बुधवार, 7 अक्टूबर 2015

Where Are We Going: Saffron Agenda Will Take Us to Nowhere

                                          कहां जा रहे हैं हम ?

जगतप्रसिद्ध ऐतिहासिक धार्मिक नगर वाराणसी में सोमवार को साधुओं की प्रतिकार रैली के दौरान भडकी हिंसा से देश  स्तब्ध है। ऋशि-मुनियों और तपस्वियों की तपोभूमि में साधु-संतों की रैली में हिंसा का भडकना शुभ संकेत नहीं है। उपद्रवियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठिया भांजनी पडी, अश्रू गैस और रबर बुलेट का इस्तेमाल करना पडा। यहां तक कि पांच थाना क्षेत्रों में कफर्यू  लगाना पडा। उपद्रव के 13 दिन पहले भी पुलिस को लाठीचार्ज  करना पडा था। सोमवार की प्रतिकार रैली इसी  लाठीचार्ज  के विरोध में निकाली गई थी। और यह सब इसलिए क्योंकि प्रशासन ने 21 सितंबर को गंगा में मूर्ति विसर्जन नहीं करने दी थी। हाई कोर्ट ने मूर्ति विर्सजन पर रोक लगा दी थी। इस रोक के बावजूद साधु-संत 23 सितंबर को मूर्ति विसर्जन  पर अडे रहे। इस पर पुलिस ने लाठियों से साधु-संतों को जमकर पीटा था । सोमवार की प्रतिकार रैली में देश  भर के साधु-संतों के अलावा साध्वी प्राची भी शरीक हुई। साध्वी ने ऐलान किया कि जब तक राज्य के मुख्यमंत्री अखिलेष यादव लाठीचार्ज के लिए साधु-संतों से माफी नहीं मांगते हैं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।  उत्तर प्रदेश  में समाजवादी पार्टी की सरकार है और अधिकांश  साधु-संत भारतीय जनता पार्टी के साथ हैं। साधु-संतों का आरोप है कि यह सब समाजवादी पार्टी सरकार का किया-धरा है। समाजवादी पार्टी को मुसलमानों का खैर-खवाह माना जाता है। भगवा पार्टी भाजपा हिंदुओं की संरक्षक है।  यानी पूरा मामला सियासी है। भगवा पार्टी मुसलमानों के खिलाफ आग उगल कर मतदाताओं का ध्रुवीकरण  कराने की फिराक में है। सवा साल बाद जनवरी-फरवरी 2017 में उत्तर प्रदेश  में विधानसभा चुनाव कराए जाने हैं।  भगवा पार्टी मुसलमानों के खिलाफ आग उगल कर मतदाताओं का ध्रुवीकरण  कराना  चाहती है। इसी ध्रुवीकरण ने भाजपा को लोकसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत दिया था। चुनाव नजदीक आते ही भगवा पार्टी और राष्ट्रीय  स्वंय सेवक से सम्बद्ध विश्व   हिन्दू  परिषद और बजरंग दल जैसे संगठन के वर्कर सक्रिय हो जाते हैं और मुसलमानों के खिलाफ आग उगलना  शुरु कर देते हैं। लोकसभा चुनाव से पहले यही सिलसिला देखा गया था। अगस्त सितंबर 2013 में उत्तर प्रदेश  के मुजफ्फरनगर में सांप्रदायिक दंगे फूटे थे। इन दंगों में 42 मुसलमान और 20 हिंदू मारे गए थे। तब बीस साल में पहली बार राज्य में सांप्रदायिक दंगे फूटने पर सेना को तैनात करना पडा था। भाजपा विधायक संगीत सोम को मुजफ्फरनगर दंगों में आरोपी भी बनाया गया था।  2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा मुजफ्फरनगर जिले की सभी सीटें जीत गई थीं और समाजवादी पार्टी को मुंह की खानी पडी थी। हाल ही में उतर राज्य के दिल्ली से सटे दादरी में एक मुसलमान की गौमांस खाने के संदेह पर उग्र लोगों ने हत्या कर दी थी। इस हत्या में भी भाजपा के सात नेताओं का नाम आया है। मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपी संगीत सोम ने दादरी हत्याकांड पर फिर विवादित बयान दिया है और इसके लिए उन पर कार्रवाई भी की जा सकती है। केन्द्र में भाजपा सरकार के आने के बाद से  भगवाकरण के निरंतर प्रयास हो रहे हैं। लोगों को क्या पहनाना है, खाना है, पढना अथवा देखना है, इस पर बंदिशें लगाईं जा रही हैं। भाजपा नीत सरकार चाहती है हम वही पढें और देखें जो मोदी सरकार हमें पढाना अथवा दिखाना चाहती है। इसी संदर्भ में देश  के बुद्धिजीवियों का मानना है कि प्रधानमंत्री का आकाशवाणी पर “मन की बात“ कार्यक्रम का मूल प्रयोजन भी यही है। साधु-संतों का आंदोलित होना हमारी सभ्यता के खिलाफ है। साधु-संत षांति और भाईचारे का अलख जगाते हैं। भारतीय समाज सहिष्णुता  की मजबूत नींव पर टिका है। इसे किसी भी सूरत में ध्वस्त नहीं किया जा सकता।