बुधवार, 2 मई 2018

केन्द्र मालामाल, हिमाचल कंगाल

पहली जुलाई, 2017 से लागू जीएसटी (गुडस एंड  सर्विसस    टैक्स) की मासिक उगाही से केन्द्र सरकार तो मालामाल हो रही है मगर कई राज्यों की कमाई कम होने से वे कंगाली की कगार पर  हैं। अप्रैल माह में पहली बार जीएसटी का मासिक  कलेक्शन  1 लाख करोड रुपए को पार कर गया है। अगस्त से मार्च तक जीएसटी के तहत औसत  मासिक उगाही 89, 885 करोड रु रही है। अप्रैल माह में 1.03 करोड की जीएसटी उगाही हुई है। इस मेंसे 32,493 करोड सेंट्रल जीएसटी और 40,257 करोड रु स्टेट जीएसटी है। हिमाचल में सबसे कम उगाही हुई है। अप्रैल माह में कंपोजिषन स्कीम के तहत तिमाही रिटर्न  फाइल की जानी थी। इस स्कीम के तहत छोटे कारोबारियों को सकल बिक्री के अनुसार न्यूनतम टैक्स वसूला जाता है। देश  के कुल 19.31 लाख  कंपोजिशन डीलर्स  मेंसे 11.47 लाख कारोबारियों ने अपना तिमाही (जीएसटीआर-4) रिटर्न भरकर 579 करोड रु का टैक्स चुकाया है।   केन्द्र सरकार इसे बेहतर टैक्स कंपलांयस बता रही है। इस अप्रैल से ई-वे बिलिंग शुरु हो चुकी है। इससे जीएसटी उगाही में इजाफा हुआ है। सरकार को उम्मीद है कि अगले माह से टैक्स उगाही और ज्यादा बढ जाएगी। केन्द्र का यह दावा भी है कि जीएसटी के तहत बेहतर उगाही से राज्यों का राजस्व घाटा भी उतरोत्तर कम हो रहा है। जीएसटी के बाद राज्यों का औसत राजस्व घाटा 17 फीसदी के करीब रह गया है।  जुलाई से अप्रैल तक कुल मिलाकर  7.41 लाख करोड जीएसटी की उगाही हुई है हालांकि  पांच बार जीएसटी की मासिक उगाही में गिरावट दर्ज  हुई थी। पहली जुलाई, 2017 से लागू जीएसटी के तहत पांच टैक्स स्लैब - 0 फीसदी, 5 फीसदी, 12 फीसदी 18 और 28 फीसदी-रखे गए है। फल-सब्जी, दूध, अंडे समेत खाध वस्तुओं को जीएसटी से मुक्त (0 फीसदी) रखा गया है। लक्जरी कारों और तंबाकू उत्पादों पर 28 फीसदी जीएसटी के अलावा 22 फीसदी का अतिरिक्त कर भी वसूला जाता है। यानी लक्जरी कार और तंबाकू उत्पाद पर 50 फीसदी कर लगाया जाता है। पेट्रोलियम और एल्कोहलिक ड्रिंक  को अभी जीएसटी के बाहर रखा गया है और हर राज्य का इन उत्पादों पर अलग से टैक्स वसूल रहा है। केन्द्र और राज्यों के इस कदम से जीएसटी की प्रासंगिकता पर सवाल उठ रहा है। पेट्रोलियम उत्पाद और  एल्कोहलिक ड्रिंक को अगर जीएसटी से बाहर रखना था तो जीएसटी का क्या फायदा?  पेट्रोलियाम उत्पाद और  एल्कोहलिक ड्रिंक देष में सबसे ज्यादा बिकने वाले उत्पाद है। पेट्रोल-डीजल षुल्क से केन्द्र सरकार को सालाना 2.50 लाख करोड का राजस्व मिल रहा है।  वैट से राज्यों की अलग से कमाई होती है। 2016-17 के दौरान केन्द्र और राज्यों ने पेट्रोलियम उत्पादों पर लगाए जा रहे विभिन्न  शुल्कों से 4.63 लाख करोड कमाए थे और इस मेंसे 1.89 लाख  करोड राज्यों के बटटे-खाते में जमा  हुुआ था। बहरहाल, भारी भरकम कर व्यवस्था के बावजूद कई राज्यों का पेट नहीं भर रहा है और उन्हें जीएसटी से फिलहाल नुकसान उठाना पड रहा है ।हिमाचल सरकार को दो दिन  पहले ही केन्द्र ने कमजोर उगाही के लिए अलर्ट  किया है। जीएसटी के लागू होने के बाद से राज्य के राजस्व में 46 फीसदी की गिरावट आई है। सरकार का मासिक  जीएसटी कलेक्शन  359 करोड रु से गिरकर 248 करोड रु ही रह गया है। सरकार पहले ही कर्जा  लेकर अपना गुजारा कर रही है। और अगर जीएसटी के तहत कमाई में इजाफा नहीं हुआ तो इस पहाडी राज्य पर कंगाल होना तय है। हिमाचल की तरह पूर्वोतर भारत के कई राज्यों में भी जीएसटी की कम उगाही हुई है। पंजाब और हरियाणा में स्थिति अपेक्षाकृत संतोषजनक है। पंजाब में सबसे ज्यादा जीएसटी रिटर्न  फाइल हुए हैं। यह राज्य की  मजबूत आर्थिकी को दर्शाता  है। जीएसटी से पंजाब और  हरियाणा की आर्थिकी मजबूत हो सकती है।