देश की अखंडता पर चोट
केन्द्र में मोदी सरकार के सत्ता में आने से जैसे पूरे देश में भाजपाइयों को कुछ भी करने की खुली छूट मिल गई है। आए दिन ऊट-पटांग के काम, ऊल-जलूल की बयानबाजी और धमकियां यही दर्शाती हैं। वीरवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भाजपा विधायकों ने निर्दलीय विधायक की पिटाई कर दी। सिर्फ इसलिए कि निर्दलीय विधायक इंजीनियर रशीद ने एक दिन पहले श्रीनगर स्थित विधायक सदन में “बीफ पार्टी“ दी थी। भाजपा विधायक इस बात से क्षुब्ध थे। वीरवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरु होने से पहले भाजपा विधायक राजीव शर्मा ने पहले रशीद को थप्पड मारा और फिर सात विधायकों ने उनसे धक्का-मुक्की की। यह सब सदन के भीतर हुआ। इस घटना पर शर्मिंदा होने की बजाय भाजपा विधायकों ने धमकी दी कि “ यदि किसी ने गोमाता का अपमान किया, हम आगे भी ऐसा ही करेंगें“। यानी गोमाता के नाम पर भाजपाई कुछ भी कर सकते हैं। पिछले कुछ दिनों से गोमांस पर प्रतिबंध लगाकर जबरदस्त सियासी खेल खेला जा रहा है। भाजपा शासित राज्यों में जैन समुदाय को खुश करने के लिए सरकार ने हाल ही में गोमांस पर प्रतिबंध भी लगा रखा है। यांनी देश में किसी नागरिक को क्या नहीं खाना चाहिए और क्या नहीं पहनना चाहिए, यह सब भगवा पार्टी से पूछ कर करना चाहिए। इतना ही नहीं विद्धानों को भी वही लिखना चाहिए जो भगवा पार्टी के समर्थक चाहते हैं। साफ-साफ शब्दों में कहा जाए तो भारत के नागरिकों को भगवा पार्टी की इच्छानुसार जीना चाहिए। और अगर कोई ऐसा नहीं कर सकता है तो भगवा पार्टी के समर्थक कहते हैं उसे पाकिस्तान चले जाना चाहिए। भगवा पार्टी का वश चले तो भारत में वही रह सकता है जो उनके मुताबिक जिए और मरे। केन्द्र में मोदी सरकार के आने के बाद से भाजपा और उसके सहयोगी संगठनों की अब तक की कार्यशैली का यही संदेश दे रही है। यानी जिस बात का भय था, वही हो रहा है। विशुद्ध हिंदुवादी राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की उपज दक्षिणपंथी भाजपा को मुसलमान विरोधी माना जाता है और भाजपाइयों ने अपनी कारस्तानियों से यही सिद्ध भी किया है। मुसलमान सदियों से गोमांस का सेवन करते हैं। मुसलमान ही नहीं ईसाई भी गोमांस खाते हैं। यूरोप में गोमांस काफी लोकप्रिय है। पश्चिम देशों में गाय को दूध के अलावा मांस के लिए भी पाला जाता है। यूरोप में अगर दुधारु पशु कम दूध देने लगे तो उसे अनुत्पादक मानकर मांस के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हर धर्म और समाज का अपना खान-पान होता है। और कई मामलों में एक समाज का खान-पान दूसरे का विरोधीभासी भी हो सकता है। इसका यह कतई मतलब नहीं कि हम दूसरों पर अपने खान-पान और तौर-तरीके थोपें । दुनिया में भारत और नेपाल के सिवा किसी भी देश में हिंदू नहीं बसते हैं। तो क्या भाजपाई पूरी दुनिया में गोमांस सेवन को रोक लेंगे? इस मामले में भाजपाइयों का आचरण भी दोगला है। कई भाजपाई खुद मांसाहारी हैं। आरएसएस से लंबे समय से जुडे एक नेता ने खुलासा किया है कि दो सरसंघ संचालक मांसाहारी रह चुके हैं। ताजा रिपोर्ट के अनुसार भाजपा के गोभक्त विधायक संगीत सोम ने 2009 में अलीगढ में मांस का प्रोसेसिंग प्लांट लगाने के लिए जमीन खरीदी थी और इसमें उनके साथ एक मुसलमान पार्टनर थे। वानिकी विशेषज्ञों का मानना है कि गाय के प्रति भारत में गहरी आस्था ने वनों को खासा नुकसान हो रहा है। इसकी प्रमुख वजह है कि भारत में दुधारु नहीं रहने पर भी गाय को पाला-पोसा जाता है। भारत में अनुपात्दक दुधारु पषुओं की आबादी अन्य देषों की तुलना में कहीं ज्यादा है। इससे चारे के लिए वनों और ग्रीन कवर को खासा नुकसान हो रहा है। भारत में सडकों, चरागाहों और गली-मोहल्ले में गाय को पाला-पोसा जाता है। निसंदेह, गाय भारतीय में हिंदू समाज का अहम हिस्सा है। गाय को गोमाता का दर्जा देकर हिंदुओं की आस्था का सम्मान भी किया जाता है। मगर यह भी सत्य है कि गाय को पलने के लिए सडकों और सार्वजनिक स्थलों पर छोडकर हम कोई बडा धर्म का काम नहीं कर रहे हैं। सच यह है कि पूरा मुद्दा सियासी है। भाजपाई धर्म के ठेकेदार बनकर सियासी हितों की खातिर हिंदू मतदाताओं के धु्रवीकरण के लिए ही कभी राम मंदिर तो कभी गोमता की रक्षा का मुद्दा उछालते हैं। इससे देश की अखंडता को कितना नुकसान हो रहा है, इससे उन्हें कोई सरोकर नहीं है। यह स्थिति कतई देश के हित में नहीं है।
केन्द्र में मोदी सरकार के सत्ता में आने से जैसे पूरे देश में भाजपाइयों को कुछ भी करने की खुली छूट मिल गई है। आए दिन ऊट-पटांग के काम, ऊल-जलूल की बयानबाजी और धमकियां यही दर्शाती हैं। वीरवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भाजपा विधायकों ने निर्दलीय विधायक की पिटाई कर दी। सिर्फ इसलिए कि निर्दलीय विधायक इंजीनियर रशीद ने एक दिन पहले श्रीनगर स्थित विधायक सदन में “बीफ पार्टी“ दी थी। भाजपा विधायक इस बात से क्षुब्ध थे। वीरवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरु होने से पहले भाजपा विधायक राजीव शर्मा ने पहले रशीद को थप्पड मारा और फिर सात विधायकों ने उनसे धक्का-मुक्की की। यह सब सदन के भीतर हुआ। इस घटना पर शर्मिंदा होने की बजाय भाजपा विधायकों ने धमकी दी कि “ यदि किसी ने गोमाता का अपमान किया, हम आगे भी ऐसा ही करेंगें“। यानी गोमाता के नाम पर भाजपाई कुछ भी कर सकते हैं। पिछले कुछ दिनों से गोमांस पर प्रतिबंध लगाकर जबरदस्त सियासी खेल खेला जा रहा है। भाजपा शासित राज्यों में जैन समुदाय को खुश करने के लिए सरकार ने हाल ही में गोमांस पर प्रतिबंध भी लगा रखा है। यांनी देश में किसी नागरिक को क्या नहीं खाना चाहिए और क्या नहीं पहनना चाहिए, यह सब भगवा पार्टी से पूछ कर करना चाहिए। इतना ही नहीं विद्धानों को भी वही लिखना चाहिए जो भगवा पार्टी के समर्थक चाहते हैं। साफ-साफ शब्दों में कहा जाए तो भारत के नागरिकों को भगवा पार्टी की इच्छानुसार जीना चाहिए। और अगर कोई ऐसा नहीं कर सकता है तो भगवा पार्टी के समर्थक कहते हैं उसे पाकिस्तान चले जाना चाहिए। भगवा पार्टी का वश चले तो भारत में वही रह सकता है जो उनके मुताबिक जिए और मरे। केन्द्र में मोदी सरकार के आने के बाद से भाजपा और उसके सहयोगी संगठनों की अब तक की कार्यशैली का यही संदेश दे रही है। यानी जिस बात का भय था, वही हो रहा है। विशुद्ध हिंदुवादी राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की उपज दक्षिणपंथी भाजपा को मुसलमान विरोधी माना जाता है और भाजपाइयों ने अपनी कारस्तानियों से यही सिद्ध भी किया है। मुसलमान सदियों से गोमांस का सेवन करते हैं। मुसलमान ही नहीं ईसाई भी गोमांस खाते हैं। यूरोप में गोमांस काफी लोकप्रिय है। पश्चिम देशों में गाय को दूध के अलावा मांस के लिए भी पाला जाता है। यूरोप में अगर दुधारु पशु कम दूध देने लगे तो उसे अनुत्पादक मानकर मांस के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हर धर्म और समाज का अपना खान-पान होता है। और कई मामलों में एक समाज का खान-पान दूसरे का विरोधीभासी भी हो सकता है। इसका यह कतई मतलब नहीं कि हम दूसरों पर अपने खान-पान और तौर-तरीके थोपें । दुनिया में भारत और नेपाल के सिवा किसी भी देश में हिंदू नहीं बसते हैं। तो क्या भाजपाई पूरी दुनिया में गोमांस सेवन को रोक लेंगे? इस मामले में भाजपाइयों का आचरण भी दोगला है। कई भाजपाई खुद मांसाहारी हैं। आरएसएस से लंबे समय से जुडे एक नेता ने खुलासा किया है कि दो सरसंघ संचालक मांसाहारी रह चुके हैं। ताजा रिपोर्ट के अनुसार भाजपा के गोभक्त विधायक संगीत सोम ने 2009 में अलीगढ में मांस का प्रोसेसिंग प्लांट लगाने के लिए जमीन खरीदी थी और इसमें उनके साथ एक मुसलमान पार्टनर थे। वानिकी विशेषज्ञों का मानना है कि गाय के प्रति भारत में गहरी आस्था ने वनों को खासा नुकसान हो रहा है। इसकी प्रमुख वजह है कि भारत में दुधारु नहीं रहने पर भी गाय को पाला-पोसा जाता है। भारत में अनुपात्दक दुधारु पषुओं की आबादी अन्य देषों की तुलना में कहीं ज्यादा है। इससे चारे के लिए वनों और ग्रीन कवर को खासा नुकसान हो रहा है। भारत में सडकों, चरागाहों और गली-मोहल्ले में गाय को पाला-पोसा जाता है। निसंदेह, गाय भारतीय में हिंदू समाज का अहम हिस्सा है। गाय को गोमाता का दर्जा देकर हिंदुओं की आस्था का सम्मान भी किया जाता है। मगर यह भी सत्य है कि गाय को पलने के लिए सडकों और सार्वजनिक स्थलों पर छोडकर हम कोई बडा धर्म का काम नहीं कर रहे हैं। सच यह है कि पूरा मुद्दा सियासी है। भाजपाई धर्म के ठेकेदार बनकर सियासी हितों की खातिर हिंदू मतदाताओं के धु्रवीकरण के लिए ही कभी राम मंदिर तो कभी गोमता की रक्षा का मुद्दा उछालते हैं। इससे देश की अखंडता को कितना नुकसान हो रहा है, इससे उन्हें कोई सरोकर नहीं है। यह स्थिति कतई देश के हित में नहीं है।






