न्यायपालिका पर भरोसा रखे
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी को नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र के मामले में दिल्ली की एक अदालत ने अब 19 दिसंबर को हाजिर होने का कहा है। दिल्ली स्थित पटियाला हाउस कोर्ट ने पहले उन्हें मंगलवार (8 दिसंबर) को अदालत में हाजिर होने को कहा था। मगर मंगलवार को कोई भी आरोपी पेश नहीं हुआ। राहुल गांधी तमिल नाडु में बाढ का जायजा लेने चेन्नई गए हुए थे। सोनिया गांधी ससद सत्र में व्यस्त थीं। मामले के एक अन्य आरोपी सैम पित्रोदा लंदन में थे और अगर कोई दिल्ली में था भी, तो भी अदालत में पेश नहीं हुआ। इन तीनों के अलावा कांग्रेस के वयोवृद्ध नेता मोती लाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडिस और पत्रकार सुमन दुबे भी नेशनल हेराल्ड मामले में आरोपी हैं। आरोपियों के वकील मनु सिघंवी ने अदालत को बताया कि सभी हाजिर होने को तैयार हैं। अदालत ने आरोपियों को मंगलवार की पेशी से छूट देते हुए, अब 19 दिसंबर को तलब किया है। मामला अदालत में है मगर इसकी गूंज संसद में सुनाई दे रही है। कांग्रेस ने मोदी सरकार पर “प्रतिशोधात्मक कार्रवाई“ का आरोप लगाते हुए मंगलवार को संसद नहीं चलने दी और बुधवार को भी। कांग्रेस ने जीएसटी बिल को समर्थन नहीं देने की धमकी भी दी है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने यहां तक कह दिया कि वे इंदिरा गांधी की बहू हैं, किसी से डरती नहीं हैं“। हंगामे की वजह से मंगलवार को तीन बार लोकसभा और पांच बार राज्यसभा की कार्यवाही को स्थगित करना पडा। बुधवार को दोनों सदनों में कांग्रेस ने नेशनल हेराल्ड मामले को लेकर जमकर हंगामा किया। तृणमूल कांग्रेस ने लोकसभा में कांग्रेस का साथ दिया। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साफ शब्दों में कहा कि समन अदालत ने जारी किए हैं , सरकार ने नहीं। कांग्रेस अगर सदन में इस पर बहस करानी चाहती है, सरकार तैयार है। बुधवार को भी इस मामले में आरोप-प्रत्यारोप के दौरे चलते रहे। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी दहाडे “ मामला सौ फीसदी पॉलिटिक्ल है। यह पूरी तरह से बदले की कार्रवाई है और सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय से आदेश जारी हुए हैं। राहुल के जवाब में भाजपा के प्रवक्ता राजीव प्रताप रूढी ने कहा कि अगर राहुल में दम है तो संसद में प्रमाण देकर खुद को निर्दोष साबित करें। केन्द्रीय मंत्री वैंकेया नाडु ने तो सीधे-सीधे कांगेस पर “संसद के माध्यम से न्यायपालिका“ को डराने का आरोप जड दिया। बहरहाल, कांग्रेस ने पूरे मामले को राजनीतिक रंग दे दिया है। इससे लग रहा है कि कांग्रेस को यह मामला परेशान कर रहा है। इस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी और अन्य पर आरोप हैं कि इन सभी ने आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले चर्चित समाचार पत्र नेशनल हेराल्ड की संपति को अवैध तरीके से हडप लिया। इस मामले में भारतीय जनता पार्टी के नेता सुब्रह्यण्यम स्वामी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और न्यायालय ने प्रथम दृष्टया आरोपों को ठोस माना है। मामले को रुकवाने के लिए कांग्रेस दिल्ली उच्च न्यायालय भी गई मगर वहां से उसे कोई राहत नहीं मिली। मामला भाजपा नेता सुब्रह्यण्यम स्वामी ने चलाया है, इसलिए कांग्रेस इसे “प्रतिशोधात्मक कार्रवाई“ बता रही है। स्वामी न हाल ही में राहुल गांधी पर ब्रिटिश नागरिकता होने के प्रमाण भी दिए थे और उनकी संसद सदस्यता को निरस्त करने की मांग भी की थी। हिमाचल प्रदेश के कांग्रेसी मुख्यमंत्री के खिलाफ सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई को भी राजनीति से प्रेरित“ माना जा रहा है। राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ भी जांच की जा रही है। इस बात को दुनिया जानती है कि सीबीआई “सरकार का तोता है“ और प्रवर्तन निदेशालय भी सरकार के इशारे पर काम करता है। इस बात के दृष्टिगत कांग्रेस को नेशनल हेराल्ड मामले में “ राजनीतिक प्रतिशोध“ की बू आ रही है मगर मामला अदालत में है, इसलिए कांग्रेस के आरोपों में दम नहीं लगता है। देश की न्यायपालिका की निष्पक्षता पर जनमानस को आज भी पूरा भरोसा है। कांग्रेस को न्यायपालिका पर भरोसा होना चाहिए। सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत अन्य कांग्रेसी नेता अगर नेशनल हेराल्ड मामले में निर्दोष हैं , तो फिर डर काहे का। सरकार राजनीतिक बदले की भावना से काम कर सकती है, न्यायपालिका नहीॅ।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी को नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र के मामले में दिल्ली की एक अदालत ने अब 19 दिसंबर को हाजिर होने का कहा है। दिल्ली स्थित पटियाला हाउस कोर्ट ने पहले उन्हें मंगलवार (8 दिसंबर) को अदालत में हाजिर होने को कहा था। मगर मंगलवार को कोई भी आरोपी पेश नहीं हुआ। राहुल गांधी तमिल नाडु में बाढ का जायजा लेने चेन्नई गए हुए थे। सोनिया गांधी ससद सत्र में व्यस्त थीं। मामले के एक अन्य आरोपी सैम पित्रोदा लंदन में थे और अगर कोई दिल्ली में था भी, तो भी अदालत में पेश नहीं हुआ। इन तीनों के अलावा कांग्रेस के वयोवृद्ध नेता मोती लाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडिस और पत्रकार सुमन दुबे भी नेशनल हेराल्ड मामले में आरोपी हैं। आरोपियों के वकील मनु सिघंवी ने अदालत को बताया कि सभी हाजिर होने को तैयार हैं। अदालत ने आरोपियों को मंगलवार की पेशी से छूट देते हुए, अब 19 दिसंबर को तलब किया है। मामला अदालत में है मगर इसकी गूंज संसद में सुनाई दे रही है। कांग्रेस ने मोदी सरकार पर “प्रतिशोधात्मक कार्रवाई“ का आरोप लगाते हुए मंगलवार को संसद नहीं चलने दी और बुधवार को भी। कांग्रेस ने जीएसटी बिल को समर्थन नहीं देने की धमकी भी दी है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने यहां तक कह दिया कि वे इंदिरा गांधी की बहू हैं, किसी से डरती नहीं हैं“। हंगामे की वजह से मंगलवार को तीन बार लोकसभा और पांच बार राज्यसभा की कार्यवाही को स्थगित करना पडा। बुधवार को दोनों सदनों में कांग्रेस ने नेशनल हेराल्ड मामले को लेकर जमकर हंगामा किया। तृणमूल कांग्रेस ने लोकसभा में कांग्रेस का साथ दिया। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साफ शब्दों में कहा कि समन अदालत ने जारी किए हैं , सरकार ने नहीं। कांग्रेस अगर सदन में इस पर बहस करानी चाहती है, सरकार तैयार है। बुधवार को भी इस मामले में आरोप-प्रत्यारोप के दौरे चलते रहे। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी दहाडे “ मामला सौ फीसदी पॉलिटिक्ल है। यह पूरी तरह से बदले की कार्रवाई है और सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय से आदेश जारी हुए हैं। राहुल के जवाब में भाजपा के प्रवक्ता राजीव प्रताप रूढी ने कहा कि अगर राहुल में दम है तो संसद में प्रमाण देकर खुद को निर्दोष साबित करें। केन्द्रीय मंत्री वैंकेया नाडु ने तो सीधे-सीधे कांगेस पर “संसद के माध्यम से न्यायपालिका“ को डराने का आरोप जड दिया। बहरहाल, कांग्रेस ने पूरे मामले को राजनीतिक रंग दे दिया है। इससे लग रहा है कि कांग्रेस को यह मामला परेशान कर रहा है। इस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी और अन्य पर आरोप हैं कि इन सभी ने आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले चर्चित समाचार पत्र नेशनल हेराल्ड की संपति को अवैध तरीके से हडप लिया। इस मामले में भारतीय जनता पार्टी के नेता सुब्रह्यण्यम स्वामी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और न्यायालय ने प्रथम दृष्टया आरोपों को ठोस माना है। मामले को रुकवाने के लिए कांग्रेस दिल्ली उच्च न्यायालय भी गई मगर वहां से उसे कोई राहत नहीं मिली। मामला भाजपा नेता सुब्रह्यण्यम स्वामी ने चलाया है, इसलिए कांग्रेस इसे “प्रतिशोधात्मक कार्रवाई“ बता रही है। स्वामी न हाल ही में राहुल गांधी पर ब्रिटिश नागरिकता होने के प्रमाण भी दिए थे और उनकी संसद सदस्यता को निरस्त करने की मांग भी की थी। हिमाचल प्रदेश के कांग्रेसी मुख्यमंत्री के खिलाफ सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई को भी राजनीति से प्रेरित“ माना जा रहा है। राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ भी जांच की जा रही है। इस बात को दुनिया जानती है कि सीबीआई “सरकार का तोता है“ और प्रवर्तन निदेशालय भी सरकार के इशारे पर काम करता है। इस बात के दृष्टिगत कांग्रेस को नेशनल हेराल्ड मामले में “ राजनीतिक प्रतिशोध“ की बू आ रही है मगर मामला अदालत में है, इसलिए कांग्रेस के आरोपों में दम नहीं लगता है। देश की न्यायपालिका की निष्पक्षता पर जनमानस को आज भी पूरा भरोसा है। कांग्रेस को न्यायपालिका पर भरोसा होना चाहिए। सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत अन्य कांग्रेसी नेता अगर नेशनल हेराल्ड मामले में निर्दोष हैं , तो फिर डर काहे का। सरकार राजनीतिक बदले की भावना से काम कर सकती है, न्यायपालिका नहीॅ।






