सोने की चमक-दमक
गोल्ड का आयात रोकने और घरों-मंदिरों में रखे सोने को उपयोगी बनाने के लिए मोदी सरकार ने वीरवार को तीन योजनाएं शुरु कीं जिनसे सोने को नगदी में बदला जा सकता है। घर में पडा-पडा सोना अनुपयोगी होता है। वैसे भी देश में त्योहारों और शादी-ब्याह जैसे समारोहों पर गहने पहनने का रिवाज है। आगे-पीछे सोने के आभूषणों का कोई उपयोग नहीं होता है और गहनों को संभालने की चिंता अलग से रहती है। बैंक लॉकर्स में आभूषण रखने के लिए किराया देना पडता है। लोगों के पास घर में रखे सोने के गहनों से आमदन लेने का चूंकि कोई विकल्प ही नहीं था, लिहाजा मोदी सरकार ने लोगों को सोने से कमाई करने का अवसर दिया है। अनुमान है देश में करीब 52 लाख करोड रु मूल्य का 20 हजार टन से ज्यादा सोना घरों-मंदिरों में सहेज कर रखा गया है। सरकार इस सोने को बाहर निकालना चाहती है। इससे सोना का आयात भी कम होगा और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहा बोझ भी घट जाएगा। दुनिया में सोना आयात करने वाला भारत सबसे बडा देश है। 2013 में सोने का आयात बढने से देश के चालू खाते का घाटा 190 अरब डॉलर (12350 करोड रु) तक पहुंच गया था और सरकार को सोने के आयात पर 10 फीसदी शुल्क लगाना पडा था। अधिकृत आंकडे बताते हैं कि व्यापार घाटे में 30 फीसदी सोने के आयात का हाथ रहता है। वीरवार को ”गोल्ड मॉनेटाइजेशन, गोल्ड कॉइन और गोल्ड सोवरेन बॉड स्कीमें लांच करते समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गोल्ड बॉड की खूबियां गिनाईं। गोल्ड बांड ऐसी स्कीम है जो आदमी के हर आपात स्थिति में काम आ सकती है। सोना आधी रात को नहीं बिकता मगर गोल्ड बांड बेचा जा सकता है। इलाज के लिए अगर आधी रात को पैसे की जरुरत है तो डाक्टर अथवा अस्पताल इसे हाथों -हाथ ले लेगा। चोर इसे कागज का टुकडा समझ कर नहीं ले जाएगा। गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम के तहत हर साल 2.5 फीसदी तक ब्याज मिल सकता है। कम-से-कम एक साल के लिए न्यूनतम 30 ग्राम सोना ही जमा कराया जा सकता है। गोल्ड सोवरेन बांड पर 2.75 फीसदी ब्याज मिलेगा. इसके लिए 20 नवंबर तक आवेदन किया जा सकता है। 26 नवंबर से आठ साल के लिए बांड जारी किए जाएंगें। शुरुआती कीमत 2,684 रु प्रति ग्राम रखी गई है। कम-से-कम दो ग्राम और साल में अधिकतम 500 ग्राम (आधा किलो) सोने पर निवेश किया जा सकता है। गोल्ड कॉइन स्कीम के तहत शुरु में 5 से 10 ग्राम के सिक्के और 20 ग्राम का गोल्ड बार जारी किए जाएंगें। शुद्धता की गारंटी होने पर यह स्कीम ज्यादा लोकप्रिय हो सकती है। इन तीनों योजनाएं की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आम आदमी इन योजनाओं को कैसे लेता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन स्कींमों पर कोई बहुत ज्यादा रिटर्न नहीं है। इससे कहीं ज्यादा ब्याज बैंक फिक्सड डिपॉजिट पर दे रहे हैं। अगर सोने के आभूषणों को बेचने से कमाई ही करनी है, तो इन्हें बेचकर फिक्सड डिपॉजिट अथवा अन्य आकर्षक विक्लपों में निवेश किया जा सकता है। इसके अलावा न्यूनतम 30 ग्राम की शर्त लगाकर सरकार ने निचले तबकों को बाहर कर दिया है। यही वह तबका है जिसे हर स्त्रोत से आय की सबसे ज्यादा जरुरत रहती है। सोने में काला धन लगाने वालों को आयकर विभाग का भय सता सकता है। सरकार की स्वेच्छा से काला धन घोषित करने वाली नीति को भी बहुत ज्यादा रिसपांस नहीं मिला था। इन स्कीमों से सरकार और बैंको को ही ज्यादा फायदा होगा। स्कीम के तहत गहनों को गलाने का खर्चा आवेदक को खुद उठाना पडेगा। जाहिर है , इस स्थिति में गहनों की मात्रा 20 से 30 फीसदी घट सकती है। इससे योजना का लाभ काफी कम हो जाएगा। अधिकतम ब्याज 2.75 फीसदी ही मिलेगा भले ही स्कीम की मैच्युरिटी के समय सोना कितना भी महंगा क्यों न हो। बहरहाल, सरकार का मकसद अगर अनुपयोगी सोने को बाहर निकलना है और आयात को कम करना है, तो लोगों को आकर्षक स्कींमें देनी होंगी जिनसे वास्तव में आम आदमी को ज्यादा से ज्यादा कमाई हो। ग्रामीण क्षेत्रों के घरों और घरों -मदिरों से सोना बाहर तभी निकल सकता है, जब सोने की चमक से ज्यादा ब्याज की दमक हो।
गोल्ड का आयात रोकने और घरों-मंदिरों में रखे सोने को उपयोगी बनाने के लिए मोदी सरकार ने वीरवार को तीन योजनाएं शुरु कीं जिनसे सोने को नगदी में बदला जा सकता है। घर में पडा-पडा सोना अनुपयोगी होता है। वैसे भी देश में त्योहारों और शादी-ब्याह जैसे समारोहों पर गहने पहनने का रिवाज है। आगे-पीछे सोने के आभूषणों का कोई उपयोग नहीं होता है और गहनों को संभालने की चिंता अलग से रहती है। बैंक लॉकर्स में आभूषण रखने के लिए किराया देना पडता है। लोगों के पास घर में रखे सोने के गहनों से आमदन लेने का चूंकि कोई विकल्प ही नहीं था, लिहाजा मोदी सरकार ने लोगों को सोने से कमाई करने का अवसर दिया है। अनुमान है देश में करीब 52 लाख करोड रु मूल्य का 20 हजार टन से ज्यादा सोना घरों-मंदिरों में सहेज कर रखा गया है। सरकार इस सोने को बाहर निकालना चाहती है। इससे सोना का आयात भी कम होगा और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहा बोझ भी घट जाएगा। दुनिया में सोना आयात करने वाला भारत सबसे बडा देश है। 2013 में सोने का आयात बढने से देश के चालू खाते का घाटा 190 अरब डॉलर (12350 करोड रु) तक पहुंच गया था और सरकार को सोने के आयात पर 10 फीसदी शुल्क लगाना पडा था। अधिकृत आंकडे बताते हैं कि व्यापार घाटे में 30 फीसदी सोने के आयात का हाथ रहता है। वीरवार को ”गोल्ड मॉनेटाइजेशन, गोल्ड कॉइन और गोल्ड सोवरेन बॉड स्कीमें लांच करते समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गोल्ड बॉड की खूबियां गिनाईं। गोल्ड बांड ऐसी स्कीम है जो आदमी के हर आपात स्थिति में काम आ सकती है। सोना आधी रात को नहीं बिकता मगर गोल्ड बांड बेचा जा सकता है। इलाज के लिए अगर आधी रात को पैसे की जरुरत है तो डाक्टर अथवा अस्पताल इसे हाथों -हाथ ले लेगा। चोर इसे कागज का टुकडा समझ कर नहीं ले जाएगा। गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम के तहत हर साल 2.5 फीसदी तक ब्याज मिल सकता है। कम-से-कम एक साल के लिए न्यूनतम 30 ग्राम सोना ही जमा कराया जा सकता है। गोल्ड सोवरेन बांड पर 2.75 फीसदी ब्याज मिलेगा. इसके लिए 20 नवंबर तक आवेदन किया जा सकता है। 26 नवंबर से आठ साल के लिए बांड जारी किए जाएंगें। शुरुआती कीमत 2,684 रु प्रति ग्राम रखी गई है। कम-से-कम दो ग्राम और साल में अधिकतम 500 ग्राम (आधा किलो) सोने पर निवेश किया जा सकता है। गोल्ड कॉइन स्कीम के तहत शुरु में 5 से 10 ग्राम के सिक्के और 20 ग्राम का गोल्ड बार जारी किए जाएंगें। शुद्धता की गारंटी होने पर यह स्कीम ज्यादा लोकप्रिय हो सकती है। इन तीनों योजनाएं की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आम आदमी इन योजनाओं को कैसे लेता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन स्कींमों पर कोई बहुत ज्यादा रिटर्न नहीं है। इससे कहीं ज्यादा ब्याज बैंक फिक्सड डिपॉजिट पर दे रहे हैं। अगर सोने के आभूषणों को बेचने से कमाई ही करनी है, तो इन्हें बेचकर फिक्सड डिपॉजिट अथवा अन्य आकर्षक विक्लपों में निवेश किया जा सकता है। इसके अलावा न्यूनतम 30 ग्राम की शर्त लगाकर सरकार ने निचले तबकों को बाहर कर दिया है। यही वह तबका है जिसे हर स्त्रोत से आय की सबसे ज्यादा जरुरत रहती है। सोने में काला धन लगाने वालों को आयकर विभाग का भय सता सकता है। सरकार की स्वेच्छा से काला धन घोषित करने वाली नीति को भी बहुत ज्यादा रिसपांस नहीं मिला था। इन स्कीमों से सरकार और बैंको को ही ज्यादा फायदा होगा। स्कीम के तहत गहनों को गलाने का खर्चा आवेदक को खुद उठाना पडेगा। जाहिर है , इस स्थिति में गहनों की मात्रा 20 से 30 फीसदी घट सकती है। इससे योजना का लाभ काफी कम हो जाएगा। अधिकतम ब्याज 2.75 फीसदी ही मिलेगा भले ही स्कीम की मैच्युरिटी के समय सोना कितना भी महंगा क्यों न हो। बहरहाल, सरकार का मकसद अगर अनुपयोगी सोने को बाहर निकलना है और आयात को कम करना है, तो लोगों को आकर्षक स्कींमें देनी होंगी जिनसे वास्तव में आम आदमी को ज्यादा से ज्यादा कमाई हो। ग्रामीण क्षेत्रों के घरों और घरों -मदिरों से सोना बाहर तभी निकल सकता है, जब सोने की चमक से ज्यादा ब्याज की दमक हो।






