बुधवार, 26 अगस्त 2015

Onion's Tears: A Wake Up Call to Modi Govt

                        सरकार गिरा सकते हैं प्याज के आंसू

लजीज पकवान में हर मौसम और हर जगह इस्तेमाल होने वाले प्याज की कीमतें इन दिनों फिर आसमान छू रही है। भारत में उत्तर से दक्षिण और पूर्व  से  पश्चिम  हर जगह प्याज की भारी मांग रहती है। प्याज शाकाहारी और मांसाहारी दोनों में जमकर इस्तेमाल किया जाता है।  एक माह पहले जुलाई में परचून में 20 रु किलो बिक रहा प्याज इस सप्ताह अचानक 60-80 रु किलो बिक रहा है। इससे मोदी सरकार की चिंताएं बढ गई है। मोदी सरकार इस सच्चाई से भली-भांति परिचित है कि  दो बार- 1990, 1998- महंगे प्याज से त्रस्त जनता  सरकार को  हटा चुकी है। 1998 में महंगे प्याज के कारण भारतीय जनता पार्टी को कई राज्यों के विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पडा था। 2013 में भाजपा ने महंगे प्याज को चुनाव प्रचार का मुददा बनाया था। मुल्क की सबसे बडी प्याज की मार्केट  महाराष्ट्र के लासलगांव में ही इन दिनों प्याज थोक में 4900 रु क्विंटल अथवा 49 रु किलो  बिक रहा है। तीन दिन पहले लासलगांव में प्याज 40 रु किलो बिक रहा था। लासलगांव से ही पूरे उत्तर भारत को प्याज की सप्लाई की जाती है। अगर प्रमुख मंडी में प्याज का थोक भाव 49 रु किलो है, तो परचून का भाव 70 से 80 रु होना स्वभाविक है। देष में प्रमुख प्याज उत्पादक राज्य महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम पानी बरसने के कारण इस बार फसल काफी कम है। इससे बाजार में प्याज की आवक काफी कम हो गई है। महाराष्ट्र देश का अग्रणी प्याज उत्पादक राज्य है। देष के कुल प्याज उत्पादन का 30 फीसदी से ज्यादा महाराष्ट्र में उगाया जाता है। मध्य प्रदेष में लगभग 15 फीसदी और कर्नाटक में 10.64 फीसदी और गुजरात में 9.54 फीसदी प्याज का उत्पादन होता है। यानी देश  के कुल प्याज उत्पादन का 65 फीसदी के करीब प्याज इन चार राज्यों में उगाया जाता है। महाराष्ट्र , कर्नाटक और गुजरात में पर्याप्त पानी नहीं बरसने के कारण फसल देरी से तैयार हो रही है। इससे मंडियों में प्याज की आवक कम हुई है और प्याज के दाम बढे हैं। 2010 में महंगे प्याज से घबराई कांग्रेस नीत संप्रग सरकार ने प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाकर इसे आयात किया था। अगस्त 2014 में प्याज के दाम बढते ही सरकार ने प्याज के निर्यात पर 500 डॉलर का शुल्क लगाकर, प्याज को देश  के बाहर बेचने से निरुत्साहित किया था। इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए थे। एक सप्ताह में ही प्याज के दाम 15 से 17 रु किलो गिर गए थे।  भारत खाडी देशों  और श्रीलंका को प्याज निर्यात करता है और इसके लिए उसे चीन और पाकिस्तान से मुकाबला पडता है।  2013-14 में भारत ने अपने कुल 1.92 करोड टन प्याज मेंसे 10.48 लाख टन प्याज का निर्यात किया था। दुनिया में 40 फीसदी प्याज उत्पादन चीन में और 27 फीसदी पाकिस्तान में होता है। दुनिया के प्याज उत्पादन में भारत का 20 फीसदी हिस्सा है। मोदी सरकार ने भी दस हजार मीट्रिक टन प्याज के आयात करने का निर्णय लिया है। पिछले दो सालों में प्याज के दाम चार बार 50 रु किलो को पार कर चुके हैं। पिछले साल  अगस्त में भी प्याज के दामों में अचानक उछाल आया था। एनएससओ के आंकडों अनुसार भारत में प्याज की प्रति व्यक्ति खपत उतरोतर बढती जा रही है। 2004-06 से 2011-12 के दौरान मुल्क के शहरी क्षेत्रों में प्याज की खपत में 32 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 फीसदी की वृद्धि हुई है। इस दौरान प्याज के उत्पादन में 40 फीसदी की वृद्धि हुई है।  यद्यपि प्याज की सप्लाई का संकट अस्थाई है मगर जमाखोर इस स्थिति का जमकर नाजायज फायदा उठाते हैं । सरकार को जमाखोंरों से सतर्क  रहना चाहिए। यही लोग हालात को बिगाडते हैं।