मोदी के मुरीद ओबामा
कहते हैं “सम्मान और अपमान किसी की प्रतीक्षा नहीं करता और न ही किसी के वश में होता है। जो स्थिति आज है, वह कल नहीं रहेगी और जो कल था, उसकी आज पुनरावृति नहीं हो सकती। शा स्त्रों और ग्रंथों का यही निचोड है। इसे विडबंना ही कहा जाए कि जिन नरेन्द्र मोदी को अमेरिका समेत पूरा पश्चिम गुजरात दंगों के चलते “अछूत“ मानता था, उन्हीं की आज वे दिल खोलकर तारीफ करते नहीं अघा रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा तो नरेन्द्र मोदी के मुरीद हो गए हैं। ओबामा का मानना है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का स्पष्ट नजरिया है। वे अपनी जीवन की कहानी के नायक हैं। उनकी तथ्यों पर गजब की पकड है और मोदी अपने देश तथा उससे जुड़े विभिन्न मुद्दों की अच्छी समझ रखते हैं। आर्थिक मामलों में उनके महत्वाकांक्षी विजिन से भारत को तेजी से आगे ले जाने की क्षमता नजर आ रही है। पुरातन और आधुनिकता का मिश्रण करके मोदी भारत को बुलदियों तक ले जा सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्र्पति के मुताबिक मोदी की “चाय बेचने वाली “पृश्ठभूमि“ का ख्याल करते हुए उनका प्रधानमंत्री बनना भारतीय लोकतंत्र की गतिशीलता और भारत के उदय की क्षमता दर्शाता है। ओबामा मोदी के कूटनीति कौशल और नेतृत्व क्षमताओं के भी कायल हैं। भारत में अगर कोई प्रधानमंत्री की तारीफ करे तो इसे हम “ खुशामदगी“ अथवा “श्लग्या “ मान सकते हैं, मगर दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क का राष्ट्रपति अगर नरेन्द्र मोदी की तारीफ करता है, तो देशवासियों का सीना 56 इंच का हो जाता है। नरेन्द्र मोदी को अभी प्रधानमंत्री बने बमुश्किल डेढ साल का समय हुआ है मगर इतने कम समय में उन्होंने विश्व के अग्रणी नेताओ की पंक्ति में अपनी जगह बना ली है। प्रधानमंत्री की इस छवि से निश्चित तौर पर भारत की छवि में भी निखार आया है। डेढ साल पहले तक जिस भारत को “घोटालों से पीडित कमजोर मुल्क“ माना जाता था, वही आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दुनिया की बडी ताकत बनकर उभरा है। भारत की इस बढती ताकत से पाकिस्तान भी सहमा हुआ है। चीन भी भारत का लोहा मानने के लिए बाध्य हो रहा है। मोदी के नेतृत्व में भारत ने ग्रोथ के मामले में चीन को भी पछाड दिया है। मोदी सरकार द्वारा तेजी से आर्थिक सुधार लागू करने की राह में बाधाओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट आई है और गति पकड रही है। यूरोप, जापान और चीन समेत जहां अधिकतर देश मंदी की चपेट में है, वहीं भारत तेजी से आगे बढ रहा है। अगले वित्तीय वर्श में भारत की ग्रोथ 8 फीसदी को पार कर जाएगी। यह चीन की ग्रोथ से ज्यादा है। शेयर और कमोडिटी बाजार भी सुधरे हैं । भारत का भुगतान संतुलन तीन साल पहले की तुलना में कहीं बेहतर है भले ही यह स्थिति तेल की कीमतें गिरने के कारण बनी है। राजनीतिक स्थिरता (मेक्रो स्टेबिलिटी) के कारण भारत में विदेशी निवेश का प्रवाह बडा है। भूमि अधिग्रहण कानून में वांछित संशोंधन नहीं होने और गुडस एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) के लटके रहने के बावजूद मोदी सरकार ने निवेशकों का भारत में भरोसा बढाया है। तथापि हाल ही में असहिष्णुता की घटनाओं ने विदेशों , विशेषतय पश्चिम में भारत की छवि को फिर दागदार किया है। लेकिन अच्छी बात यह है कि इससे विदेशों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की व्यक्तिगत छवि प्रभावित नहीं हुई है। अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की तारीफ करना इस बात का प्रमाण है। दरससल, पूरी दुनिया का ध्यान इस समय आतंक और जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों पर केन्द्रित है। पेरिस में आतंकी वारदात के बाद अमेरिका और उसके मित्र देश भडके हुए हैं और इस्लामिक स्टेट के आतंकियों का सफाया करने पर आमादा है। जलवायु परिवर्तन को लेकर भी विकासशील देशों से ज्यादा विकसित देश चिंतित है। बहरहाल, दुनिया अगर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मुरीद है तो इससे अच्छी बात भारत के लिए कुछ हो ही नहीं सकती। पाकिस्तान के लिए यह मुंहतोड जबाव भी है।
कहते हैं “सम्मान और अपमान किसी की प्रतीक्षा नहीं करता और न ही किसी के वश में होता है। जो स्थिति आज है, वह कल नहीं रहेगी और जो कल था, उसकी आज पुनरावृति नहीं हो सकती। शा स्त्रों और ग्रंथों का यही निचोड है। इसे विडबंना ही कहा जाए कि जिन नरेन्द्र मोदी को अमेरिका समेत पूरा पश्चिम गुजरात दंगों के चलते “अछूत“ मानता था, उन्हीं की आज वे दिल खोलकर तारीफ करते नहीं अघा रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा तो नरेन्द्र मोदी के मुरीद हो गए हैं। ओबामा का मानना है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का स्पष्ट नजरिया है। वे अपनी जीवन की कहानी के नायक हैं। उनकी तथ्यों पर गजब की पकड है और मोदी अपने देश तथा उससे जुड़े विभिन्न मुद्दों की अच्छी समझ रखते हैं। आर्थिक मामलों में उनके महत्वाकांक्षी विजिन से भारत को तेजी से आगे ले जाने की क्षमता नजर आ रही है। पुरातन और आधुनिकता का मिश्रण करके मोदी भारत को बुलदियों तक ले जा सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्र्पति के मुताबिक मोदी की “चाय बेचने वाली “पृश्ठभूमि“ का ख्याल करते हुए उनका प्रधानमंत्री बनना भारतीय लोकतंत्र की गतिशीलता और भारत के उदय की क्षमता दर्शाता है। ओबामा मोदी के कूटनीति कौशल और नेतृत्व क्षमताओं के भी कायल हैं। भारत में अगर कोई प्रधानमंत्री की तारीफ करे तो इसे हम “ खुशामदगी“ अथवा “श्लग्या “ मान सकते हैं, मगर दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क का राष्ट्रपति अगर नरेन्द्र मोदी की तारीफ करता है, तो देशवासियों का सीना 56 इंच का हो जाता है। नरेन्द्र मोदी को अभी प्रधानमंत्री बने बमुश्किल डेढ साल का समय हुआ है मगर इतने कम समय में उन्होंने विश्व के अग्रणी नेताओ की पंक्ति में अपनी जगह बना ली है। प्रधानमंत्री की इस छवि से निश्चित तौर पर भारत की छवि में भी निखार आया है। डेढ साल पहले तक जिस भारत को “घोटालों से पीडित कमजोर मुल्क“ माना जाता था, वही आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दुनिया की बडी ताकत बनकर उभरा है। भारत की इस बढती ताकत से पाकिस्तान भी सहमा हुआ है। चीन भी भारत का लोहा मानने के लिए बाध्य हो रहा है। मोदी के नेतृत्व में भारत ने ग्रोथ के मामले में चीन को भी पछाड दिया है। मोदी सरकार द्वारा तेजी से आर्थिक सुधार लागू करने की राह में बाधाओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट आई है और गति पकड रही है। यूरोप, जापान और चीन समेत जहां अधिकतर देश मंदी की चपेट में है, वहीं भारत तेजी से आगे बढ रहा है। अगले वित्तीय वर्श में भारत की ग्रोथ 8 फीसदी को पार कर जाएगी। यह चीन की ग्रोथ से ज्यादा है। शेयर और कमोडिटी बाजार भी सुधरे हैं । भारत का भुगतान संतुलन तीन साल पहले की तुलना में कहीं बेहतर है भले ही यह स्थिति तेल की कीमतें गिरने के कारण बनी है। राजनीतिक स्थिरता (मेक्रो स्टेबिलिटी) के कारण भारत में विदेशी निवेश का प्रवाह बडा है। भूमि अधिग्रहण कानून में वांछित संशोंधन नहीं होने और गुडस एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) के लटके रहने के बावजूद मोदी सरकार ने निवेशकों का भारत में भरोसा बढाया है। तथापि हाल ही में असहिष्णुता की घटनाओं ने विदेशों , विशेषतय पश्चिम में भारत की छवि को फिर दागदार किया है। लेकिन अच्छी बात यह है कि इससे विदेशों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की व्यक्तिगत छवि प्रभावित नहीं हुई है। अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की तारीफ करना इस बात का प्रमाण है। दरससल, पूरी दुनिया का ध्यान इस समय आतंक और जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों पर केन्द्रित है। पेरिस में आतंकी वारदात के बाद अमेरिका और उसके मित्र देश भडके हुए हैं और इस्लामिक स्टेट के आतंकियों का सफाया करने पर आमादा है। जलवायु परिवर्तन को लेकर भी विकासशील देशों से ज्यादा विकसित देश चिंतित है। बहरहाल, दुनिया अगर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मुरीद है तो इससे अच्छी बात भारत के लिए कुछ हो ही नहीं सकती। पाकिस्तान के लिए यह मुंहतोड जबाव भी है।






