहतर बनाने के लिए हर मुमकिन प्रयास करते हैं, तो इसमें हर्ज ही क्या है। अफगानिस्तान से लौटते समय प्रधानमंत्री ने लाहौर रुक कर द्धिपक्षीय संबंधों को सुधारने की सुखद पहल की है। उनका यह साहसिक कदम  न केवल  साहसिक है, बाल्कि ऐतिहासिक भी है।