बुधवार, 9 दिसंबर 2015

India Registers Historical Series Win vs South Africa

                                      भारत की    शानदार जीत

“शुक्र है पिच को लेकर कोई भी बात नहीं कर रहा है, यहां तक कि दक्षिण अफ्रीका का अंतिम बल्लेबाज भी सीधी गेंद पर आउट हुआ (थैंक गॉड, नो वन इज टाल्किंग अबॉउट  दी पिच, ईवन लास्ट  साऊथ अफ्रीकन बेटसमैन गोट आउट टू ए स्ट्रैट बाल“, महान बल्लेबाज और कमेंटेटर   सुनील गावस्कर ने दिल्ली में चौथे टेस्ट में भारत की  शानदार जीत पर यह प्रतिकिया व्यक्त की। क्रिकेट में हारने वाली टीम का पिच को दोषी ठहराना कोई नई बात नहीं है। भारत ने इस बार दुनिया की नंबर वन टेस्ट टीम दक्षिण अफ्रीका को हराकर नया इतिहास रचा है। और जीत भी ऐसी कि दक्षिण अफ्रीका चार टेस्ट मैचों की श्रृंखला में एक भी जीत नहीं पाया। यानी कि कलीन स्वीप। कहते हैं “ खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे“। हार की खीज मिटाने के लिए दक्षिण अफ्रीका के क्रिकेट एक्सपर्ट्स  की फिरकी गेंदबाजी फ्रेंडली पिच को दोषी  मान रहे हैं।  जिस टीम में एबी डिविलियर्स, हाशिम मला, डू प्लेसिस और डुमिनी जैसे नामी-गिरामी बल्लेबाज हों, वह इतनी बुरी  तरह से हार जाए, इस पर सहज में विश्वास  नही होता। और-तो-और टेस्ट खेलने के माहिर माने जाने वाले कप्तान हाशिम अमला भी नहीं चले।  जिस बल्लेबाज की  टेस्ट  कैरियर बैटिंग औसत 50. 64 और स्ट्राइकिंग औसत 77 के करीब रही हो, वह अगर दिल्ली जैसी पिच पर 11.11 की स्ट्राइकिंग औसत से बल्लेबाजी करे, तो हैरानी तो होगी ही। मगर नागपुर को छोड दिया जाए तो मोहाली और दिल्ली की पिचों पर भी दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाज रन नहीं बना पाए। भारत के कप्तान विराट कोहली और दक्षिण अफ्रीका के कप्तान हाशिम अमला दोनों ने माना था कि मोहाली की पिच खेलनेयोग्य (प्लेबल) थी। दिल्ली टेस्ट में तो अमला ने टेस्ट मैच पारी के इतिहास में 200 गेंदों में मात्र  11.11 की औसत से रन बनाकर  टेस्ट इतिहास में एक नया रिकार्ड  बनाया है। और भी कई रिकार्ड  टूटे। 75 ओवर में मात्र 75 रन और वह भी तब जब क्रीज पर डिलिलियर्स  और अमला जैसे धुरंधर बल्लेबाज खेल रहे हों। दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाजों की कछुआ चाल रनों के लिए धीमी पिच को दोषी  नहीं माना जा सकता। इसी पिच पर भारत के बल्लेबाज अजिंके रहाणे ने पहली बारी में चार छक्कों के साथ 127 और दूसरी पारी में तीन छक्कों के साथ नाबाद 100 रन बनाए। रहाणे दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दोनों पारियों में शतक जडने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज भी हैं। इससे साफ है कि फिरोजशाह कोटला की पिच में कोई दोष  नहीं था। इस मामले में दक्षिण अफ्रीका के कोच  रसल डोमिंगो की प्रशंसा की जानी चाहिए कि उन्होंने पिच को दोषी ठहराने की बजाय अपने बल्लेबाजों की खराब तकनीक, अप्रोच और अनुभवहीनता को हार के लिए ज्यादा जिम्मेदार माना। और सच भी यही है। मैच हार जाने के बाद पिच को दोषी  नहीं ठहराया जा सकता। मैच से पहले टीम के कप्तान और कोच पिच का मुआयना करते हैं। पिच पर बाल टर्न करेगी या नहीं, इस बात का कुछ-न-कुछ अनुमान लग ही जाता है। नागपुर की पिच पर पहले ही दिन से बाल बाउंस कर रहा था। पिच पर सीम और अनइवननैस भी बहुत ज्यादा थी मगर दोनों टीमों ने इसे झेला। अगर भारतीय फिरकी गेंदबाजों को पिच से मदद मिल रही थी, तो यह दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों के लिए भी मदद कर रही थी। क्रिकेट में लेवल प्लेइंग फील्ड होती है। बहरहाल, इन्हीं पिचों पर दक्षिण अफ्रीका ने भारत को टी20 और एक दिवसीय श्रंृखला में हराया है। टेस्ट मैच तक दक्षिण अफ्रीका टीम पूरे आत्मविश्वास  से उतरी तो सही  मगर पहला टेस्ट हारते ही उसका आत्म-विश्वास   डोल गया। दक्षिण अफ्रीकी खिलाडियों को इस बात की कल्पना तक नहीं थी कि भारत टेस्ट में उन्हें हरा देगी। वे इस हार से उबर ही नहीं पाए और भारतीय गेंदबाजों के आगे ढेर हो गए।