प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 500 और 1000 रु के नोट बंद कर देने के कदम से भले ही आम आदमी को परेशानी उठानी पड रही है, मगर इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। पाकिस्तान के आतंकी संगठन हिजबुल से जुडे आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद से अलगावादी हिंसा में जल रही कश्मीर घाटी में व्याप्त मौजूदा अमन-चैन इस बात का गवाह है। 500 और 1000 रु के नोट बंद होते ही कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों पर पथराव की घटनाएं अचानक बंद हो गई हैं। और तो और स्कूली छात्र भरी तादाद में परीक्षाएं दे रहे हैं ।अलगाववादी संगठन भोले-भाले स्कूली बच्चों और युवाओं को पैसे देकर सुरक्षा बलों पर पथराव के लिए उकसाते थे। और अब जब 500 और 1000 के नोट बंद हो गए हैं, पथराव कराने के लिए देशद्रोहियों के पास पैसा ही नहीं है। यानी ”न रहा बांस, न बजेगी बांसुरी“। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने सोमवार को इस बात की ताकीद भी कि कश्मीर घाटी में विमुद्रीकरण के बाद से सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंकने की घटनाए अचानक बंद हो गई है। इस स्थिति से पाकिस्तान बेहद बौखलाया हुआ है और अब उसने ने नया पैंतरा फेंका है। अब तक लगातार खंडन कर रही पाकिस्तानी आर्मी ने सोमवार को माना कि भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा पर उसके सात सैनिक मार गिराए हैं। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने सोमवार भारतीय उच्चायुक्त को तलब कर इस पर अपनी आपति जताई। इसके तुरंत बाद पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष जनरल राहील शरीफ ने सेना को मुंहतोड जवाब देने के आदेश दिए। इससे पहले 21 अक्टूबर को भारतीय सेना की गोलीबारी में पाकिस्तान रेंजर्स के 7 सैनिक मारे गए थे। तब पाकिस्तान ने सैनिकों के मारे जाने का खंडन किया था। पाकिस्तान ने 25 अक्टूबर को दावा किया था कि उसकी सेना ने 5 भारतीय सैनिकों को मार गिराया और 4 भारतीय चौकियों को नष्ट कर दिया था। भारत ने इसका खंडन किया था। 28 अक्टूबर को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने पाकिस्तान के 15 सैनिकों को मार गिराने का दावा किया था जबकि पाकिस्तान ने इस दावे को नकार दिया था । भारतीय सेना ने 29 अक्टूबर को 20 पाकिस्तान सैनिकों को मार गिराया । और भी कई झडपें हुईं हैं। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से पाकिस्तान सीमा पर लगातार गोलबारी कर रहा है और भारत इसका मुंहतोड जवाब दे रहा है। इस सच्चाई को दुनिया जानती है कि सीमा पर गोलीबारी होगी तो सैनिक और नागरिक दोनों ही मारे जाएंगे। पाकिस्तान पूरी दुनिया को यह दिखाना चाहता है कि सीमा पर सीज फायर का उल्लघंन वह नहीं, भारत कर रहा है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि सीमा पर जारी निरंतर गोलीबारी में पाकिस्तानी के सैनिक न मारे गए हों। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से अब तक पाकिस्तान 300 से भी ज्यादा बार सीज फायर का उल्लघंन कर चुका है। और इस दौरान भारत के 10 से ज्यादा और पाकिस्तान के 40 से ज्यादा सैनिक मारे जा चुके हैं। हताहत सैनिकों की वास्तविक संख्या कहीं ज्यादा हो सकती है। जमीनी सच्चाई यह है कि सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से पाकिस्तान भारत को एक तरह से निरंतर युद्ध जैसे हालात में उलझाए हुए है। भारत के साथ परंपरागत युद्ध लडने की पाकिस्तान में हिम्मत नहीं है क्योंकि वह जानता है कि अगर युद्ध हुआ तो 1971 की तरह इस बार पाकिस्तान फिर टुकडे-टुकडे हो जाएगा। इन हालात में पाकिस्तान के पास एक ही विकल्प है कि वह भारत को कश्मीर में उलझाए रखे। घाटी की पर्वत श्रृंखलाएं जल्द ही भारी बर्फबारी के कारण दुर्गम हो जाएंगी। इस स्थिति में पाकिस्तान को अपने भाडे के आतकियों को घाटी में घुसपैठ करवाना करीब-करीब नामुकिन हो जाएगा । पाकिस्तान दिसंबर से पहले अधिकाधिक संख्या में आतंकियों को भारत में घुसपैठ कराने की फिराक में है। मगर भारतीय सेनाओं की चौकसी के रहते ऐसा मुमकिन नहीं है। इसीलिए, पाकिस्तानी सेना भारतीय गोलीबारी का “मुंहतोड जवाब' देने की आड में आतंकियों को कवर देने की फिराक में है मगर इस बार भारतीय सेना पाकिस्तान के नापाक मंसूबों को नेस्तनाबूद करके रहेगी।
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