बुधवार, 11 नवंबर 2015

Happy Diwali: lluminate Light of Knowledge And Love


                                            ज्ञान और प्रेम के दीप जलाएं

देश  में आज (बुधवार को) दीपावली का पर्व धूमधाम एवं हर्षोल्लास  से मनाया जाएगा। भारत में यह सबसे बडा त्यौहार होता है और पूरे पांच दिन चलता है। अंधकार पर रोशनी की विजय के लिए इस त्योहार को मनाया जाता है। देश  में मनाए जाने वाले सभी त्योहारों में दीपावली का सामाजिक और आर्थिक विशेष महत्व है। दीपावली स्वच्छता और प्रकाश  का पर्व है।  उपनिषद्  में दीपावली को लेकर कहा गया है “ तमसो मा ज्योतिर्गमय“, अर्थात अंधेरे से प्रकाश  की ओर जाएं“। इसी के दृश्टिगत सदियों से अखंड भारत में दीपावली को घर की साफ-सफाई की जाती है, दीए जलाए जाते हैं, रिश्तेदारो -मित्रों और पडोसियों को तोहफे दिए जाते हैं और मिठाइयां बांटी जाती हैं। कार्तिक मास की सघन अमावस्या की रात दीपावली पूरा देश  जब रोशनी में जगमगा उठता है, यह  आलोकिक छठा देखने  लायक होती है । दीपावली के आध्यात्मिक महत्व को देखते हुए 2003 में अमेरिका के  राष्ट्र्पति  निवास “व्हाइट हाउस“ में इसे धूमधाम से मनाया गया था। 2007 में अमेरिका में दीपावली को अधिकृत दर्जा  दिया गया और 2009 में व्हाइट हाउस में व्यक्तिगत रुप से दीपावली मनाने वाले  बराक ओबामा पहले अमेरिकी राष्टृपति  बने। नेपाल में भी भारत की तरह दीपावली धूमधाम से मनाई जाती है इसी दिन नेपाली संवत वर्ष  भी  शुरु होता है। फिजी और मारिशस में दीपावली पर बाकायदा सार्वजनिक अवकाश  रहता है। भारत में दीपावली पर्वों का समूह है। दशहरे के तुरंत बाद से ही दीपावली की तैयारियां शुरू  हो जाती हैं। घरों-दुकानों में रंग-रोगन किया जाता है। घरों में रंगोलियां बनाई जाती हैं। धनतेरस से शुरु होकर भैया दूज को इस त्योहार का समापन होता है। हर दिन मनाए जाने वाले त्योहार का अपना महत्व है। धनतेरस को सोना-चांदी और बर्तनों की खरीदारी कर हम समृद्धि की नींव रखते हैं। इस दिन की खरीदारी को  शुभ माना जाता है। धनतेरस के अगले दिन नरक चतुर्दशी  अथवा छोटी दीपावली होती है और इस दिन  दीर्घायु के लिए यम की पूजा की जाती है। बडी दीपावली को लक्ष्मी और गणेेश  की अराधना की जाती है। दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। इस दिन व्यापारी और व्यवसायी अपने बही-खाते बदलकर नई  शुरुआत करते हैं। किसान और कामगार अपने औजारों, खेत-खलिहानों और मषीनरी की पूजा करते हैं। और दीपावली त्योहार के अंतिम दिन भाई-बहन का पर्व  मनाया जाता है। देश  का हर नागरिक दीपावली के महत्व से बखूबी परिचित है। इस त्योहार की विशेषता  को रेखांकित करने का मकसद यह है कि हम सदियों की परिपाटी को बस आंख मूंद कर यूं ही निभा रहे हैं। हम हर दीपावली को अरबों रु की आतिशबाजी करते हैं, पटाखे फोडते हैं। इससे जनमानस को शारीरिक रुप से तो नुकसान होता ही है, साल-दर-साल प्रदूषण  बढता जा रहा है और पर्यावरण को खासी क्षति पहुंच रही है।  भारत में हर साल 350 करोड रु से भी अधिक के पटाखे फूंके जाते हैं। देश  में पटाखे बनाने वाली सबसे बडी नगरी तमिल नाडु स्थित शिवकाशी में ही 275 करोड रु के पटाखे बनाए जाते हैं।  इनसे 70,000 लोगों को रोजगार तो मिल रहा है मगर हर साल फैक्ट्रियों में आग लगने के कारण औसतन 20 लोग बेमौत मारे जाते  हैं। विभिन्न अध्ययन बताते हैं कि दीपावली के अगले कुछ दिनों तक प्रदूषण  का स्तर कहीं ज्यादा बढ जाता है और इससे लोगों, विशेषतय बच्चों और वृद्धों की सेहत पर बुरा असर पड रहा है। ऐसी दीवाली का क्या मतलब जिससे प्रदूषण   फैले, लोगों का जीन हराम हो जाए , उनकी जानें जाएं  और शारिरिक चोट पहुंचे?   क्या हमने कभी यह जानने की कोशिश  की है कि दीपावली हमें असल में क्या  सिखाती है। अज्ञानता, अहंकार, बैमनस्य, अंधविश्वास  और बुराइयों  के घनघोर  अंधकार को मिटा कर ही हम अपने   जीवन को सुखमय बना सकते हैं। अपने जीवन में ज्ञान, विनम्रता, भाईचारे, और अच्छाइयों के दीए जलाएं। दीर्घायु के लिए गंदी आदतों से बचें और जीवन में परोपकार के दीए जलाएं। अपने कौशल और सृजनात्मक शक्ति को व्यर्थ के प्रयोजनों में न गंवाएं, अलबत्ता समाज और राष्ट्र सेवा के दीप जलाएं। और सबसे बढ्कर पर्यावरण फ्रेंडली  पटाखे फोडें और ग्रीन दीपावली मनाएं।  दीपोत्सव की हार्दिक  शुभकामनाएं।