शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2015

Dadri Lynching: Mr. Modi, Stop Hatemongers of Your Party

                                               राजनीति का गंदा खेल

उत्तर प्रदेश  में  दादरी कांड पर पीडित परिवार के जख्मों पर महलम-पट्टी करने की बजाय सियासी दल सिर्फ  सियासत का खेल रहे हैं। 28 सितंबर की रात को दादरी के निकटवर्ती बिसहाडा गांव में एक मुस्लिम परिवार के  गोमांस सेवन की अफवाह पर कुछ लोगों ने 52-वर्षीय  मोहम्मद इखलाक की हत्या कर दी थी और उसके 22 वर्षीय   पुत्र को गंभीर रुप से जख्मी कर दिया था। बिसहाडा हत्याकांड से देश  में सांप्रदायिक सोहार्द की नाजुकता का पता चलता है।  मंदिर परिसर के पीए (पब्लिक अनाउसमेंट) सिस्टम से  सार्वजनिक अफवाह फैलाई जाती  है कि गांव के इखलाक परिवार ने गौहत्या करके ईद पर गोमांस का सेवन किया। इस अफवाह से क्षुब्ध कुछ लोग इखलाक परिवार के घर पर हमला कर देते हैं। मोहम्मद इखलाक को पीट-पीट कर मार दिया जाता है। उसके पुत्र को गंभीर रुप से घायल कर दिया जाता है। इखलाक की 82-वर्षीय वृद्ध मां और पत्नी को भी बख्शा  नहीं गया। पीडित परिवार के हिंदू पडोसी ने बीच-बचाव करने की बहुत कोशिश  की मगर वह इखलाक को बचा नहीं पाया। 70 साल से इखलाक परिवार बिसहाडा गांव में रह रहा है मगर कथित हिंदु धर्म  के कथित ठेकेदारों ने इस बात का भी लिहाज नहीं किया। हमलावरों में सात भाजपा के कार्यकर्ता  थे। हत्याकांड के अगले दिन पुलिस ने स्थानीय भाजपा नेता के पुत्र को गिरफ्तार कर लिया।  पुलिस  द्वारा  मंदिर के पुजारी को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने पर पता चला कि गौमांस सेवन की अफवाह फैलाने के लिए दो युवकों ने पुजारी पर दबाव डाला गया था। बिसहाडा हत्याकांड की विस्तृत तफ्तीश  से स्पष्ट  होता है कि यह हत्याकांड सुनियोजित था। तब से इस हत्याकांड पर राजनीति थमने का नाम नहीं ले रही है। सियासी नेताओं को आगे-पीछे तो गांवों का दौरा करने का समय नहीं मिलता है मगर बिसहाडा जैसा कांड होते ही वे दौडे-दौडे चले आते हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से लेकर उत्तर प्रदेश  के मुख्यमंत्री अखिलेश  यादव और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बिसहाडा आकर पीडित परिवार से मुलाकात कर चुके हैं। गांव के लोग सियासी  नेताओं के दौरे से आजिज आ चुके हैं।  सियासी नेताओं के लगातार दौरे से परेशान बिसहाडा के लोग सियासी नेताओं का गांव नहीं आने का कई बार आहवान कर चुके हैं।  बुधवार को विश्व  हिंदू परिषद  नेता साध्वी प्राची को गांव में आने नहीं दिया गया। सियासी नेता अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए गांव  आकर सांप्रदायिक सौहार्द  को बिगाड रहे हैं। हैरानी इस बात पर है कि  राष्ट्र्पति  प्रणब मुखर्जी द्वारा इस दुखद कांड पर गहरी चिंता व्यक्त किए जाने तक प्रधानमंत्री ने इस प्रकरण पर एक शब्द नहीं बोला। बुधवार को राष्ट्र्पति ने बिसाहडा का नाम लिए बगैर देश  में आए दिन हो रही हत्याओं पर चिंता जताकर  भाजपा नीत राजग सरकार की अंर्तात्मा को झकझोर कर रख दिया। नतीजतन, वीरवार को प्रधानमंत्री ने बिहार चुनाव रैली में राश्ट्रपति की नेक सलाह पर चलने का आहवान किया। राष्ट्र्पति ने  जनमानस से देश  की  “सांस्कृतिक विविधता“, सहिष्णुता  और बहुलता का सम्मान करने का आहवान किया है। तथापि, कट्टरवादियों को इन सब बातों का कोई असर नहीं होता है। सच्चाई यह है कि भगवा पार्टी के कार्यकर्ता केन्द्र में भाजपा नीत राजग सरकार के सत्ता में आने के बाद बेखौफ हो गए हैं। कर्नाटक में कट्टरपंथी सरेआम और सार्वजनिक तौर पर उदार विचारधारी विद्धानों को धमका रहे हैं। इस साल अगस्त में कन्नड के विख्यात लेखक और विद्धान डाक्टर एमएम कलबर्गी की हत्या कर दी गई थी। कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार के बावजूद कट्टरपंथियों को कानून तक भय नहीं है। राजपूत बहुल बिसहेडा गांव में अभी भी सांप्रदायिक तनाव बना हुआ है। पीडित परिवार को दिल्ली लाया जा चुका है। इससे गांव में नेताओं के दौरे बंद हो सकते हैं। बहरहाल, बिसहाडा गांव को नेताओं के दौरों की बजाय सांप्रदायिक सौहर्द  कायम करने की जरुरत है।