कमाऊ बन गया सोना
सोने का मौद्रिकरण (माँनेटाइजेशन) करने का मोदी सरकार का फैसला देश की वित्तीय व्यवस्था के लिए क्रांतिकारी साबित हो सकता है। बुधवार को केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने सोने के मॉनेटाइजेशन स्कीम को लागू करने का फैसला किया। इस स्कीम के लागू होने से भारत के लोग अब सोने को भी बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह जमा करके ब्याज खा सकते हैं और जरुरत पडने पर निकाल भी सकते हैॅ। अभी तक लोगों को बैंकों में ज्वैलरी रखने के लिए लॉकर्स लेने पडते थे और इसके लिए कुछ फीस देनी पडती थी। इस स्कीम का बहुत ज्यादा फायदा नहीं हो रहा था क्योंकि बैंक ज्वैलरी का उपयोग नहीं कर सकते थे। नई स्कीम के तहत लोग अब सोने की ज्वैलरी, बिस्कुट अथवा सिक्के बैंकों के पास जमा रखकर दोहरा फायदा उठा सकते हैं। इस पर ब्याज भी मिलेगा और आय पर उन्हें आयकर भी नहीं देना पडेगा। इस स्कीम के लागू होते ही इच्छुक लोगों को बैंकों में अलग से गोल्ड सेविंग अकाउंट खुलवाना होगा। सोना कम-से-कम एक साल और अधिकतम 15 साल के लिए बैंकों में जमा किया जा सकेगा। सोने की शुद्धता की जांच के बाद उसका मूल्य तय किया जाएगा और उसी हिसाब से उस पर ब्याज की अदायगी की जाएगी। तीन साल का ब्याज बैंक खुद तय करेंगे। इससे ज्यादा का ब्याज सरकार तय करेगी। सोने का मौद्रीकरण करके सरकार का मकसद इसके आयात को रोकना है। भारत दुनिया में सोने का सबसे बडा आयातक है। हर साल एक हजार टन से अधिक सोना आयात किया जाता है। अप्रैल 2015 में ही भारत ने 19645 करोड रु के मूल्य का सोना खरीदा था। भारत में सोने को सबसे ज्यादा सुरक्षित निवेश माना जाता है, इसलिए लोग-बाग हर त्यौहार,उत्सव और खुशी के मौके पर सोना खरीदते हैं अथवा भेंट करते हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार भारत में लोगों और धार्मिक स्थलों के पास 22 हजार टन सोना है। इसकी कीमत 63 लाख करोड रु आांकी गई है। भारत के ज्वैलरों का आकलन है कि देश में इससे कहीं ज्यादा लगभग 30,000 करोड सोने का भंडार है। वाल स्ट्रीट जनरल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार इस सोने के भंडार मेंसे केवल मात्र 600 टन से भारत पाकिस्तान, बांग्ला देश , नेपाल, श्रीलंका, भूटान और म्यांमार और मलेशिया को खरीद सकता है। इन सभी देशों का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 600 टन सोने के मूल्य के बराबर है। इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक के पास अलग से 560 टन सोने का भंडार है। भारत की गृहणियों के पास इतना सोना है कि अगर वे चाहें तो रोम के भारी-भरकम 474 अरब डॉलर (31284 अरब रु) को आसानी से अदा कर सकती है। अधिकतर सोना धार्मिक स्थलों के पास है। कुछ साल पहले केरल के एक मंदिर में 22 अरब डॉलर (1452 अरब रु) सोने का भंडार मिला था। भारत अपने सोने के भंडार से अगले सात सालों तक तेल का आयात कर सकता है। अगर इस सोने को विकास के कार्यों पर खर्च किया जाए तो भारत की तस्वीर ही बदल सक्ती है। भारत को सालाना 9 फीसदी ग्रोथ दर पाने के लिए सडकों, रेल लाइनों और बिजली के संयंत्र लगाने के लिए एक खरब रु की जरुरत है। सोने के इस भंडार से इसे पूरा किया जा सकता है। इन सब बातों को सामने रखकर मोदी सरकार ने देश में गृहणियों और मंदिरों में जमा सोने के मौद्रीकरण का फैसला लिया है। लेकिन सरकार के समक्ष इस सोने को बाहर निकालने की बडी चुनौती है। भारत में ग्रहणियों को सोने से बेहद लगाव है और वे छोटी-मोटी कमाई की खातिर अपने से अलग नहीं करेगी। मंदिरों में सोना उसकी भव्यता का प्रतीक है। जब तक सोने पर अच्छा-खास ब्याज नहीं दिया जाता, इसे बाहर नहीं निकाला जा सकता। बहरहाल, आगाज अच्छा हो, तो अंजाम बेहतर ही होगा ।






