यह असहिष्णुता नहीं तो और क्या ?
बालीवुड अभिनेता “मिस्टर परफेक्शनिस्ट “ आमिर खान ने असहिष्णुता पर अपने विचार व्यक्त क्या किए, मानो जैसे मुसीबत मोल ले ली । भााजपाइयों ने उन पर दुश्मन की तरह हमले बोल दिए हैं। भगवा पार्टी के कुछ नेता तो आमिर को पाकिस्तान चले जाने को कह चुके हैं। पार्टी के प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने यहां तक कह दिया है कि आमिर खान "डर नहीं रहे, बल्कि डरा रहे हैं“। हिंदू सेना के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को उनके घर पर प्रदर्शन किया। इसे क्या कहा जाए? लोकतांत्रिक व्यवस्था में भी अगर “अभिव्यक्ति की स्वत्रंत्रता न हो, तो यह किस काम की? आमिर खान ने सोमवार को दिल्ली के एक कार्यक्रम में सिर्फ इतना कहा कि देश में पिछले छह-सात महीने से डर का माहौल है और इससे भयभीत मेरी पत्नी किरण ने देश छोडकर जाने की बात भी कही थी। आमिर खान की पत्नी किरण हिंदू हैं और मुमकिन है भगवा पार्टी के लोगों को यही बात रास नहीं आ रही है। देश छोडने की बात किरण ने कही है, आमिर ने नहीं मगर भाजपा आमिर को ही निशाना बना रही है। माना आमिर ने मियां-बीवी की अंतरंग बातों को सार्वजनिक करके गलती की है मगर विचार व्यक्त करना कोई गुनाह नहीं है। आमिर खान मुस्लिम है, इसलिए भगवा पार्टी को उनके विचार नागवार गुजरे। आमिर खान को बालीवुड में सुघड और नपी-तुली बातें करने वाले अभिनेता माना जाता है। वे कम बोलते हैं और काम ज्यादा करते हैं। ऐसा कहने वाले आमिर खान पहले व्यक्ति नहीं है। असहिष्णुता को लेकर देश की कई नामी-गिरामी हस्तियां अपने मुक्त विचार व्यक्त कर चुकी है। यहां तक कि कई कलाकार, साहित्यकार-लेखक, इतिहासकार और बुद्धिजीवी विरोधस्वरुप अपने-अपने सम्मान तक लौटा चुके हैं। और यह पहला वाक्या भी नहीं है जब असहिष्णुता पर किसी ने कुछ कहा हो और भगवा पार्टी के लोग उसके पीछे हाथ धोकर न पडे हों। हर बार जब भी असहिष्णुता का मुखर विरोध किया जाता है, भगवा पार्टी इसे मोदी विरोध का ठप्पा लगा देते हैं। यानी मोदी राज में किसी ज्वलंत मुद्दे पर भी लोगों को अपने स्वतंत्र विचार व्यक्त करने का कोई अधिकार नहीं है। बकौल भगवा पार्टी ऐसा करने वाले या तो कांग्रेस के एजेंट हैं अथवा पाकिस्तान के मित्र। आजाद भारत में हर देशवासी को अपने विचार व्यक्त करने की छूट है और अपनी पसंद का खाना, पहनना और रहने की स्वंत्रतता। यह सब उनका संवैधानिक अधिकार है। संकीर्ण विचारधारा से ग्रस्त चंद लोग देशवासियों के मौलिक अधिकारों को छीन नहीं सकते। गोमांस सेवन के संदेहमात्र पर किसी की हत्या कर देना, रूढिवादी धार्मिक मान्यताओं और अंध-विश्वास के खिलाफ शाब्दिक अभिव्यक्ति के लिए लेखक की हत्या कर देना अथवा डराना-धमकाना, मुक्त विचार व्यक्त करने वालों को देशद्रोही बताना, इस तरह के माहौल को क्या माना जाए? यही असहिष्णुता का माहौल है और भगवा पार्टी के लोग इस तरह मे माहौल को बनाने में कोई कसर नहीं छौड रहे है। आमिर खान ने सत्य बोलकर कोई गुनाह नहीं किया है। सच्चाई हमेशा कडवी होती है। बुधवार को आमिर खान ने फिर दोहराया कि उन्होंने अपनी पत्नी के हवाले से सोमवार को जो कुछ भी कहा था, वह अक्षरश: सच है। उन्होंने यह भी कहा कि देश छोडकर जाने का कोई सवाल ही नहीं उठता। आमिर खान की इस बात में काफी वजन है कि उन पर हमला बोलने वाले यही प्रमाणित कर रहे हैं कि इस समय देश में असहिष्णुता का माहौल चरम पर है। आमिर खान को उनके फैन्स हीरो नंबर वन मानते हैं और वे वास्तव में हीरो हैं। भाजपाई उन्हें खलनायक साबित करने की लाख कोशिशें करे लें मगर हीरो हमेशा हीरो ही रहेगा। केवल हीरो ही असहिष्णुत के तल्ख माहौल में मुक्त विचार करने का मादा रख सकता है। आमिर खान अथवा असहिष्णुता के खिलाफ बोलने वाले का विरोध करके भाजपाई सिर्फ अपने “असहिष्णु" आचरण को उजागर कर रहे हैं। इससे पार्टी की लुटिया तो डुबोगी ही, प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी की छवि भी खराब हो सकती है। जनता सब देख रही है और समय आने पर माकूल जबाव भी देती है।






