इस समाचार से हर ईमानदार भारतीय, खासकर बेरोजगारों का खून खौलना स्वभाविक है कि पिछले पांच साल में देश के बैंकों ने एक लाख करोड रु का गबन किया है। यानी हर साल बैंकों में औसतन 20 लाख करोड का गोलमाल किया जा रहा है। दुनिया में सबसे अधिक बैंक घोटाले भारत में हो रहे हैं। आरबीआई की ताजा रिपोर्ट के अनुसार गत 5 साल बैंकों में 23,000 फ्रॉड के मामले पकडे गए। इन पांच सालों में चार साल तो मोदी सरकार के हैं। कांग्रेस नीत संप्रग सरकार को “घोटालों की सरकार“ बताने वाली भाजपा सरकार अब खुद कटघरे में है। संप्रग सरकार (वित्त वर्ष 2013-14) में 4306 बैंक फ्रॉड के मामले पकडे गए थे और इनमें 10, 179 करोड रु का गबन हुआ था। अप्रैल 2017 से मार्च 2018 के दौरान 5152 बैंक फ्रॉड के मामले पकडे गए और इनमें बैंको को 28, 459 करोड रु का चूना लगाया। पांच साल में सबसे ज्यादा गबन 2017-18 के दौरान हुए हैं। ये आंकडों साफ बताते हैं कि देश की बैंकिंग व्यवस्था में भारी खामियां हैं और करप्शन ने पूरे सिस्टम को जकड लिया है। मोदी सरकार के भ्रष्टाचार हटाओ गुब्बारे की भी हवा निकल गई है। और अगर इस विशाल रकम का आईटी या किसी अन्य सेक्टर में निवेश किया जाता , तो देश की पूरी आबादी को ही गारंटीड रोजगार मिल सकता था। बेरोजगारी देश की सबसे बडी समस्या है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2013 में आगरा रैली में हर साल एक करोड रोजगार के अवसर सृजित करने का वायदा किया था। देश में इस समय लगभग सवा तीन करोड शिक्षित बेरोजगार हैं। वास्तविक संख्या कही ज्यादा है। इस समय बेरोजगारी 7 फीसदी के आसपास है जबकि जुलाई 2017 में यह 3.4 फीसदी थी। बेरोजगारों के इन आंकडों मे शहरों और कस्बों से अपनी पढाई पूर कर रोजगार तलाशने वाले युवा शामिल नहीं है। अमूमन, मई-जून में सत्र पूरा होने के बाद युवा पढाई खत्म करके रोजगार की तलाश में जुट जाते हैं। प्रशिक्षित युवाओं के लिए अच्छी खबर यह है कि इस साल 6 लाख रोजगार अवसर सृजित होने का अनुमान है। यूएनपीडी (यूनाइटेड नेशन डवलपमेंट प्रोगाम) की एशिया-पेसेफिक ह्यूमन डवलपमेंट रिपोर्ट के अनुसार 1995 से 2017 के बीच भारत में वर्किंग फोर्स की संख्या में 30 करोड का इजाफा हुआ था मगर इस दौरान केवल 14 करोड रोजगार के अवसर सृजित हो पाए। अनुमान है कि 2050 तक 29 करोड युवाओं की फौज खडी हो जाएगी मगर इनके लिए इतने रोजगार के अवसर मुहैया नहीं हो पाएंगे। तब तक (2050) तक भारत की वर्किंग फोर्स ( 15 से 64 साल की आयु वाले) की संख्या एक अरब हो जाएगी। भारत की बढती वर्किंग फोर्स के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर सृजित करना अतिआवश्यक है। वरना तरह-तरह की समस्याएं खड़ी हो जाएँगी। युवाओं का सृजनात्मक उपयोग बेहद जरुरी है। सरकार की नई टेलिकॉम पालिसी के प्रारुप में 2022 तक आईटी सेक्टर में 40 लाख रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य है। इस लक्ष्य को पाने के लिए लगभग 66 अरब (100 बिलियन डॉलर) रु के निवेश की जरुरत है। यानी आईटी सेक्टर में हर साल दस लाख रोजगार अवसर सृजित करने के लिए जितने निवेश की जरुरत है उससे चार-पांच गुना ज्यादा पैसा हर साल बैंकों के गबन में जाया हो रहा है। गबन के अलावा बैंकों की नॉन-परफॉर्मिंग असेटस (एनपीए) लगातार बढ रही है। दिसंबर, 2017 में बैंकों का एनपीए 8,40, 958 करोड तक पहुंच चुका था। आरबीआई के अनुसार लोन नहीं चुकाने वालों में सबसे ज्यादा उधोगपति हैं और फिर सर्विसिस सेक्टर । कृषि सेक्टर तीसरे नंबर पर हैं। जनता अब सरकार से सवाल कर सकती है कि गबन और घोटालों में संलिप्त सरकारी बैंको को सरकारी खजाने से क्योंकर मदद दी जा रही है। सरकार ने इसी साल जनवरी में 20 सरकारी बैंकों को 88,000 करोड रु की वित्तीय मदद देने का ऐलान किया था। एक लाख करोड रु से भी ज्यादा का गबन करने वालों बैंको को सरकारी मदद की क्या जरुरत है़़?
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