गुरुवार, 5 जुलाई 2018

बनीखेत

मां ने मेरी चंबा कितनी दूर””” हिमाचल के सुदूर में स्थित  चंबा का यह लोकगीत पहाडों की पीडा बयां करता है। चंबा  जिले की नैसर्गिक खूबसूरती देश -विदेश  में मशहूर है।हाल ही में मुझे बनीखेत में कुछ दिन रहने का सौभाग्य मिला। बनीखेत मषहूर पर्यटक स्थल डलहौजी के  सैटलाइट कस्बा बनकर उभरा है। पर्यटक सीजन में डलहौजी के भीड-भडाके से बचने के लिए पर्यटक बनीखेत में रहना पसंद करते हैं। इससे बनीखेत का बेतरतीब विकास हो रहा है। जगह-जगह होटल और गेस्ट हाउसिस बनाए जा रहे हैं। पहाडों की यही सबसे बडी त्रासदी है। छोटे-छोटे गांव से लोग षहर आ रहे हैं और बडे गांव भी षहर बनते जा रहे हैं। गांव की जरुरत भी छोटी होती है और वह उसी हिसाब से जरुरतों को पूरी कर लेता है। मगर गांव का षहर बनना,  शहरीकरण की जरुरतों को पूरा नहीं कर पाता। यहीं से समस्या-दर-समस्या बढती जाती है। और बनीखेत भी  शहरीकरण की समस्याओं से जूझ रहा है।  इसे चंबा जिले का प्रवेश  द्धार  माना जाता है। चंबा जिले में एंट्री के लिए बनीखेत  में टैक्स चुकाना पडताा है। 70 के दशक में जब में पहली बार चंबा गया था, तब बनीखेत एक छोटा सा खूबसूरत गांव था। शहरीकरण की कोई समस्या नहीं थी। अपनी जरुरतों  खुद  पूरी कर रहा था। मगर पांच दशक  बाद बनीखेत स्लम जैसा दिखता है। सीवरेज नहीं   होने से नालियां ब्लॉक रहती है और कस्बे का सारा कचरा नालों में फेंका जा रहा है। सडकों पर जगह-जगह गड्ढे हैं और बेतरतीब ट्रैफिक। कस्बे की अंदरुनी सडक में एक तरफा ट्रैफिक का नियम में मगर कोई भी इसका पालन नहीं करता। पुलिस कहीं नजर नहीं आती। जहां खाली जगह मिली, शराबी बहां अड्डा जमा लेते हैं। गर्मियों में लोगों पीने के पानी के लिए जुझना पडता है, बरसात में कीचड और फीलों से।  इस कस्बे की हालात देखकर लगता नहीं है कि किसी ने इसके विकास पर गंभीरता से ध्यान दिया होगा। जो थोडा-बहुत विकास नजर आता है, उसका श्रेय एनएचपीसी को जाता है। चमेरा हाइडल प्रोजेक्ट निर्माण के समय एनएचपीसी ने बनीखेत में रिहायशी  बस्ती बसाई और क्स्बे में विकास के कुछ काम किए। स्थानीय लोग आज भी इसे याद करते है़। बनिखेत को आज भी योजनाबद्ध विकास की दरकार है।