मर्यादा में रहना सीखें मंत्री
भारतीय जनता पार्टी के मंत्री और नेता उल-जलूल बयानबाजी करके पार्टी और मोदी सरकार दोनों की छवि खराब करने मे कोई कसर नहीं छोड रहे हैं। भाजपाइयों का गोमांस (बीफ) पर विवादास्पद बयान देने का सिलसिला अभी भी नहीं था कि विदेश राज्यमंत्री एवं पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह ने असंवेदनशील एवं “गैर-जिम्मेदारां“ बयान दागकर पार्टी को शर्मसार कर दिया है। जनरल सिंह ने फरीदाबाद में दलित परिवार के दो मासूमों को जलाए जाने की दुखद घटना की तुलना “कुत्ते“ से की है। सरकार को बचाने के चक्कर में जनरल वीके सिंह ने “ कोई कुत्ते को पत्थर मारता है, तो सरकार जिम्मेदार नहीं“ जैसे मर्यादाहीन शब्द बाणों से सामुदायिक सदभाव को छिन-बीन कर दिया है। जनरल वीके सिंह दलितों की “कुत्तों“ से तुलना करने पर ही नहीं रुके। उन्होंने खबर लिखने वाले पत्रकार को पागलखाने में भर्ती कराने की बात कहकर मामले को और ज्यादा बिगाड दिया। जनरल इस बात के लिए खफा थे कि दो अलग-अलग संदर्भों को जोडकर पत्रकार ने मतलब निकाला कि उन्होंने “ दलितों को कुत्ता“ कहा। जनरल वीके सिंह से इस तरह की शब्दावली की कतई उम्मीद नहीं थी। जनरल सिंह बेहद सम्मानित सैन्य अधिकार रह चुके हैं। सेना के अनुशासन और तहजीब की हर जगह मिसाल दी जाती है। इसके क्या अभिप्राय निकाले जाएं। क्या राजनीति में आते ही सम्मानित महानुभाव मर्यादा और तहजीब भूल जाते हैं? फरीदाबाद में दो मासूमों को जिंदा जला देने की घटना से पूरा देश स्तब्ध है। इसकी जितनी भर्त्सना की जाए, उतनी कम है। ऐसे में हरियाणा राज्य से संबंधित जनरल वीके सिंह द्वारा अनर्गल बात कहना पीडित परिवार के जख्मों पर नमक छिडकने से भी ज्यादा कष्टदायक है। उच्चस्थ पद पर आसीन व्यक्ति इतना असंवेदनशील कैसे हो सकता है। जनरल सिंह अब अपने इस कथन पर लाख सफाई दे मगर उनके इस बयान से पार्टी की ही नहीं, सम्मानित सैन्य अधिकारी की छवि को भी जबरदस्त ठेस पहुंची है। जनरल सिंह के बयान से पार्टी बचाव मुद्रा में आ गई है। भाजपाइयों के विवादास्पद बयान से विपक्ष को यह कहना का मौका मिल रहा है कि पार्टी मुसलमान और दलित विरोधी है। इस मामले में केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह को शुक्रवार को कहना पडा कि मंत्रियों को स्वंय इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि उन्हें कब और कहां क्या कहना है और क्या नही। विवादास्पद बयान देकर वे यह कहकर बच नहीं सकते कि उनके कथन को तोड-मरोड कर पेश किया गया। भाजपा की सबसे बडी समस्या भी यही है कि पार्टी अपने नेताओं की बेलगाम एवं विवादास्पद बयानबाजी को रोक नहीं पा रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह कई बार भाजपाइयों की विवादास्पद बयानबाजी पर अपनी नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं। इसके बावजूद भाजपा नेता इससे बेपरवाह होकर आए दिन विवादास्पद बयान दाग देते हैं। जनरल सिंह के बयान से एक दिन पहले केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री किरन रिजिजू उतर भारतीयों पर नस्लीय बयान दागकर सरकार और पार्टी को शर्मसार कर चुके हैं। केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री का कहना है कि उत्तर भारत के लोग कायदे-कानून तोडने और ऐसा करके शेखी बघारने में गर्व महसूस करते हैं। केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री अगर सभी उतर भारतीयों को लेकर पूर्वाग्रह से ग्रस्त हों, तो उनके विवेक पर सवालिया निशान उठना स्वभाविक है। भाजपाइयों के विवादास्पद कथनों को मर्यादा की कसौटी पर परखें, तो यही निष्कर्ष निकलता है कि केन्द्र में डेढ साल से सत्तारूढ होने के बावजूद भाजपा के मंत्रीं और लॉमेकर्स संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन और मान-मर्यादा का पालन करना सीख नहीं पाए हैं। भाजपाइयों का अमर्यादित आचरण पार्टी की लुटिया डूबो सकता है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को इस मामले में गंभीरता से सोचने की जरुरत है।
भारतीय जनता पार्टी के मंत्री और नेता उल-जलूल बयानबाजी करके पार्टी और मोदी सरकार दोनों की छवि खराब करने मे कोई कसर नहीं छोड रहे हैं। भाजपाइयों का गोमांस (बीफ) पर विवादास्पद बयान देने का सिलसिला अभी भी नहीं था कि विदेश राज्यमंत्री एवं पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह ने असंवेदनशील एवं “गैर-जिम्मेदारां“ बयान दागकर पार्टी को शर्मसार कर दिया है। जनरल सिंह ने फरीदाबाद में दलित परिवार के दो मासूमों को जलाए जाने की दुखद घटना की तुलना “कुत्ते“ से की है। सरकार को बचाने के चक्कर में जनरल वीके सिंह ने “ कोई कुत्ते को पत्थर मारता है, तो सरकार जिम्मेदार नहीं“ जैसे मर्यादाहीन शब्द बाणों से सामुदायिक सदभाव को छिन-बीन कर दिया है। जनरल वीके सिंह दलितों की “कुत्तों“ से तुलना करने पर ही नहीं रुके। उन्होंने खबर लिखने वाले पत्रकार को पागलखाने में भर्ती कराने की बात कहकर मामले को और ज्यादा बिगाड दिया। जनरल इस बात के लिए खफा थे कि दो अलग-अलग संदर्भों को जोडकर पत्रकार ने मतलब निकाला कि उन्होंने “ दलितों को कुत्ता“ कहा। जनरल वीके सिंह से इस तरह की शब्दावली की कतई उम्मीद नहीं थी। जनरल सिंह बेहद सम्मानित सैन्य अधिकार रह चुके हैं। सेना के अनुशासन और तहजीब की हर जगह मिसाल दी जाती है। इसके क्या अभिप्राय निकाले जाएं। क्या राजनीति में आते ही सम्मानित महानुभाव मर्यादा और तहजीब भूल जाते हैं? फरीदाबाद में दो मासूमों को जिंदा जला देने की घटना से पूरा देश स्तब्ध है। इसकी जितनी भर्त्सना की जाए, उतनी कम है। ऐसे में हरियाणा राज्य से संबंधित जनरल वीके सिंह द्वारा अनर्गल बात कहना पीडित परिवार के जख्मों पर नमक छिडकने से भी ज्यादा कष्टदायक है। उच्चस्थ पद पर आसीन व्यक्ति इतना असंवेदनशील कैसे हो सकता है। जनरल सिंह अब अपने इस कथन पर लाख सफाई दे मगर उनके इस बयान से पार्टी की ही नहीं, सम्मानित सैन्य अधिकारी की छवि को भी जबरदस्त ठेस पहुंची है। जनरल सिंह के बयान से पार्टी बचाव मुद्रा में आ गई है। भाजपाइयों के विवादास्पद बयान से विपक्ष को यह कहना का मौका मिल रहा है कि पार्टी मुसलमान और दलित विरोधी है। इस मामले में केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह को शुक्रवार को कहना पडा कि मंत्रियों को स्वंय इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि उन्हें कब और कहां क्या कहना है और क्या नही। विवादास्पद बयान देकर वे यह कहकर बच नहीं सकते कि उनके कथन को तोड-मरोड कर पेश किया गया। भाजपा की सबसे बडी समस्या भी यही है कि पार्टी अपने नेताओं की बेलगाम एवं विवादास्पद बयानबाजी को रोक नहीं पा रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह कई बार भाजपाइयों की विवादास्पद बयानबाजी पर अपनी नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं। इसके बावजूद भाजपा नेता इससे बेपरवाह होकर आए दिन विवादास्पद बयान दाग देते हैं। जनरल सिंह के बयान से एक दिन पहले केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री किरन रिजिजू उतर भारतीयों पर नस्लीय बयान दागकर सरकार और पार्टी को शर्मसार कर चुके हैं। केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री का कहना है कि उत्तर भारत के लोग कायदे-कानून तोडने और ऐसा करके शेखी बघारने में गर्व महसूस करते हैं। केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री अगर सभी उतर भारतीयों को लेकर पूर्वाग्रह से ग्रस्त हों, तो उनके विवेक पर सवालिया निशान उठना स्वभाविक है। भाजपाइयों के विवादास्पद कथनों को मर्यादा की कसौटी पर परखें, तो यही निष्कर्ष निकलता है कि केन्द्र में डेढ साल से सत्तारूढ होने के बावजूद भाजपा के मंत्रीं और लॉमेकर्स संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन और मान-मर्यादा का पालन करना सीख नहीं पाए हैं। भाजपाइयों का अमर्यादित आचरण पार्टी की लुटिया डूबो सकता है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को इस मामले में गंभीरता से सोचने की जरुरत है।






