मंगलवार, 17 नवंबर 2015

ISI Sponsored Terrorists Outfit More Dangerous To Indian Than IS

                                    आतंक का विकृत चेहरा

ंपिछले  शुक्रवार को  फ्रांस की राजधानी पेरिस पर आतंकी हमले ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। पेरिस में श्रृंखलाबद्ध हमलों में 127 लोग मारे गए हैं ओर 300 से ज्यादा जख्मी हुई है। इन हमलों के समय राष्ट्र्पति  ओलांद पेरिस के नेशनल फुटबाल स्टेडियम में मैच देख रहे थे। आशंका है कि आतंकी उन्हें निशाना बनाने चाहते थे। इस स्टेडियम के बाहर आत्मघाती आतंकियों के  हमलों में चार लोग मारे गए हैं। स्टेडियम के साथ सटे रेस्ट्रां पर हुए हमले में 18 लोग मारे गए। आतंकी हमले करते रहे और पुलिस देखती ही रह गई।  2008 के मुंबई हमले, इस वर्ष   अप्रैल में केन्या के गरिसा यूनिवर्सिटी हमले और  31 अक्टूबर को मिस्त्र के सिनाई क्षेत्र में रुसी विमान हादसे  ने विकसित देशों  को इतना विचलित नहीं किया था जितना पेरिस हमले ने किया है। 11 सितंबर 2001 में अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर अल-कायदा आतंकियों के हमले के 14 वर्ष  बाद पेरिस पर हमले करके इस्लामिक स्टेट के आतंकियों ने फ्रांस समेत अमेरिका और उसके मित्र देशों  को ललकारा है। इससे पश्चिम देशों  का तिलमिलाना स्वभाविक है।  द्धितीय विश्व   युद्ध के बाद फ्रांस ने पहली बार देश  में आपातकाल लगाया  है। इससे पता चलता है कि फ्रांस ताजा हमले से किस कद्र विचलित है। इस साल जनवरी माह में साप्ताहिक चार्ली हब्दो पत्रिका के कार्यालय पर यमन स्थित अल-कायदा के आतंकियों के हमले के बाद फ्रांस की राजधानी पेरिस में यह दूसरा आतंकी हमला है। चार्ली हब्दो हमले में 11 लोग मारे गए थे। यही फ्रांस की सबसे बडी चिंता हे। आईएस आतंकियों ने धमकी दी है कि अभी तो बस  शुरुआत है, और हमले होते  रहेंगे । सीरिया में अमेरिका के साथ मिलकर आईएस ठिकानों पर बार-बार हमला करने के लिए अमेरिका का साथ देने पर आतंकी फ्रांस को अपना निशाना बनाए हुए हैं। इन हमलों के बाद अमेरिका और फ्रांस बदले की कार्रवाई कर सकते हैं। मंगलवार को फ्रांस ने अमेरिका के सहयोग से सीरिया में  इस्लामिक स्टेट के गढ रक्का पर भारी हवाई हमले किए। यूनाइटेड अरब अमीरात और जोर्डन से एक साथ दस विमानों से रक्का स्थित आईएस के दो जेहादी ठिकानों को तहस-नहस कर दिया गया। अभी और हमले हो सकते हैं। इस स्थिति के  दृष्टिगत  आईएस भी बदले की कार्रवाई कर सकता है। यानी फ्रांस पर फिर हमले हो सकते हैं। हिंसा का हिंसा से जवाब देना कतई उचित नहीं है। इससे सिर्फ  हिंसा बढ्ती है। सोमवार को तुर्की के अंतालिया में जिस समय जी-20 शिखर सम्मेलन में दुनिया के शीर्ष  नेता आतंक पर एकजुटता का संकल्प ले रहे थे, उसी दौरान राजधानी अंकारा में  अईएस के एक आत्मघाती जेहादी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए चार पुलिसकर्मियों को जख्मी कर डाला। यह आतंकी सम्मेलन को निशाना बनाने की फिराक में था। इंटेलीजेंस एजेंसियों ने आगाह किया है कि सीरिया से यूरोप पहुंच रहे लाखों शरणार्थियों में आईएस आतंकियों ने जबरदस्त घुसपैठ कर रखी है और हजारों आतंकी पूरे यूरोप और अमेरिका में फैल चुके हैं। पेरिस हमले ने पूरे विश्व  को साफ-साफ षब्दों में चेतावनी दी है कि इस्लामिक आतंक इस समय सबसे बडी चुनौती है और इससे शिखर सम्मलेनों में बडी-बडी बातें करके नहीं निपटा जा सकता। भारत लंबे समय से आतंक का दंश  झेल रहा है और पश्चिम  आतंक के विश्व  व्यापी खतरे से आगाह करता रहा है। बहरहाल, सीरिया और इराक में इस्लामिक स्टेट और अमेरिका एवं उसके मित्र देशों  के साथ जारी युद्ध के चलते फिलहाल भारत आईएस की जद से बाहर है।  सीरिया और इराक के युद्ध मे चूंकि  भारत की कोई भूमिका नहीं है, इसलिए आईएस का सारा ध्यान अमेरिका और उसके मित्र देशों  पर केन्द्रित है। भारत को अल कायदा अथवा आईएस से कहीं ज्यादा लश्कर  जैसे पाकिस्तान  आइएसआई के पिठठू आतंकी संगठनों से खतरा है। इन आतंकी संगठनों के ट्रेनिंग  ठिकानों को कैसे ध्वस्त किया जाए, भारत की  यही  प्राथमिकता होनी चाहिए।