गुरुवार, 31 दिसंबर 2015

ISI And India

                                           आईएसआई के नापाक इरादे

पाकिस्तान की कुख्यात इंटेलीजेस एजेंसी -आईएसआई (इंटर सर्विस इंटेलीजेंस)-   के जासूसों की गिफ्तारियों से भारतीय सुरक्षा एजेंसियां का चिंतित होना स्वभाविक है। चिंता इस बात की है हाल ही में आईएसआई के स्थानीय जासूसों की एक के बाद एक गिरफ्तारी हो रही है। सोमवार को दिल्ली पुलिस ने पंजाब के बठिंडा से एक और आईएसआई जासूस को गिरफ्तार किया। पंजाब पुलिस को न तो आईएसआई के लिए जासूसी करने वाले इस देशद्रोही की गतिविधियों की कोई भनक थी और न ही उसकी गिरफ्तारी की। केरल का रहने वाला यह आईएसआई जासूस भारतीय वायु सेना का बर्खास्त अफसर है। बर्खास्तगी से पहले वह  बठिंडा में तैनात था। आईएसआई के हनी ट्रैप में फंसकर रंजीत कुमार आईएसआई को गोपनीय सूचनाएं पहुंचा रहा था। फेसबुक के जरिए अपने प्रेम जाल में फंसाकर आईएसआई से सम्बंद्ध महिला रंजीत कुमार से ई-मेल से सूचनाएं ले रही थी। यह महिला हनी ट्रैप के जरिए ही बीएसएफ और आर्मी के अफसरों को भी फंसा चुकी है।  फेसबुक पर दामिनि मेकनॉट नाम के प्रोफाइल में खुद को ब्रिटिश  पत्रकार बताकर महिला खुफिया जानकारियां हासिल कर रही थी। खुफिया एजेंसियों को यह भी पता चला है कि पाकिस्तान स्थित आईएसआई के बहावलपुर कार्यालय में जासूसी का काल सेंटर है और यही से भारत के लिए जासूसी का नेटवर्क  काम कर रहा है। हैरानी इस बात की है कि सेना के अफसर पूरी तरह प्रशिक्षित होने के बावजूद अनजान काल्स ले रहे थे जबकि सेना ने उन्हें ऐसा नहीं करने के निर्देश  दे रखे हैं।  भारतीय इंटेलीजेंसी एजेंसियों को संदेह है कि रंजीत कुमार की तरह महिला के हनी ट्रैप में सेना के और अफसर  भी जुडे हो सकते हैं। जासूसी रैकेट में अब तक सेना और बीएसएफ के एक-एक अफसर समेत पांच  लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। नवंबर में दिल्ली पुलिस सेना के एक हवलदार को आईएसआई के लिए जासूसी करने पर गिरफ्तार कर चुकी है। इसी तरह जम्मू-कष्मीर से सेना के एक रिटायर्ड  जवान और एक अध्यापक को जासूसी के लिए गिरफ्तार किया जा चुका है। जासूसों की गिरफ्तारी कोई नई बात नहीं है। आईएसआई पाकिस्तान की अग्रणी सैन्य (मिलट्री) संचालित इंटेलीजेंस एजेंसी है और सेना के लिए दुश्मनो  की सैन्य शक्ति और महत्वपूर्ण ठिकानों की जानकारियां जुटाना इसका काम है। अपने काम को अंजाम देने के लिए आईएसअ्ाई ही नहीं, सभी खुफिया एजेंसियां “साम, दाम, दंड, भेद“ की नीति अपनाकर स्थानीय जासूस तैयार करती है। जम्मू-कश्मीर  के अलगावादियों में आईएसआई का व्यापक नेटवर्क है। गत रविवार को हैदराबाद में पकडे गए इस्लामिक स्टेट में भर्ती होने जा रहे तीन युवकों ने पूछताछ में कश्मीरी  अलगाववादी और आईएसआई की करीबी आसिया अंद्राबी के संपर्क में रहने की बात कबूली है। आसिया अंद्राबी कश्मीर में पाकिस्तान की प्रबल समर्थक है। वे हमेशा भारत के खिलाफ आग उगलती रहती हैं। हैदराबादी तीनों युवक सीरिया जाने के लिए आसिया अंद्राबी की मदद लेना चाहते थे। पुलिस अब इस बात की छानबीन कर रही है कि कहीं अंद्राबी का जाल कश्मीर  से हैदराबाद तक तो नहीं फैला है? पुलिस को सूचना मिली है कि आसिया अंद्राबी हैदराबाद की कई बार यात्रा कर चुकी है। बहरहाल, कश्मीर  में आतंक फैलाने और आतंकियों को प्रशि क्षित करने में आईएसआई की अग्रणी भूमिका रही है। 1990 में लीबिया से 50 आतंकी ट्रेनर्स  को कश्मीर  लाकर आईएसआई ने आतंक का ताडंव  शुरु क्या किया, भारत आज तक इसे नेस्तानाबूद नहीं कर पाया है। जानकारी अनुसार आईएसआई अब तक कश्मीर  में आतंक फैलाने के लिए 200 से ज्यादा ट्रेनिंग कैंप लगाा चुका है और 50,000 से ज्यादा आतंकियों को प्रशिक्षित कर चुका है। आईएसााई के पास फंड की कोई कमी नहीं है। इस एजेंसी को बाहर से भी खासी मदद मिल रही है। भारत के लिए यही सबसे बडा खतरा है।