शुक्रवार, 1 जून 2018

प्रधानमंत्री का इंडोनेशिया दौरा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे पर भारत से ज्यादा चीन को चिंता सताए जा रही है। सामरिक विषय हो या कारोबार, बीजिंग, नई दिल्ली पर पैनी नजर रखता ही है। भारत की हर कूटनीति पहल पर चीन की त्वरित प्रतिकिया रहती ही है। यह कूटनीति का अहम हिस्सा है।  इंडोनेशिया दुनिया का एकमात्र ऐसा मुस्लिम देश  है जहां हिंदू संस्कृति का आज भी प्रभुत्व है। अपनी साझी संस्कृति के लिए यह मुल्क पूरी दुनिया में जाना जाता है। इंडोनेशियाई का बाली द्धीप हिंदू बहुसंख्यक है। इसी बात के  दृष्टिगत  प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान बाली और उत्तराखंड को “सहोदर राज्य“ बनाने की घोषणा भी की गई है। दोनों देशों  में काफी सांस्कृतिक समानताएं हैं। रामायण और महाभारत को इंडोनेशिया में उतनी ही शिद्धत से पवित्र ग्रंथ माना जाता है जितना भारत में। इतना ही नहीं अगर रामायण और महाभारत का उल्लेख होता है, तो इंडोनेशियाई कहेंगे “ ये तो हमारे ग्रंथ हैं“। इंडोनेशियाई की रामायण और महाभारत में प्रसंग भले ही भिन्न हो पर कथानक एक जैसा है।  समानताएं् इतनी कि इंडोनेशिया की भाषा , इतिहास और मिथकों में भी हिंदू और बौद्ध धर्म  का असर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इंडोनेशिया के  राष्ट्रपति  जोको विडोडो की पतंगबाजी  वीरवार को मीडिया में सुर्खियों मे छाई रहीं। पतंगबाजी भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सौहार्दपूर्ण  संबंधों का प्रतीक है।  भारत की ही तरह इंडोनेशिया भी आतंक से पीडित है। 2002 मे बाली में हुई बमबारी और तदुपंरात के आतंकी हमलों ने इंडोनेशिया को हिला कर रख दिया है। हालिया में चर्चों  पर  आतंकी हमलों ने देश  को दहला दिया था। भारत की ही तरह धार्मिक कट्टरवाद इंडोनेशिया  की सामाजिक विविधता को खोखला  कर रहा है। प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान इन सब मुद्दों पर चर्चा हुई है और दोनों मुल्कों ने एक-दूसरे का हाथ बंटाने का संकल्प दोहराया है। प्रधानमंत्री वीरवार को अपना इंडोनेशियाई दौरा पूरा करके सिंगापुर पहुंच गए हैं। दोनों देशों  के बीच  15 करारों में सुमात्रा द्धीप के संबाग और भारत के अंडेमान द्धीप  के बीच सामरिक सहयोग पर फिर से सहमति बनी है। सुमात्रा का सबांग वही क्षेत्र है जिस पर चीन को कडा ऐतराज है। दरअसल, सबांग मलक्का स्ट्रेट के रास्ते दुनिया को समुद्री रास्ते से जोडता है और  यह छह मेंसे एक महत्वपूर्ण  समुद्री पतला मार्ग  है।  चीन के लिए यह काफी स्ट्रेटेटिजक क्षेत्र है क्योंकि इसी क्षेत्र से तेल की आवाजाही होती है। चीन मलक्का स्ट्रेट को काफी इस्तेमाल करता है। भारत का इस क्षेत्र में प्रवेष चीन को जरा भी गवारा नहीं है। हिंद-प्रशांत  महासागर में चीन की बढती पैठ से इंडोनेशिया  काफी चिंतित है और उसने 2014-15 से ही इस मामले में भारत से सहयोग करना  शुरु कर दिया था। तब से वह भारत के करीब आने के लिए तडप रहा था।  जकार्ता ने संबाग में  भारत को आर्थिक और सैन्य सहायता भी पहुंचाई है। इंडोनेशिया ने भारत को  सबांग  में निवेश  की अनुमति भी दे दी है। चीन इस पर लाल-पीला हो रहा है। चीन ने भारत को चेताया भी है कि  सबांग  द्धीप तक सैन्य पहुंच से नई दिल्ली प्रत्यक्ष तौर पर चीन से सामरिक प्रतिस्पर्धा में आ जाएगा। लेकिन यह भी सच है कि भारत, चीन के साथ सैन्य प्रतिस्पर्धा में नहीं आना चाहेगा। चीन को भारत द्वारा दक्षिण-पूर्व एषिया में बंदरगाहों के निर्माण में निवेश  करने पर कोई ऐतराज नहीं है और वह इसका स्वागत करता है। इन बंदरगाहों का अगर भारत सैन्य इस्तेमाल करता है, तो उस पर चीन को सख्त ऐतराज है। इससे पूरे क्षेत्र में तनाव ही बढेगा। भारत भी ऐसा नहीं चाहेगा। प्रधानंमत्री की मौजूदा इंडोनेशिया, सिंगापुर और मलेशिया की यात्रा भारत के लिए तो सामरिक तौर पर महत्वपूर्ण है ही, चीन पर भी इसका असर पडना तय है।