गुरुवार, 17 मई 2018

मौसम की मार

गर्मी में खुषगवार मौसम और सर्दियों में गर्मी। भारत में मौसम के बदलते तेवरों ने विज्ञानियों को भी चक्कर में डाल रखा है। मौसम विज्ञानियों ने 2018 को  2017 से भी ज्यादा गर्म रहने का अनुमान लगाया था मगर अभी तक यह  सही साबित नहीं हो रहा है। मई का आधा महीना गुजर चुका है मगर भीशण गर्मी तो दीगर रही, सामान्य तापमान भी औसत से कहीं कम है। बीते पखवाडे के दौरान देष में तूफानी हवाएं और धूल  भरी आंधी  चलने से  अब तक लगभग 200 लोगों की मौत हो चुकी है। 2 मई को आए तूफान से उत्तर प्रदेष और राजस्थान में 130 से ज्यादा लोग मारे गए थे। भीशण तूफान की आषंका से दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ में स्कूलों को बंद कर दिया गया था। षुक्र है तब तूफानी हवाओं का प्रकोप इतना भयानक नहीं रहा, जितना मौसम विभाग का अनुमान था। रविवार को फिर  तूफानी हवाएं चलने से देष में 70 से ज्यादा लोग मारे गए। सबसे ज्यादा जनहानि उत्तर प्रदेष में हुई है। 2 मई को उत्तर प्रदेष में 70 लोग मारे गए थे। रविवार को 42 लोग मारे गए और 84 से अधिक घायल हो गए। पष्चिम बंगाल में 14  और आंध्र प्रदेष में 12 लोग मारे गए। रविवार को पूरे देष में तूफानी हवाओं  ने तबाही मचाई है। मौसम विभाग ने अलर्ट जारी कर सोमवार और मंगलवार को भी उत्तर, पूर्वोतर  और दक्षिण भारत में तूफानी हवाएं चलने की संभावनाएं जताई है। वेस्टर्न डिस्टर्बेंसिस के कारण मौसम में यह बद्लाव आया है। तूफान आने के 30 मिनट के भीतर आसमानी बिजली गिरने का खतरा बना रहता है़। इस स्थिति के दृश्टिगत तूफान आने पर अधिकांष मौतंे आसमानी बिजली गिरने से होती हैं।
मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले सोमवार 21 मई को अधिकतम 47 डिग्री और 22 तथा 23 मई को 46 डिग्री  सेल्यसिस को छोडकर इस महीने तापमान औसत 42 डिग्री सेल्यसिस से नीचे ही रहेगा। जून के पहले सप्ताह भी औसत तापमान 38 से 40 डिग्री के आसपास रह सकता है। जून के दूसरे सप्ताह उत्तर भारत में प्री-मानसून बारिष पडने से गर्मी का प्रकोप कम हो जाता है। दक्षिण भारत में इस बार मई अंत तक और पष्चिम भारत में जून के पहले हफ्ते तक मानसून सक्रिय हो जाएंगी। इन हालात में मऔ और जून मे  भीशण गर्मी नहीं पडना मौसम की कठोरता के संकेत है। वर्श  2017 मे मौसम ने पूरी दुनिया में अपने तीखे तेवर दिखाए थे। 2017 षुरु होते ही आस्ट्रेलिया के सिडनी और ब्रिसबेन में रिकॉर्ड  तोड गर्मी पडी थी। यह  असामान्य घटना थी और इससे पहले इस मुल्क में ऐसा कभी नहीं हुआ था। भीशण गर्मी के कारण अमेरिका के केलिफोर्निया के जंगलों में आग लगने और फैलने से भारी नुकसान हुआ था।  दक्षिण यूरोप को भी असामान्य तौर पर पहली बार भीशण गर्मी से दो-चार होना पडा था। अटंलाटिक तूफान-हार्वे, इरमा और मारिया- ने अमेरिका प्रायद्धीप  में भारी तबाही मचाते हुए  260 अरब डालर से ज्यादा की संपति नश्ट कर डाली थी। 2017 मे मानसून ने भारत, पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेष में भारी तबाही मचाई थी और 1000 से ज्यादा लोग मारे गए थे। मौसम विज्ञानियों के अनुसार  2017 इतिहास में सबसे ज्यादा गैर-एल निनो गर्म साल रहा है और साल 2018 इससे भी ज्यादा गर्म  और मौसम की मार से पीडित  वर्श हो सकता है। आईपीसीसी (इंटरगर्वमेंटल पैनल ऑन कलामेट चेंज) की रिपोर्ट के अनुसार हालांकि साल-दर-साल गर्मी बढ सकती है मगर मौसम में अत्याधिक बदलाव भी देखे जा सकते हैं। यानी गर्मी में सदाबहार मौसम, सर्दी में गर्मी, तूफान, भारी बारिष और सूखा जैसी प्राकृतिक आपदाएं आम बात हो सकती हैं। मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि इस बार मानसून  सामान्य रहेगी मगर  मौसम के मौजूदा मिजाज और कठोरता इसकी गवाही नहीं दे रही है।  यह सब पर्यावरण से छेडछाड का नतीजा है।