गुरुवार, 29 अक्टूबर 2015

Shame: Delhi Police Acting Like BJPSena

             
दिल्ली स्थित केरल सरकार के गेस्ट हाउस में मंगलवार को पुलिस का छापा बेहद निंदनीय है।  हिंदू सेना नाम के संगठन की केरल हाउस में गोमांस परोसने की  शिकायत पर  दिल्ली पुलिस ने ”आव देखा, न ताव”,  सरकारी गेस्ट हाउस पर कमर्शियल   होटल की तरह छापा मार दिया। केरल भवन के प्रबंधकों तक को सूचित नहीं किया गया। दिल्ली पुलिस के इस कथन में कोई वजन नहीं है कि किसी अप्रिय घटना के दृष्टिगत  यह कार्रवाई की गई। केरल भवन के रसोई घर में जाकर यह देखना कि क्या पकाया और सर्व  किया जा रहा है,पुलिस का काम नहीं है। अगर अप्रिय घटना टालना ही पुलिस का मकसद था, तो प्रबंधकों को विश्वास  में लेकर कार्रवाई की जा सकती थी। जाहिर है पुलिस का मकसद कानून-व्यवस्था को बनाए रखना नहीं था। केरल भवन ही नहीं, पूर्वोतर राज्यों के अन्य भवनों में भी “बीफ ( भैंस का मांस) मेन्यू में  शामिल किया जाता है और सालों से ऐसा हो रहा है। बुधवार को केरल भवन में “भैंस के मीट“ वाले व्यंजन 45 मिनट में खत्म हो गए। इन व्यंजनों को खाने वालों का केरल भवन में तांता लगा रहा। यह सब दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का नतीजा  है। मंगलवार को पहले केरल भवन ने “ बीफ“ को मेन्यू से हटा दिया था मगर बाद में इसे फिर शामिल कर लिया गया। इस स्थिति में दिल्ली पुलिस ने छापा मारकर सिर्फ  अपनी जगहंसाई की है। दिल्ली पुलिस चूंकि केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है, इसलिए इस मामले ने सियास रंग ले लिया है। केरल में कांग्रेस की सरकार है, इसीलिए पुलिस ने केरल भवन में छापामार कार्रवाई की। भाजपा शासित राज्य के दिल्ली स्थित भवन में पुलिस इस तरह की कार्रवाई का दुसाहस नहीं करती। कांग्रेस शासन में अगर दिल्ली पुलिस इस तरह की कार्रवाई करती, तो भाजपा  सिर पर आसमान उठा लेती। दिल्ली पुलिस  के मुखर आलोचक मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के इन आरोपों को बल मिलता है कि दिल्ली पुलिस “भाजपा सेना की तरह“ काम कर रही है। देेेश  की राजधानी होने के कारण दिल्ली में हर राज्य का अपना-अपना गेस्ट हाउस है और इनमें राज्य सरकार के वरिष्ठ  अधिकार भी में बैठते हैं। इन हालात में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को एहतिहातन  नहीं माना जा सकता। इससे यह आशंका भी बलवित होती है कि केन्द्र के इशारे पर दिल्ली पुलिस राज्य भवन से मुख्यमंत्री को भी गिरफ्तार करवा सकती है। हिमाचल प्रदेश  के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के संदर्भ में यह आशंका जाहिर की जा सकती है।  बतौर केन्द्रीय इस्पात मंत्री  कथित घूस लेने और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में  सीबीआई उनकी गिरफ्तारी की फिराक में है। सीबीआई  शिमला स्थित मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर छापा मार चुकी है। सीबीआई की इस कार्रवाई के समय वीरभद्र सिंह अपनी पुत्री के विवाह के सिलसिले में दिल्ली में थे। पहले शिमला में मुख्यमंत्री के आवास पर सीबीआई की कार्रवाई और अब दिल्ली में मात्र गोमांस परोसे जाने पर पुलिस की छापेमारी से यही संकेत मिलते हैं कि मोदी सरकार “बदले की भावना“ से काम कर रही है। राज्यों के दिल्ली स्थित भवनों में कौन-कौन से व्यंजन पकाएं जाएं, यह तय करना संबंधित भवन के प्रबंधक का काम है। भगवा संगठनों को इस बात से कोई सरोकार नहीं होना चाहिए और न ही पुलिस को। देश  के संविधान में हर नागरिक को अपनी पसंद का खाना (वह गोमांस ही क्यों न हो), पहनना और जीवनयापन करने का प्रदत अधिकार है। भगवा संगठन इन अधिकारों को चुनौती देकर देश  के संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर प्रहार करने की हिमाकत कर रहे हैं। इस तरह की हरकतें करके भगवा संगठन अपना असली “नादिरषाही“ चेहरा भी बेनकाब कर रहे हैं। मोदी सरकार के केन्द्र में सत्ता में आने पर अल्पसंख्यक पहले ही सहमे हुए थे। हाल ही की घटनाओं से अल्पसंख्यकों में दहश त व्याप्त है। इस तरह की हरकतें देश  की अखंडता को कमजोर करती हैं।  हाल ही की घटनाएं दर्शा  रही हैं कि सरकार का भगवा ब्रिगेड पर कोई नियंत्रण नहीं है। मोदी सरकार को अविलंब इसे रोकना होगा।