शनिवार, 28 नवंबर 2015

Let Cricket Diplomacy Play Its Role

                     क्रिकेट डिप्लोमेसी

 भारत और पकिस्तान के बीच दिसंबर में  क्रिकेट श्रृंखला शुरु होने के साथ ही  शुक्रवार को दो अच्छी खबरें मिलीं।  विराट कोहली के नेतृत्व में टीम इंडिया ने पहली बार होम पिच पर टेस्ट सीरीज जीत  ली। आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच डे-नाइट टेस्ट मैच आरंभ होना दूसरी महत्वपूर्ण घटना है। अब तक टेस्ट मैच दिन के समय ही  होते रहे हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले लगभग चार साल में कोई क्रिकेट मैच नहीं हुआ है। 2012-13 में दोनों देशों  ने आखिरी द्धिपक्षीय मैच खेला था। तब पाकिस्तान पांच  साल बाद भारत के दौरे पर आया था। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड कई दिनों से भारत में  द्धिपक्षीय क्रिकेट श्रृंखला की पेशकश  कर रहा था मगर कुछ कट्टरवादी धार्मिक संगठन के मुखर विरोध के कारण बीसीसीआई मामले को टाल रहा था। भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूदा तनावपूर्ण  संबंधों के  दृष्टिगत  पाकिस्तानी खिलाडियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की जा रही थी। पाकिस्तान में व्याप्त खराब हालात में तो इस मुल्क में भारत के साथ द्धिपक्षीय श्रृंखला  की कल्पना तक नहीं की जा सकती। छह साल बाद जिंबाम्वे इस साल पाकिस्तान का दौरा करने वाली पाली टेस्ट टीम थी। 2009 में लाहौर में श्रीलंका टीम पर आतंकी हमले के बाद कोई भी क्रिकेट प्लेइंग मुल्क पाकिस्तान का दौरा करने के लिए तैयार नहीं है। तब श्रीलंका टीम पर आतंकी हमले में आठ लोगों मारे गए थे और श्रीलंका के खिलाडी भी जख्मी हो गए थे। इस घटना ने क्रिकेट जगत को स्तब्ध कर दिया था।  घरेलू खराब हालात के कारण पाकिस्तान को भी मुल्क से बाहर क्रिकेट खेलना पड रहा है। इस समय वह इंग्लैंड के साथ दुबई में द्धिपक्षीय  श्रृंखला खेल रहा है। इन हालात में भारत और पाकिस्तान के बीच द्धिपक्षीय क्रिकेट श्रृंखला  के लिए तटस्थ देश  की तलाश  थी।  बहरहाल,  टी-20 और एक दिवसीय मैचों के लिए श्रीलंका और टेस्ट सीरीज के लिए इग्लैंड को चुना गया है। वीरवार को 26/11 की बरसी पर बीसीसीआई ने द्धिपक्षीय  श्रृंखला का ऐलान किया। 26/11 नरसंहार के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच द्धिपक्षीय संबंध बिगड गए थे और तब से बिगडते ही जा रहे हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच द्धिपक्षीय संबंध बिगडने से इसका सीधा असर क्रिकेट पर पडता रहा है। 1971में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध के बाद सात साल तक दोनों देशों  ने क्रिकेट नहीं खेला। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद  पांच साल तक, 1999 कारगिल युद्ध के बाद चार साल तक और फिर 2008 में मुंबई आतंकी हमले के बाद चार साल तक भारत और पाकिस्तान ने कोई  द्विपक्षीय सीरीज नहीं  खेली। तथापि बार-बार बाधित होने के बावजूद दोनों देशों  में द्धिपक्षीय  क्रिकेट सीरीज  की जबरदस्त लोकप्रियता है।  फैंस इसे  एक तरह से “ क्रिकेट वार“ मानते हैं। इसीलिए दोनों देश  द्धिपक्षीय क्रिकेट श्रृखला को शुरू  करने पर जोर देते रहे हैं। श्रीलंका और इंग्लैंड में प्रस्तावित द्धिपक्षीय क्रिकेट  सीरीज  दोनों देशों  के संबंधों को भी पटरी पर ला सकती है। कम-से-कम एक  शुरुआत तो हुई है। अगले साल 2016 में 11मार्च से 3 अप्रैल तक भारत  टवेंटी-20 वर्ल्ड टूर्नामेंट की मेजबानी कर रहा है। पाकिस्तान ने भारत को धमकी दी थी कि अगर वह उसके साथ द्धिपक्षीय क्रिकेट नहीं खेलता है तो पाकिस्तान इस  टूर्नामेंट का  बहिष्कार  कर सकता है। इससे भारत की जगहंसाई होती। इस धमकी के दृष्टिगत  भी भारत को पाकिस्तान के साथ द्धिपक्षीय क्रिकेट खेलना पड रहा है। क्रिकेट को भद्र पुरूषों का खेल माना जाता है और भद्र लोग  कूटनीति में माहिर होते हैं।  टवेंटी-20 वर्ल्ड टूर्नामेंट  के माध्यम से भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद  शुरु होने की उम्मीद की जा सकती है। मेजबान भारत इस टूर्नामेंट में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को आंमत्रित कर सकता है। क्रिकेट डिप्लोमेसी से ही सही, भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद स्थापित हो सकता है। इस्लामिक स्टेट के  विश्व -व्यापी आतंकी खतरे के दृष्टिगत  भारत का पाकिस्तान को इंगेज रखना उसके हित में है।