गुरुवार, 17 सितंबर 2015

Defeating US, Guys Are You Just Joking ?

                                              गीदड भभकियां

दुनिया को अपने जुल्म और अमानवीय हरकतों से दहलाने वाले इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने अमेरिका को नेस्तनाबूद करने की धमकी दी है। ऐसी ही धमकी कुछ दिन पहले अल-कायदा के नेता अयान अल-जवाहिरी भी दे चुके है़। सितंबर 2001 को अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला करने  के बाद अल-कायदा भी ऐसी धमकियां दिया करता था। आईएस और अल-जवाहिरी की अमेरिका को आए दिन धमकाना आम बात है। उत्तर  कोरिया भी इसी तरह अमेरिका को एटमी हथियारों  से आक्रमण करने की धमकी देता रहता है। अमेरिका दक्षिण कोरिया की मदद करता है, इसलिए उत्तर कोरिया  के  निरंकुश  शासक किम जॉन्ग उन अमेरिका को धमकाते रहते हैं। उधर, ईरान के धार्मिक नेता अली खमेनी (पूरा नाम सैयद अली हुसैनी खमेनी) इस कडी में जुड गए हैं। अली खमेनी ईरान के पहले धार्मिक नेता अयोतुल्ला रुहोल्ला खमेनी के उतराधिकारी है़ मगर उनका वह रुतबा नहीं है जो अयोतुल्ला खमेनी का था। अयोतुल्ला खमेनी 1979 से 1989 तक ईरान के सर्वोच्च नेता (रहेबरे इंकिलाब) थे। 1979 में अमेरिका की नामचीन टाइम पत्रिका ने उन्हें दुनिया का सबसे प्रभावशाली व्यक्ति करार दिया था। अयोतुल्ल्ला खुमेनी ने सतहर के दशक में ईरान में तत्कालीन रजवाड़ा शासक मोहम्मद रजा पहलवी को पदच्युत किया था। पहलवी रजवाडा परिवार लंबे समय तक ईरान पर एकछत्र  शासन करता रहा है । अमेरिकी मदद के दमखम पर  मोहम्मद रजा पहलवी 1979 तक निरंकुश  शासन करते रहे  मगर खुमेनी ने ईरान में पहलवी राजशा ही का अंत कर डाला। 1989 में अयोतुल्ला खमेनी की मौत के बाद सैयद अली खमेनी को नया धार्मिक नेता चुना गया और वे तब से इस पद पर विराजमान है। अयोतुल्ला की ही तरह अली खुमेनी भी अमेरिका के कट्टर आलोचक हैं। वे पहले भी कई बार अमेरिका को धमका चुके हैं। अली खुमेनी को अमेरिका के साथ ईरान की न्युक्लियर डील रास नहीं आई है। ईरान के धार्मिक नेता अक्सर कहते रहे हैं कि अमेरिका ईरान के आंतरिक मामलों में दखल देने वाला होता कौन हैं। ईरान के मौजूदा  राष्ट्र्पति  हसन रूहानी हालांकि अयोतुल्ला खुमेनी के अनुयायी हैं मगर वे पश्चिम  से मधुर संबंध बनाने के पक्ष में है। अली खुमेनी इसके सख्त खिलाफ हैं।  रूहानी  के प्रयासों की वजह से ही इस साल अमेरिका-ईरान न्युक्लियर डील मुमकिन हो पाई है।  बहरहाल, अमेरिका से जंग करना कोई बच्चों का खेल नहीं है।  कहते हैं “भीरु लोग ही गीदडभभकियां दिया करते हैं। इसके पीछे मनोवैज्ञानिक कारण भी है। अपने भीतर के डर को छिपाने के लिए धमकियां दी जाती हैं। अमेरिका दुनिया का सबसे ताकतवर देश  है। उसके पास दुनिया की विशालतम सैन्य शक्ति है और एटमी हथियार भी। अगर वह चाहे तो  किसी भी देश  को चंद घंटों में तबाह कर सकता है।  दुनिया में इस समय न्युक्लियर पॉवर बनने की होड लगी हुई है और हर मुल्क  चाहता है कि उसके पास एटमी हथियार हों। परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के बावजूद एटमी हथियार बनाए जा रहे हैं। शिया  मुस्लिम बाहुल ईरान के पास एटमी हथियार अरब  के अधिकांश  सुन्नी मुसलमान देशों  को नागवार गुजर रहा है। विश्व  में 85 फीसदी मुसलमान सुन्नी हैं। इराक में वास्तविक लडाई  शिया और सुन्नी मुसलमानों के बीच है। इराक में नेतृत्व शिया मुसलमानों के पास है मगर अधिकतर आबादी सुन्नी मुसलमानों की है। ईरान को शिया मुसलमानों का लीडर माना जाता है। ईरान, बहरीन और आजरबाइजान को छोडकर दुनिया में कहीं भी शिया मुसलमान बहुसंख्यक नहीं है। लेबनान और कुवैत में बराबर-बराबर है। इस्लामिक स्टेट  भी सुन्नी मुसलमान आतंकियों का समूह है और वे इराक में शिया शासन का खात्मा करने पर आमादा है। संक्षेप में आपस में लड रहे इस्लामिक स्टेट के मुठ्ठी भर आतंकी कितने भी खूंखार क्यों न हो, अमेरिका को हराना तो दूर जंग करने की स्थिति में भी नहीं हैं।