मंगलवार, 24 नवंबर 2015

ASEAN: The New Economic Power

                                                         आसियानः नई आथिक शक्ति  

मलेशिया की राजधानी कुआला लुम्पर में यूरो जोन की तर्ज पर आसियान आर्थिक समूह  (आसियान इकनोमिक  कम्युनिटी)  का गठन इस सम्मेलन की सबसे बडी उपलब्धि है। एशिया के दस देशों  की 62.50 करोड आबादी वाले  आसियान का सकल उत्पादन लगभग 2.6 खरब डॉलर के करीब है। यद्यपि चीन के 9.24 खरब डालर (2013) की तुलना में यह काफी कम लगता है मगर भारत के 1.87 खरब डालर से आसियान का सकल उत्पादन अधिक है जबकि आबादी भारत से आधी है। क्षेत्रफल के लिहाज से 44 लाख वर्ग  किलोमीटर कें फैले आसियान देश  चीन के 96 लाख वर्ग  किलोमीटर से आधा भी नहीं है  मगर भारत के 32.87 लाख वर्ग किलोमीटर से थोडा अधिक है। विएतनाम, मलेशिया, फिलिपींस, बरुनी, म्यांमार, इंडोनेशिया, सिंगापुर, लाओस, थाईलैंड  और कंबोडिया आसियान के सदस्य हें। 1967 में मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलिपींस, थाईलैंड और सिगांपुर ने इसकी नींव रखी थी। बाकी पांच देश  बाद में शामिल हुए थे । आसियान इकनोमिक कम्युनिटी के गठन से यह दुनिया की सातवीं बडी आर्थिक शक्ति बन जाएगी। यही आसियान का मूल मकसद है। चीन की  तुलना में आसियान देश  बौने नजर आते हैं और वे मिलकर भी चीन का मुकाबला नहीं कर सकते। इसी बात के दृष्टिगत  आसियान देशों  को अमेरिका की मदद लेनी पडती है। अमेरिका इस स्थिति को अपने फायदे के लिए भुनाता है। चीन आबादी के लिहाज से दुनिया का पहला और क्षेत्रफल के लिहाज से तीसरा सबसे विशालतम देश  है। चीन की बढती आर्थिक और भौगोलिक (टेरिटोरियल) महत्वाकांक्षाओं से विएतनाम और आसियान के अन्य सदस्य काफी चिंतित है। दक्षिण चाइना महासागर में चीन के ताजा दखल से आसियान के सदस्य विएतनाम, बरूनी, मलेशिया और फिलिपींस डरे हुए हैं। चीन पूरे महासागर को हथियाने की फिराक में है। बहरहाल, कहावत है “ अकेला चना भाड नही फोड सकता“। इसलिए आसियान मिलकर आगे बढना चाहते हैं। इस  साल के अंत तक आसियान सदस्य देशों  के लिए साझा मार्केट तैयार करने का लक्ष्य है। अब तक तमाम टैरिफ बाधाएं दूर की जा चुकी हैं और मुक्त व्यापार के लिए रास्ता साफ हो गया है। आसियान देशों  के बीच अभी इंटरा- आसियान व्यापार बहुत ज्यादा नहीं था मगर ताजा स्थिति में इसमें खासा इजाफा होने की उम्मीद है। तथापि आसियान के समक्ष भी सार्क  की तरह सबसे बडी चुनौती यह है कि बडी और छोटी अर्थव्यवस्थाओं के बीच के फासले को कैसे कम किया जाए? आसियान में इंडोनेशि या, मलेशिया, फिलिपींस, विएतनाम, थाईलैंड और सिगांपुर अपेक्षाकृत ज्यादा विकसित और समृद्ध हैं जबकि म्यांमार, लाओस, बरुनी और कंबोडिया कम समृद्ध।  सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लिहाज से इंडोनेशिया 915 अरब डालर के साथ सबसे ऊपर है मगर प्रति व्यक्ति आय (पर केपिटा इंकम) में  84, 821 डालर के साथ सिंगापुर सबसे आगे है। इंडोनेशिया की प्रति व्यक्ति आय 10, 758 डालर और विएतनाम की मात्र 5,983 डालर है। मलेशिया  25, 833 प्रति व्यक्ति आय के साथ इंडोनेशिया, विएतनाम, फिलिपींस  और थाईलैंड से  आगे है। नब्बे के दशक में विएतनाम, लाओस, म्यांमार और कंबोडिया को जब आसियान में शामिल किया गया, तब भी बडी और छोटी अर्थववस्थाओं के बीच ब्याप्त विशाल फासले को लेकर नए देशों को कई आशंकाएं थीं। उस समय भी पुराने और नए सदस्य के बीच प्रति व्यक्ति आय का बडा फासला था और आज भी वही फासला कायम है। इस स्थिति में अक्सर सवाल उठाया जाता है कि अगर आसियान देशों  के बीच आर्थिक फासले को पाटा नहीं गया तो आर्थिक सहयोग का क्या फायदा? यही चुनौती आज भी खडी है। गरीब देशों को आशंका है कि आसियान के नए आर्थिक  कम्युनिटी का फायदा बडी अर्थव्यवस्थाओं  को ज्यादा हो सकता है। नए मंच से लेवल प्लेइंग फील्ड सुनिश्चित  करना होगा। अगर गरीब सदस्य देशों   को नए मंच से बराबर का फायदा  नहीं मिलता है तो इसकी प्रासंगिकता ही ध्वस्त हो जाएगी। इसके अलावा राजनीतिक-सामाजिक विविधताएं भी मुक्त व्यापार को प्रभावित कर सकती है। इस तरह के मंच का तभी फायदा हो सकता है जब बडे-छोटे सबको बराबर आगे बढने का मौका मिले।