सोमवार, 30 अप्रैल 2018

आसारामः आस्था के साम्राज्य से जेल तक

कानून  किसी को नहीं बश्ख़्ता । आसाराम और गुरमीत राम रहीम सरीखे स्वंयभू “भगवान“ को भी नहीं।  सोलह बरस की अनुयायी से बलात्कार के लिए  दोषी  पाए गए  धर्मगुरु आसाराम को अब जीवन के अंतिम सांस तक जेल में रहना पडेगा।  जोधपुर की अदालत ने गत  बुधवार को  उन्हें बलात्कार के घृणित अपराध के लिए ताउम्र जेल की सजा सुनाई है। आसाराम को भारतीय  दंड संहिता की धारा 376 के तहत  दोषी पाया है।  अदालत ने मध्य प्रदेश  के छिंडवाडा आश्रम के डायरेक्टर शरत चन्द्र और वार्डन शिल्पी को 20-20 साल की जेल की सजा सुनाई है। पीडिता इसी आश्रम में पढाई किया करती थी। 2013 में पीडिता के गिरकर चोट लगने के उपरांत, उसे इलाज के लिए जोधपुर के मनाई आश्रम लाया गया था। पीडिता के परिजनों को बताया गया कि उस पर भूत-प्रेत का साया है और उसका  उपचार आसाराम ही कर सकते हैं। वो उस समय जोधुपुर आश्रम में थे। अगस्त 2013 में नाबालिग लडकी के परिवार  ने आसाराम पर बलात्कार का मामला दर्ज  करवाया था। आसाराम पर एक अन्य महिला से बलात्कार का मामला भी चल रहा है। आसाराम पर आशीर्वाद देते समय महिलाओं से छेडछाड और उनका यौन शोषण  करने के आरोप लगते रहे हैं। आसाराम के अलावा पिछले साल अगस्त से  हरियाणा के सिरसा डेरा के संचालक गुरमीत राम रहीम भी बलात्कार के लिए जेल की सलाखों के पीछे हैं। आसाराम की तरह गुरमीत राम रहीम को भी अपनी अनुयायी का यौन  शोषण  का दोषी  पाया गया था। इससे पहले 2010 में सेक्स सीडी सामने आने पर स्वामी नित्यानंद के खिलाफ अश्लीलता  और धोखाधडी के मामले दर्ज  हुए थे। इस सीडी में स्वामी  नित्यानंद को एक अभिनेत्री के साथ शारीरिक संबंध बनाते हुए दिखाया गया था। बंगलुरु में उनके आश्रम से पुलिस छापे के दौरान कंडोम और गांजा तक बरामद हुआ था। 1997 में स्वयंभू इच्छाधारी संत स्वामी भीमानंद को दिल्ली के लाजपत नगर में देह व्यापार चलाने के लिए गिरफ्तार किया गया था। इन प्रकरणों से पता चलता है कि भारत में धर्मगुरुओं के आश्रमों में कैसा गोरखधंधा चलता है और वे किस हद तक गिर सकते है़ं। आसाराम का आस्था का साम्राज्य जितनी तेजी से फैला, उससे कहीं तीव्र रफ्तार से ध्वस्त भी हो गया । गुजरात के ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब, पिछडे और आदिवासियों को “दवा, प्रवचन और भजन कीर्तन से शुरु हुआ आसाराम का मायाजाल जल्द ही देश -विदेश  तक फैल गया। प्रसाद के साथ अनुयायियो को मुफ्त भोजन की व्यवस्था ने भी आसाराम का सामाज्य फैलाने में महत्वपूर्ण  भूमिका निभाई है। देश -विदेश  में उनक 400 से ज्यादा आश्रम है और कुल मिलाकर दस हजार करोड की संपत्ति है। आसाराम पर अवैध तरीके से जमीन हथियाने के आरोप भी हैं।  आसाराम की वेबसाइट पर अनुयायियो की संख्या चार करोड से ज्यादा बताई गई है।   प्रधानमंत्री से लेकर मुख्ययंत्री ता उनके आश्रम में आशीर्वाद लेने आते थे।  2008 में आसाराम के अहमदाबाद के निकट मुटेरा स्थित आश्रम के बाहर दो नाबालिग भाइयों  के अधजले शव विकृत अवस्था में बरामद होने के बाद आसाराम का जलवा फीका पडने लग पडा। दोनों बालक आसाराम गुरुकुल के छात्र थे।  राज्य सरकार ने इन बालकों की हत्या की जांच के लिए आयोग का गठन किया था मगर आसाराम के रसूख के कारण इस रिपोर्ट को दबा दिया गया। बलात्कार पीडिता के माता-पिता 2013 से पहले आसाराम के कटटर अनुयायी थे। पीडिता के पिता ने शाहजहांपुर में अपने खर्चे पर आसाराम का आश्रम बनाया था। संस्कारित शिक्षा की उम्मीद में उन्होंने अपने दो बच्चों को छिंडवाडा आश्रम में भेजा था। पीडिता से बलात्कार ने इस परिवार की आस्था को ही चकनाचूर कर दिया है। इस प्रकरण ने बाबाओं और धर्मगुरुओं पर गहरी आस्था रखने वालो “भक्तों“ का  विश्वास  भी तोडा है। भारत में आश्रम संस्कारित शिक्षा, अनुशासित आचरण, नैतिकता और मर्यादा के स्तंभ रहे है। आसाराम जैसे स्वयंभू “धर्मगुरु“ ने भारत की इस समृद्ध संस्कृति को शर्मसार कर रहे हैं।