चित भी मेरी, पट भी
असहिष्णुता को लेकर न तो भगवा पार्टी के नेताओं का आग उगलना बंद हो रहा है और न ही इसके खिलाफ “सम्मान वापसी" का सिलसिला। असहिष्णुता के माहौल से क्षुब्ध वीरवार को देश के जाने-माने 24 फिल्म निर्माताओं ने अपने पुरुस्कार लौटा दिए। विख्यात लेखक और सोशल एक्टिविस्ट अरुंधति रॉय ने भी यह कहकर अपना अवार्ड लौटा दिया है कि “अगर अब खडे न हुए तो दफना दिए जाएंगे। अब तक 50 से ज्यादा लेखक, कलाकर, और शि क्षाशास्त्री असहिष्णुता के विरोध में अपने अवार्ड लौटा चुके हैं। भगवा पार्टी और उनके समर्थकों का आरोप है कि विरोध करने वाले कट्टर भाजपा विरोधी हैं और मई 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पार्टी को मिली चुनावी विजय को आज तक पचा नहीं पाए हैं। भगवा पार्टी इस मामले में अपनी जगह सही हो सकती मगर सत्ता के नशे में चूर भाजपा को अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का आकलन भी भेदभावपूर्ण नजर आ रहा है। पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय रेंटिग एजेंसी मूडी एनेलिटिकल ने मोदी सरकार को चेताया था कि “असहिष्णुता“ के माहौल से भारत की रेटिंग और अंतरराष्ट्रीय क्रेडिबिलिटी खराब हो सकती है। इस रेटिंग एजेंसी ने प्रधानमंत्री को आग उगलने वाले भाजपाइयों पर लगाम लगाने की सलाह दी है। भाजपा और मोदी सरकार को यह बात भी नागवार गुजरी। बुधवार को प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान में मूडी एनेलिटिकल के आकलन को लेकर मीडिया में प्रकाषित समाचारों को गैर-जिम्मेदाराना बताया गया और कहा गया कि तथ्य तोड-मरोड कर पेश किए गए हैं। पीएमओ का स्पष्टीकरण था कि यह आकलन रेटिंग एजेंसी का न होकर मूडी एनेलिटिकल के एक अर्थशास्त्री का व्यक्तिगत है। जबकि सच्चाई यह है कि मूडी का यह अधिकृत आकलन था। यानी “चित भी मेरी और पट भी“। अगर मूडी एनेलिटिकल मोदी सरकार की नीतियों की तारीफ करता है तो आकलन उम्दा है, नहीं तो व्यक्तिगत । असहिष्णुता के मामले में प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की चुप्पी ने उतेेजक बयान देने वाले नेताओं को और ज्यादा शह दी है। यही वजह है कि भगवा वस्त्रधारी अल्पसंख्यकों के खिलाफ बेलगाम आग उगल रहे हैं। बुधवार को भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ ने बालीवुड अभिनेता शाहरुख खान की लश्कर -ए-तैयबा के आतंकी हाफिज सईद से तुलना करके हद कर दी। देश का लॉमेकर अगर इस तरह की अनर्गल शब्दों का प्रयोग करे तो साफ है असहिष्णुता चरम पर है। आदित्यनाथ से पहले भाजपा के महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने किंग खान के खिलाफ इस कद्र आग उगली कि भाजपा को उनके वक्तव्य से किनारा करना पडा। शाहरुख खान के खिलाफ उतेजक बयानों से क्षुब्ध अभिनेता अनुपम खेर ने भाजपाइयों को जुबान पर काबू पाने की नसीहत दी है। अनुपम खेर की पत्नी किरण खेर चंडीगढ से भाजपा सांसद है। असहिष्णुता के खिलाफ खडे होने वाले मोदी और भाजपा विरोधी हो सकते हैं, मगर भाजपा सांसद के पति विरोधियों की भाषा नहीं बोल सकते। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कई बार कह चुके हैं कि देश को आलतु-फालतू बातों और खामख्वाह के मुद्दे उछाल कर समय नहीं गंवाना चाहिए। यह बात सौ फीसदी सच है। पूरी दुनिया मान रही है कि भारत जल्द ही ग्रोथ के मामले में चीन को पीछे छोड देगा। इसकी प्रमुख वजह यह है कि अगले दस वर्षों में भारत दुनिया का युवातम देश बन जाएगा और तब तक चीन की आबादी अपेक्षाकृत बूढी हो जाएगी। इसी युवातम श्रमशक्ति और प्रतियोगी अर्थव्यवस्था के बलबूते भारत चीन की तुलना में तेजी से आगे बढ सकता है। यह तभी संभव है जब देश में माहौल ग्रोथ फ्रेंडली हो और समाज का हर तबका और नागरिक अपनी पूरी क्षमता से काम करें। तेज ग्रोथ के लिए यह भी जरुरी है देश में हर हाथ को सृजनात्मक काम मिले और सभी साथ-साथ मिलकर काम करें। दुखद स्थिति यह है कि भारत में 50 फीसदी से ज्यादा श्रम शक्ति व्यर्थ के प्रयोजनों पर जाया की जाती है। मौजूदा हालात भी यही कह रहै हैं कि भगवा एजेंडे को लागू करने के चक्कर में भाजपाई उभरती श्रमशक्ति को जाया करने पर आमादा है।
असहिष्णुता को लेकर न तो भगवा पार्टी के नेताओं का आग उगलना बंद हो रहा है और न ही इसके खिलाफ “सम्मान वापसी" का सिलसिला। असहिष्णुता के माहौल से क्षुब्ध वीरवार को देश के जाने-माने 24 फिल्म निर्माताओं ने अपने पुरुस्कार लौटा दिए। विख्यात लेखक और सोशल एक्टिविस्ट अरुंधति रॉय ने भी यह कहकर अपना अवार्ड लौटा दिया है कि “अगर अब खडे न हुए तो दफना दिए जाएंगे। अब तक 50 से ज्यादा लेखक, कलाकर, और शि क्षाशास्त्री असहिष्णुता के विरोध में अपने अवार्ड लौटा चुके हैं। भगवा पार्टी और उनके समर्थकों का आरोप है कि विरोध करने वाले कट्टर भाजपा विरोधी हैं और मई 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पार्टी को मिली चुनावी विजय को आज तक पचा नहीं पाए हैं। भगवा पार्टी इस मामले में अपनी जगह सही हो सकती मगर सत्ता के नशे में चूर भाजपा को अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का आकलन भी भेदभावपूर्ण नजर आ रहा है। पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय रेंटिग एजेंसी मूडी एनेलिटिकल ने मोदी सरकार को चेताया था कि “असहिष्णुता“ के माहौल से भारत की रेटिंग और अंतरराष्ट्रीय क्रेडिबिलिटी खराब हो सकती है। इस रेटिंग एजेंसी ने प्रधानमंत्री को आग उगलने वाले भाजपाइयों पर लगाम लगाने की सलाह दी है। भाजपा और मोदी सरकार को यह बात भी नागवार गुजरी। बुधवार को प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान में मूडी एनेलिटिकल के आकलन को लेकर मीडिया में प्रकाषित समाचारों को गैर-जिम्मेदाराना बताया गया और कहा गया कि तथ्य तोड-मरोड कर पेश किए गए हैं। पीएमओ का स्पष्टीकरण था कि यह आकलन रेटिंग एजेंसी का न होकर मूडी एनेलिटिकल के एक अर्थशास्त्री का व्यक्तिगत है। जबकि सच्चाई यह है कि मूडी का यह अधिकृत आकलन था। यानी “चित भी मेरी और पट भी“। अगर मूडी एनेलिटिकल मोदी सरकार की नीतियों की तारीफ करता है तो आकलन उम्दा है, नहीं तो व्यक्तिगत । असहिष्णुता के मामले में प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की चुप्पी ने उतेेजक बयान देने वाले नेताओं को और ज्यादा शह दी है। यही वजह है कि भगवा वस्त्रधारी अल्पसंख्यकों के खिलाफ बेलगाम आग उगल रहे हैं। बुधवार को भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ ने बालीवुड अभिनेता शाहरुख खान की लश्कर -ए-तैयबा के आतंकी हाफिज सईद से तुलना करके हद कर दी। देश का लॉमेकर अगर इस तरह की अनर्गल शब्दों का प्रयोग करे तो साफ है असहिष्णुता चरम पर है। आदित्यनाथ से पहले भाजपा के महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने किंग खान के खिलाफ इस कद्र आग उगली कि भाजपा को उनके वक्तव्य से किनारा करना पडा। शाहरुख खान के खिलाफ उतेजक बयानों से क्षुब्ध अभिनेता अनुपम खेर ने भाजपाइयों को जुबान पर काबू पाने की नसीहत दी है। अनुपम खेर की पत्नी किरण खेर चंडीगढ से भाजपा सांसद है। असहिष्णुता के खिलाफ खडे होने वाले मोदी और भाजपा विरोधी हो सकते हैं, मगर भाजपा सांसद के पति विरोधियों की भाषा नहीं बोल सकते। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कई बार कह चुके हैं कि देश को आलतु-फालतू बातों और खामख्वाह के मुद्दे उछाल कर समय नहीं गंवाना चाहिए। यह बात सौ फीसदी सच है। पूरी दुनिया मान रही है कि भारत जल्द ही ग्रोथ के मामले में चीन को पीछे छोड देगा। इसकी प्रमुख वजह यह है कि अगले दस वर्षों में भारत दुनिया का युवातम देश बन जाएगा और तब तक चीन की आबादी अपेक्षाकृत बूढी हो जाएगी। इसी युवातम श्रमशक्ति और प्रतियोगी अर्थव्यवस्था के बलबूते भारत चीन की तुलना में तेजी से आगे बढ सकता है। यह तभी संभव है जब देश में माहौल ग्रोथ फ्रेंडली हो और समाज का हर तबका और नागरिक अपनी पूरी क्षमता से काम करें। तेज ग्रोथ के लिए यह भी जरुरी है देश में हर हाथ को सृजनात्मक काम मिले और सभी साथ-साथ मिलकर काम करें। दुखद स्थिति यह है कि भारत में 50 फीसदी से ज्यादा श्रम शक्ति व्यर्थ के प्रयोजनों पर जाया की जाती है। मौजूदा हालात भी यही कह रहै हैं कि भगवा एजेंडे को लागू करने के चक्कर में भाजपाई उभरती श्रमशक्ति को जाया करने पर आमादा है।






