शुक्रवार, 29 अप्रैल 2016

कांग्रेस और घोटाले



लंबे समय तक देश  पर राज करने वाली कांग्रेस और घोटालों का चोली-दामन का साथ है। संप्रग-दो के पूरे कार्यकाल में घोटाला-दर-घोटाले का भांडाफोड होता रहा। और अब जब कांग्रेस लगभग दो साल से केन्द्र की सता से बाहर है, घोटाले उसका पीछा नहीं छोड रहे हैं। इटली के कोर्ट द्वारा अगस्ता वेस्टलैंड हैलिकाप्टर सौदे में घूसखोरी की  पुष्टि  किए जाने से सियासी गलियारों में भूचाल आ गया है। यह सौदा अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने  शुरु किया था मगर इस डील को अंतिम रुप संप्रग सरकार ने दिया। इस स्थिति में डील के छींटे कांग्रेस पर पडना स्वभाविक है।  इटली की अदालत में बताया गया है कि अगस्ता वेस्टलैंड हैलिकाप्टर सौदे से जुडे  दस्तावेजों में  कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व  प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का उल्लेख  है। अदालत में पेश  दस्तावेजों में कहा गया है कि 3700 करोड रु के इस वीवीआईपी हेलिकॉप्टर सोदे में भारत के किसी शीर्ष  नेता को  120 करोड रु की  घूस दी गई है हालांकि नाम उजागर नहीं किया गया है। घूसखोरी में भारतीय वायुसेना के तत्कालीन अध्यक्ष की संलिप्तता के सबूत मिले हैं। इतना सब होने के बाद भारतीय जनता पार्टी को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लपेटने का हथकंडा मिल गया है।  अभी तक मोदी सरकार को इटली कोर्ट  के आर्डर की अग्रेंजी कॉपी नहीं मिली है, इसलिए सरकार ज्यादा कुछ बोल नहीं रही है। सरकार इस आर्डर का अनुवाद करा रही है और इसमेम छह-सात दिन का समय लग सकता है।  कोर्ट  के आर्डर मिलने के बाद ही सरकार अगली कार्रवाई करेगी। बहरहाल, बगैर किसी ठोस प्रमाण के भी मामले को खासा सियासी रंग दे दिया जा रहा है। भाजपा के वरिष्ठ  सांसद डाक्टर सुब्रमनयम स्वामी द्वारा बुधवार को संसद में सोनिया गांधी का नाम लेकर घूसखोरी का उल्लेख किए जाने  पर कांग्रेस ने भारी हंगामा किया। वीरवार को स्वामी ने फिर राज्यसभा में यह मामला उठाया।  अलीगढ मुस्लिम यूनिवसर्टी के ताजा हिंसक घटनाक्रम पर  चर्चा के दौरान  डाक्टर सुब्रमनयम स्वामी का इटली का उल्लेख किए जाने पर फिर जोरदार हंगामा हुआ और सभापति को उनके भाषण  को सदन की कार्यवाही से हटाना पडा। स्वामी ने दो दिन पहले ही राज्यसभा सदस्यता की शपथ ली थी। कांग्रेस भी इस मामले में खासी आक्रामक तेवर अपनाए हुए है। राज्यसभा में कांग्रेस के नेता पूर्व मंत्री गुलाम नबी आजाद ने आशंका जाहिर की है कि इस मामले में प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी और इटली के प्रधानमंत्री के बीच सौदेबाजी हुई है।  इटली के दो नाविकों पर भारत में मछुआरों की हत्या का मुकदमा चल रहा है। बकौल आजाद घूसखोरी के आरोप लगने पर  संप्रग सरकार ने कंपनी को ही ब्लैकलिस्ट कर दिया था और पूरी डील ही  रद्द कर दी गई थी। एडवांस  में दिया गया पैसा वापस ले लिया गया। कंपनी ने जो तीन हेलिकॉप्टर सप्लाई किए थे, उन्हें भी वापस कर दिया गया।  कांग्रेस का आरोप है कि संप्रग सरकार कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर चुकी थी मगर मोदी सरकार ने इसे हटाने की कोशिश  की। जाहिर है यह सब किसी खास रणनीति के तहत किया गया।   अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय  शुरु हुई  अगस्ता वेस्टलैंड हैलिकाप्टर डील को संप्रग सरकार ने  निरस्त कर दिया था। पूर्व  रक्षा मंत्री एके एंटनी ने 5 फरवरी  2014 को राज्यसभा में लिखित बयान में बताया था कि एक जनवरी  2014 से  अगस्ता वेस्टलैंड कंपनी के साथ सौदा रद्द कर दिया था।  मगर रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर का कहना है कि कंपनी को कब ब्लैक लिस्ट किया गया इसका कोई रिकार्ड नहीं है। पूरा मामला राजनीतिक ज्यादा लग रहा है। बहरहाल, वीरवार को यह मामला सुप्रीम कोर्ट  पहुंच गया है। न्यायालय में याची ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व  प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अहमद पटेल  पर इस मामले में एफआईआर दर्ज  करने की मांग की है।  कोर्ट  अगले सप्ताह इस याचिका पर सुनवाई करेगा। मामला न्यायालय के विचाराधीन है, इसलिए सियासी दलों को न्यायालय का आदेश  आने तक  अगस्ता वेस्टलैंड हैलिकाप्टर डील  उछालने से बाज आना चाहिए।