शनिवार, 21 नवंबर 2015

Rahul Gandhi's Aggressiveness: Offense is Best Defence

पुरानी कहावत है“ आक्रमण सबसे अच्छा बचाव है (आफेंस इज बेस्ट डिफेंस)“। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के मौजूदा आक्रामक तेवरों पर यह कहावत सौ फीसदी मौजूं होती है। कांग्रेस के विपक्ष में आते ही राहुल गांधी के सुर और चाल दोनों ही बदल गए हैं। अब वे मौके की नजाकत को बखूबी पहचानने लग पडे हैं। वीरवार को अपनी दादी इंदिरा गांधी की जयंती के मौके पर यूथ कांग्रेस के मंच से कांग्रेस उपाध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा पर जबरदस्त हमला बोला। उन्होंने राष्ट्रीय  स्वंय सेवक को भी नहीं बख्शा । बोले “ मोदी अपना 56 इंच का सीना दिखाएं और अगर किसी भी मामले में मुझे दोषी  पाते हैं तो जेल में डाल दें“। सदंर्भ  था भाजपा के बडबोले वरिष्ठ  नेता डाक्टर सुब्रमण्यम स्वामी के इस आरोप का कि राहुल गांधी ने भारत के साथ-साथ ब्रिटेन की नागरिकता भी ले रखी है। पिछले सोमवार को भाजपा नेता ने दोहरी नागरिकता के लिए राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता और भारतीय नागरिकता दोनों को निरस्त करने की मांग की थी।  डाक्टर स्वामी द्वारा दस्तावेजों के साथ पेश  किए गए दोहरी नागरिकता के आरोप बेहद गंभीर हैं। देश  का सांसद दोहरी नागरिकता नहीं रख सकता। ब्रिटेन में दोहरी नागरिकता वैध है मगर भारत में नहीं। राहुल गांधी और कांग्रेस का इन आरोपों पर तिलमिलाना स्वभाविक है। वैसे न तो कांग्रेस ने और न ही राहुल गांधी ने खुद इस मामले में अभी तक कोई संतोषजनक  स्पष्टीकरण  दिया है। कांग्रेस ने सिर्फ  इतना कहा है कि स्वामी सुर्खियां बटोरने के लिए ऐसा कर रहे हैं।  सुब्रमण्यम स्वामी इससे पहले 1996 में तमिल नाडु की मुख्यमंत्री जयललिता के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला भी लड चुके हैं। इस साल मई माह में कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा जयललिता को इस मामले में बरी किए जाने पर स्वामी ने ऐलान किया था कि वे इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट  जाएंगें मगर गए नहीं। संभवतय पार्टी ने उन्हें ऐसा करने से रोक लिया। बहरहाल, राहुल गांधी और उनकी पार्टी यह बात भली-भांति जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार ऐसा कभी नहीं करेगी। 1977 में जनता पार्टी सरकार ने इंदिरा गांधी को गिरफ्तार करके जो गलती की थी, मोदी सरकार उस  तरह की गलती कभी नहीं दोहराएगी । तब भाजपाई (जनसंघी ) सरकार का हिस्सा थे। भारतीय मतदाताओं में प्रताडित के खिलाफ जबरदस्त सहानुभूति पाई जाती है। हाल ही के बिहार चुनाव ने फिर यह बात साबित कर दी है। भारतीय जनमानस खुद सदियों से प्रताडित  रहा है, इसलिए  ताकतवर और साधन संपन्न  शासक वर्ग के प्रति उसकी सहानुभूति नहीं रहती। भाजपा और उसके नेता कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर बार-बार प्रहार करके उन्हें प्रताडितों की श्रेणी में ला रहे हैं।  गांधी परिवार (सोनिया और राहुल) के खिलाफ भाजपा लंबे समय से दोहरी नागरिकता का आरोप लगाती रही है। पहले इटली की नागरिकता के आरोप लगाए जाते थे। मगर आज तक यह साबित नहीं कर पाए हैं कि सोनिया और राहुल के पास इटली की नागरिकता है। दरअसल, आरोप लगाकर सुर्खियां बटोरना  सियासी नेताओं की फितरत है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लोकसभा चुनाव से पहले बेहद आक्रामक हुआ करते थे और अक्सर यह कहते थे कि भाजपा के केन्द्र में सत्तारूढ होते ही सोनिया गांधी और राहुल गांधी इटली भाग जाएंगें। लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद राहुल जब कुछ दिन के लिए अवकाष पर गए, तब भी यही प्रचारित किया गया।  विपक्ष  में रहकर  आक्रामक तेवर अपनाना बहुत आसान है मगर सत्ता में रहते हुए आक्रामक होकर दिखाएं, तब माना जाए। अरविंद केजरीवाल अपवाद हैं। ऐसा वही सियासी नेता कर सकता है जिसके पास खोने के लिए कुछ भी न हो। प्रधानमंत्री बनने से पहले मोदी बेहद आक्रामक  हुआ करते थे मगर अब वे संयत और धैर्य  के साथ नपी-तुली बाते करते हैं। संप्रग सरकार के समय  राहुल गांधी  के तेवर रक्षात्मक हुआ करते थे। उन्हें घोटाले से पीडित मनमोहन सरकार का बचाव करना पडता था। अब राहुल आक्रामक हो गए हैं क्योंकि उनके पास खोने को कुछ नहीं है। केन्द्र में सतारूढ भाजपा  को यह बात गांठ में बांध लेनी चाहिए कि सोनिया गांधी और राहुल को प्रताडित बनाने से पार्टी का ही नुकसान होगा।