सोशल मीडिया की प्रासंगिकता
मात्र ग्यारह साल से की अल्प अवधि में मार्क जकरबर्ग ने फेसबुक को अग्रणी सोशल नेटवर्किंग सर्विस साइट बना कर दुनिया को अपने कदमों पर झुका दिया है। यह कोई छोटी-मोटी उपलब्धि नहीं है। जकरबर्ग और उनकी सोशल नेटवर्किंग साइट कितनी लोकप्रिय है, इसका पता इस बात से ही चलता है कि दुनिया के सबसे बडे लोकतंत्र भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 27 सितंबर को सिलिकॉन जा रहे हैं। मोदी पालो अल्टो स्थित फेसबुक के मुख्यालय में सीईओ मार्क जकरबर्ग से मिलेंगे। भारत के प्रधानमंत्री की विजिट से रोमांचित जकरबर्ग ने लोगों से ही पूछा है कि मोदी से क्या सवााल पूछे जाएं। जकरबर्ग ने फरवरी 2004 फेसबुक को शुरु किया था और केवल 11 साल में फेसबुक के 1.44 अरब सक्रिय यूजर्स हैं। फरवरी 2012 में फेसबुक ने पहला आईपीओ (इनिश यल पब्लिक ऑफरिंग) जारी करने का फैसला किया। तीन महीने बाद आईपीओ मार्केट में आने पर उसके शेयर हाथों हाथ बिक गए। स्टैंटर्ड एंड पुअर्स 500 इंडेक्स ने जुलाई 2015 में फेस बुक को सबसे कम समय में 250 अरब डॉलर मार्केट केप हासिल करने वाली दुनिया की पहली कंपनी करार दिया है। कहते हैं हर बडे काम की शुरुआत में काफी बाधाएं आती हैं। जकरबर्ग के साथ भी ऐसा ही हुआ। फेसबुक शुरु करने से पहले जकरबर्ग बतौर हावर्ड यूनिवर्सिटी छात्र “फेसमैश “ नाम की साइट चलाया करते थे। यह साइट हार्वड यूनिवर्सिटी के नेटवर्क को हैक करके चलाई जाती। जकरबर्ग इधर-उधर से फोटो चुराया करते और फोटोज को एक साथ लगाकर यूजर्स“ को “हॉटर पर्सन“ चुनने को कहते। तब चार घंटे में “फेसमैश “ के करीब 450 विजिटर्स होते। कुछ समय बाद हार्वड यूनिवर्सिटी ने इस साइट को बंद कर दिया, जकरबर्ग को यूनिवर्सिटी से निकाल दिया और उन पर कॉपीराइट उल्लघंन का आरोप लगाया गया। बाद में इस चार्ज को वापस ले लिया गया। बस, इसके बाद जकरबर्ग ने पीछे नहीं देखा। अपनी साइट “फेसमैश “ को आगे बढाते हुए उन्होंने फरवरी 2004 में “फेसबुक“ लांच की। फेसबुक शुरु करने के छह दिन बाद हावर्ड यूनिवर्सिटी के तीन छात्रों ने जकरबर्ग पर उनके आइडिया को चुराने का आरोप लगाया। बाद में मामला अदालत तक गया और 2008 आते-आते जकरबर्ग को इन तीनों को लगभग 30 करोड डॉलर की कीमत के 12 लाख शेयर देने पडे। शुरू में फेसबुक हावर्ड यूनिवर्सिटी के अंडरग्रेजुएट छात्रों तक ही सीमित रखी गई। पहले ही माह यूनिवर्सिटी के आधे से ज्यादा अंडरग्रेजुएटस फेसबुक के साथ जुड गए। मार्च 2004 में फेसबुक कोलंबिया, स्टेनफोर्ड और येल यूनिवर्सिटी और फिर अन्य के लिए खोल दी गई। चार माह में ही फेसबुक की साइट इतनी लोकप्रिय हो गई कि जून 2004 में फेसबुक का मुख्यालय सिलिकॉन वैली में शिफ्ट कर दिया गया। सितबंर 2006 में फेसबुक का विश्व व्यापि विस्तार किया गया। वैध ईमेल एड्रेस वाले 13 साल से अधिक उमर का कोई भी व्यक्ति इस साइट का सदस्य बन सकता था। फेसबुक की तरह सोशल नेटवर्किंग साइटस का इतिहास कोई ज्यादा पुराना नहीं है। नब्बे के दशक से पहले सोशल साइटस के बारे कोई जानता तक नहीं था। 1994 में “जियोसिटीज“ नाम की ऑनलाइन कम्युनिटी सर्विस खुली। 1995 में “ ग्लोबकॉम“ और “ टाईपोडकॉम “ की शुरुआत हुई। इन साइटस पर स्थानीय लोग गपशप किया करते थे। 1997 में शुरु की गई “सिक्स डिग्री डॉट कॉम“ पहली सोशल नेटवर्किंग साईट थी। नई सदी आते-आते फ्रेंडस्टर, लिंक्डइन, माईस्पेस, ओरकुट और बेबो काफी लोकप्रिय हो चुकी थीं। 2004 मे फेसबुक के लांच होने तक गूगल के अलावा टवीटर समेत कई साइटें खुल चुकीं थी। और आज हालात यह कि दुनिया में सोशल साइटस को नियंत्रित करना टेढी खीर लग रहा है। 2013 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में 75 फीसदी व्यस्क सोशल नेटवर्किंग साइट्स के यूजर है। अध्ययन में बताया गया है कि 2013 में सबसे ज्यादा सोशल नेटवर्किंग साइट्स यूजर भारत में थे। इंटरनेट के उदभव पर कह गया था की इससे पूरी दुनिया एक गांव बन गई है। और सोशल नेटवर्किंग सर्विस से समूची मानव जाति एक परिवार बन गई है। इसका मानव जाति के उत्थान के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
मात्र ग्यारह साल से की अल्प अवधि में मार्क जकरबर्ग ने फेसबुक को अग्रणी सोशल नेटवर्किंग सर्विस साइट बना कर दुनिया को अपने कदमों पर झुका दिया है। यह कोई छोटी-मोटी उपलब्धि नहीं है। जकरबर्ग और उनकी सोशल नेटवर्किंग साइट कितनी लोकप्रिय है, इसका पता इस बात से ही चलता है कि दुनिया के सबसे बडे लोकतंत्र भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 27 सितंबर को सिलिकॉन जा रहे हैं। मोदी पालो अल्टो स्थित फेसबुक के मुख्यालय में सीईओ मार्क जकरबर्ग से मिलेंगे। भारत के प्रधानमंत्री की विजिट से रोमांचित जकरबर्ग ने लोगों से ही पूछा है कि मोदी से क्या सवााल पूछे जाएं। जकरबर्ग ने फरवरी 2004 फेसबुक को शुरु किया था और केवल 11 साल में फेसबुक के 1.44 अरब सक्रिय यूजर्स हैं। फरवरी 2012 में फेसबुक ने पहला आईपीओ (इनिश यल पब्लिक ऑफरिंग) जारी करने का फैसला किया। तीन महीने बाद आईपीओ मार्केट में आने पर उसके शेयर हाथों हाथ बिक गए। स्टैंटर्ड एंड पुअर्स 500 इंडेक्स ने जुलाई 2015 में फेस बुक को सबसे कम समय में 250 अरब डॉलर मार्केट केप हासिल करने वाली दुनिया की पहली कंपनी करार दिया है। कहते हैं हर बडे काम की शुरुआत में काफी बाधाएं आती हैं। जकरबर्ग के साथ भी ऐसा ही हुआ। फेसबुक शुरु करने से पहले जकरबर्ग बतौर हावर्ड यूनिवर्सिटी छात्र “फेसमैश “ नाम की साइट चलाया करते थे। यह साइट हार्वड यूनिवर्सिटी के नेटवर्क को हैक करके चलाई जाती। जकरबर्ग इधर-उधर से फोटो चुराया करते और फोटोज को एक साथ लगाकर यूजर्स“ को “हॉटर पर्सन“ चुनने को कहते। तब चार घंटे में “फेसमैश “ के करीब 450 विजिटर्स होते। कुछ समय बाद हार्वड यूनिवर्सिटी ने इस साइट को बंद कर दिया, जकरबर्ग को यूनिवर्सिटी से निकाल दिया और उन पर कॉपीराइट उल्लघंन का आरोप लगाया गया। बाद में इस चार्ज को वापस ले लिया गया। बस, इसके बाद जकरबर्ग ने पीछे नहीं देखा। अपनी साइट “फेसमैश “ को आगे बढाते हुए उन्होंने फरवरी 2004 में “फेसबुक“ लांच की। फेसबुक शुरु करने के छह दिन बाद हावर्ड यूनिवर्सिटी के तीन छात्रों ने जकरबर्ग पर उनके आइडिया को चुराने का आरोप लगाया। बाद में मामला अदालत तक गया और 2008 आते-आते जकरबर्ग को इन तीनों को लगभग 30 करोड डॉलर की कीमत के 12 लाख शेयर देने पडे। शुरू में फेसबुक हावर्ड यूनिवर्सिटी के अंडरग्रेजुएट छात्रों तक ही सीमित रखी गई। पहले ही माह यूनिवर्सिटी के आधे से ज्यादा अंडरग्रेजुएटस फेसबुक के साथ जुड गए। मार्च 2004 में फेसबुक कोलंबिया, स्टेनफोर्ड और येल यूनिवर्सिटी और फिर अन्य के लिए खोल दी गई। चार माह में ही फेसबुक की साइट इतनी लोकप्रिय हो गई कि जून 2004 में फेसबुक का मुख्यालय सिलिकॉन वैली में शिफ्ट कर दिया गया। सितबंर 2006 में फेसबुक का विश्व व्यापि विस्तार किया गया। वैध ईमेल एड्रेस वाले 13 साल से अधिक उमर का कोई भी व्यक्ति इस साइट का सदस्य बन सकता था। फेसबुक की तरह सोशल नेटवर्किंग साइटस का इतिहास कोई ज्यादा पुराना नहीं है। नब्बे के दशक से पहले सोशल साइटस के बारे कोई जानता तक नहीं था। 1994 में “जियोसिटीज“ नाम की ऑनलाइन कम्युनिटी सर्विस खुली। 1995 में “ ग्लोबकॉम“ और “ टाईपोडकॉम “ की शुरुआत हुई। इन साइटस पर स्थानीय लोग गपशप किया करते थे। 1997 में शुरु की गई “सिक्स डिग्री डॉट कॉम“ पहली सोशल नेटवर्किंग साईट थी। नई सदी आते-आते फ्रेंडस्टर, लिंक्डइन, माईस्पेस, ओरकुट और बेबो काफी लोकप्रिय हो चुकी थीं। 2004 मे फेसबुक के लांच होने तक गूगल के अलावा टवीटर समेत कई साइटें खुल चुकीं थी। और आज हालात यह कि दुनिया में सोशल साइटस को नियंत्रित करना टेढी खीर लग रहा है। 2013 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में 75 फीसदी व्यस्क सोशल नेटवर्किंग साइट्स के यूजर है। अध्ययन में बताया गया है कि 2013 में सबसे ज्यादा सोशल नेटवर्किंग साइट्स यूजर भारत में थे। इंटरनेट के उदभव पर कह गया था की इससे पूरी दुनिया एक गांव बन गई है। और सोशल नेटवर्किंग सर्विस से समूची मानव जाति एक परिवार बन गई है। इसका मानव जाति के उत्थान के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।






